कुछ ज्यादा ही बढ़ गया काम वर्क फ्राम होम से छिन गया आराम

कितने ही लोगों को लगता था कि वर्क फ्राम होम से उनकी सुविधा बढ़ जाएगी और वे आराम से अपनी ड्यूटी कर पाएंगे. दफ्तर आने-जाने का समय बचेगा, सो अलग! घर से काम करने में परिवार और बच्चों पर भी ध्यान देना आसान हो जाएगा. ऐसे लोगों ने सोचा क्या था, और क्या हुआ! वर्क फ्राम होम (Work from home) में काम का समय और तनाव दोनों ही बढ़ गया. कामकाजी महिलाएं पहले घर-गृहस्थी के काम व परिवार के लिए समय निकाल लेती थीं क्योंकि आफिस से लौटने के बाद सारा समय उनका अपना होता था लेकिन अब यह बात नहीं रही.

किचन में भी कान में मोबाइल का ब्लूटूथ या ईयरफोन लगा रहता है. कुछ को तो 12 घंटे लॉग इन रहने की नौबत आ गई. रात देर तक जागकर डेली रिपोर्ट तैयार करनी पड़ती है. ऑफिस में लंबा इंटरवल मिल जाता था लेकिन वर्क फ्राम होम में ऑफिस के समान बीच में छुट्टी नहीं मिलती. लोग डेस्क से बंधकर रह गए हैं. उनसे हर समय मीटिंग या कान्फ्रेंस के लिए उपलब्ध होने की उम्मीद की जाती है. व्यक्तिगत कामकाज के लिए लोग समय ही नहीं निकाल पा रहे हैं. यूं तो घर के भीतर हैं लेकिन दिमाग पूरी तरह ऑफिस में है. एक तरह घर ही ऑफिस में कन्वर्ट हो गया है. फोन और बिजली का बिल बढ़ गया है क्योंकि मोबाइल और कंम्प्यूटर के बिना कुछ हो ही नहीं सकता. यह तथ्य सामने आया है कि भारतीयों को औसतन 32 मिनट ज्यादा ड्यूटी करनी पड़ रही है. वे घर का चैन और सुकून खो बैठे हैं. कोरोना संकट की वजह से यही हाल दुनिया के अन्य देशों का भी है.