विश्वनाथन आनंद ऐसे बने शतरंज के बादशाह, इस शख्स का रहा बड़ा योगदान

यह मशहूर खिलाड़ी 5 बार वर्ल्ड चैंपियन (2000, 2007, 2008, 2010, 2012) रहा है।

मुंबई. शतरंज की दुनिया के महारथी कहे जाने वाले  विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) आज अपना 51 वां जन्मदिन मना रहे है। विश्वनाथन आनंद को ‘मद्रास टाइगर’ और ‘विशी’ के नाम से भी जाना जाता है। यह मशहूर खिलाड़ी 5 बार वर्ल्ड चैंपियन (2000, 2007, 2008, 2010, 2012) रहा है। विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) साल 2003 में फीडे विश्व शतरंज चैंपियनशिप में विश्व शतरंज बने। खास बात यह है कि वह अपने समय के ड्रीड खिलाड़ी माने जाते हैं।तो आइये आज शतरंज के बादशाह के जन्मदिन के अवसर पर जानते हैं उनके बारे में कुछ खास बातें। 

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) का जन्म 11 दिसंबर 1969 को तमिलनाडु के छोटे से शहर मयिलाडुथराई में हुआ। विश्वनाथन आनंद ने चेन्नई से अपनी पढ़ी पूरी की। बता दें कि विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand)  को चेस खेलने की आदत उनकी मां ने लगाई। दरअसल, उनकी मां ने 6 साल की उम्र से विश्वनाथन आनंद को चेस खेलने की ट्रेनिंग देना शुरू किया था। इसके बाद साल 1982 में उन्होने जूनियर चैंपियनशिप की राष्ट्रीय प्रतियोगिता जीती।

साल 1991 में विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) का नाम चर्चा में आया। दरअसल, साल 1991 में रेगिओ एमिलिआ टूर्नामेंट का ख़िताब अपने नाम करना उनकी लाइफ का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। इस टूर्नामेंट में विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) ने गैरी कास्परोव को हराते हुए शतरंज की दुनिया अपनी जगह बनाई थी । हालाँकि, इससे पहले साल 1988 में विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर बन चुके थे। 

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) साल 2000 में भारत के ही नहीं बल्कि एशिया के प्रथम शतरंज विश्व-चैंपियन बने । उन्होंने 24 दिसंबर 2000 को  तेहरान में हुई चैंपियनशिप में अलेक्सई शिरोव को हराकर विश्व-चैंपियन का खिताब अपने नाम किया। इसके बाद साल 2002 विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) ने विश्व स्तर की एक और सफलता प्राप्त कर नया इतिहास रच डाला।

फ्रांस में होने वाले कोर्सिका ओपन चेस टूर्नामेंट के पहले खेल में हारने के बाद विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) ने छठे खेल में  रूस के अनोतोली कारपोस को हराया और जीत हासिल की। इसके बाद साल 2002 में ही आनंद ने मई में प्राग में यूरोटेल टाइटल और जुलाई में ‘चेस क्लासिक’ का मैन्ज टाइटल जीता । 

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) ने साल 2000 से 2002 तक FIDE World Chess Championship का ख़िताब अपने नाम रखा। इसके बाद साल 2007 में वह विश्व विजेता बने और साल 2008 में उन्होंने अपना ख़िताब व्लाडामीर क्राम्निक से बचाया। एक के बाद एक सफलता हासिल करने के बाद उन्होंने साल 2010 वेसेलिन तपोलाव को हराकर विश्व विजेता प्रतियोगिता का ख़िताब हासिल किया।

साल 2012 में विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) ने बोरिस गल्फ के खिलाफ अच्छा गेम खेलते हुए विश्व शतरंज प्रतियोगिता का ख़िताब अपने नाम किया। विश्वनाथन आनंद ने साल 2014 कैंडिडेट्स टूर्नमेंट जीता। विश्वनाथन आनंद ने अपनी योग्यता के आधार पर मैग्नस कार्लसन के खिलाफ वर्ल्ड टाइटल मैच के लिए क्वॉलिफाइ किया। 

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) का नाम उन 9 मशहूर खिलाड़ियों में शामिल हैं। जिन्होंने FIDE विश्व शतरंज चैंपियनशिप की लिस्ट में अपने ही पुराने रिकॉर्ड को तोडा और पूरे 21 महीनों तक विश्व के नंबर 1 खिलाड़ी बने रहे।   

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) को राजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार दिया गया। विश्वनाथन आनंदराजीव गांधी खेल रत्न पुरस्कार पाने वाले पहले खिलाड़ी थे। इसके बाद विश्वनाथन आनंद ऐसे पहले खिलाड़ी थे, जिन्हें  इसके बाद पद्मश्री मिला था। आनंद पहले ऐसे भी खिलाड़ी थे, जिन्हें साल 2010 में तब के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा के लंच में न्योता दिया गया था।   

विश्वनाथन आनंद (Viswanathan Anand) को भारत सरकार ने खेल क्षेत्र में अर्जुन अवॉर्ड (1985 ), पद्म श्री (1986 ), पद्म भूषण (2000 ), पद्म विभूषण (2007 ), राजीव गांधी खेल रत्न (1991-1992) से सम्मानित किया था।