न्यूजीलैंड टीम (Photo Credits-ICC Twitter)
न्यूजीलैंड टीम (Photo Credits-ICC Twitter)

    -विनय कुमार 

    भारत और न्यूजीलैंड के बीच खेले गए पहले ‘आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप’ (ICC World Test Championship Final 2021) के फाइनल मैच में बारिश और खराब रोशनी से लगातार मिली बाधाओं के बावजूद रिजर्व डे (reserve day WTC) पर टेस्ट क्रिकेट के सम्राट का फैसला हो गया। न्यूजीलैंड ने इंग्लैंड के साउथैम्पटन के मैदान पर खेले गए 144 साल के टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में  पहले वर्ल्ड कप के निर्णायक मुकाबले में शानदार प्रदर्शन करते हुए ‘विराट सेना’ (ICC WTC Final India vs New Zealand) को चित कर दिया और टेस्ट क्रिकेट की पहली चैम्पियन बन गई है। 

    न्यूजीलैंड ने अपने देश के लिए आईसीसी की दूसरी ट्रॉफी जीती है। आज से करीब 21 साल पहले न्यूजीलैंड ने 2000 में खेली गई ‘नॉकआउट ट्रॉफी’ (ICC Knockout Trophy 2000) के फाइनल में भारत को हराकर (New Zealand vs India Knockout Trophy 2000) पहली आईसीसी ट्रॉफी जीता था। इसके साथ ही 2003 के बाद भारत कभी भी आईसीसी टूर्नामेंट के मैचों में न्यूजीलैंड की टीम को हरा नहीं पाई। 

    गौरतलब है कि भारतीय टीम ने WTC Final मैच में पहले बल्लेबाजी करते हुए अपनी पहली पारी में 217 रन बनाए। जिसके जवाब में कीवी टीम ने 249 रन स्कोर किया और 32 रनों की बढ़त हासिल की। मैच की दूसरी पारी में समूची ‘विराट सेना’ 170 रनों पर ऑल आउट हो गई और इस ऐतिहासिक मैच को जीतने के लिए न्यूजीलैंड को 53 ओवर्स में 139 रनों का लक्ष्य पर करना था। कीवी टीम ने इस लक्ष्य को आराम से खेलते हुए बड़ी आसानी से 46 ओवर्स के अंदर ही हासिल कर लिया और पहला ‘ICC World Test Championship’ की बाज़ीगर बन गई। चैंपियन बन गई। इस मैच में न्यूजीलैंड ने भारत को 8 विकेट से हराया। 

    आइए एक नजर भारतीय टीम की तरफ से की गई उन 5 बड़ी गलतियों पर डालें जिसके कारण उसे हार का मुंह देखना पड़ा: 

    विराट कोहली और चेतेश्वर पुजारा का फ्लॉप शो-

    भारतीय टेस्ट टीम की बल्लेबाजी में कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) और चेतेश्वर पुजारा (Cheteshwar Pujara) को रीढ़ की हड्डी माना जा रहा था। लेकिन, दोनों इस ऐतिहासिक मैच में फिसड्डी साबित हुए। विराट कोहली ने WTC फाइनल की पहली पारी में भले ही 44 रनों का योगदान दिया, लेकिन दूसरी पारी में सिर्फ 13 रन बनाकर बेहद सस्ते में आउट होकर चलते बने। वहीं चेतेश्वर पुजारा ,(Cheteshwar Pujara) पहली पारी में 8 तो दूसरी पारी में 15 रन बनाकर लंगड़ा घोड़ा साबित हुए। आप टेस्ट क्रिकेट के सबसे बड़े मैच में खेलने देश की टीम उतरी हो, तो मैच एक पारी में गलती स्वीकार की जा सकती है, लेकिन मैच की दोनों पारियों में फ्लॉप होना टीम इंडिया को बहुत्वभारी पड़ा।

    टेलएंडर्स की बल्लेबाजी ने डाला फर्क-

    आईसीसी वर्ल्ड टेस्ट चैम्पियनशिप के फाइनल में टीम इंडिया की हार की एक और बड़ी वजह रही, दोनों टीमों के टेलएंडर्स (Tailenders) की तरफ से की गई बल्लेबाजी, जहां टीम इंडिया के टेलएंडर्स बुरी तरह फ्लॉप हुए। लेकिन, न्यूजीलैंड के टेलएंडर्स ने अपने पक्ष में मैच का पलड़ा भारी करने की भूमिका निभाई। मैच की पहली पारी में भारतीय टीम के अंतिम 4 खिलाड़ियों ने सिर्फ 34 रन जोड़ा और दूसरी पारी में सिर्फ 28 रन। वहीं दूसरी तरफ न्यूजीलैंड की टीम के आखिरी के 4 बल्लेबाजों ने पहली पारी में अपनी टीम के लिए 87 रन जोड़े और घातक गेंदबाजी कर मैच में वापसी कर रही भारतीय टीम को बैकफुट पर धकेल दिया और 32 रनों की महत्वपूर्ण बढ़त ले ली। और इस बढ़त ने मैच के नतीजे में बड़ा रोल निभाया।

    कीवी पेसर्स के मुकाबले फीके रहे भारतीय बोलर्स-

    दोनों टीमों के बीच गौर करें तो एक बात साफ नजर आती है कि तेज गेंदबाजों की फॉर्म में भी बड़ा फर्क दिखा। जहां न्यूजीलैंड के तेज गेंदबाजों ने जबरदस्त प्रदर्शन करते हुए भारत के 20 विकेट उखाड़ने में कामयाब रहे, वहीं भारत की तरफ से जसप्रीत बुमराह की गेंदबाजी पूरी तरह से कुंद नजर आई। उनके खाते में एक भी विकेट नहीं आया। वहीं मोहम्मद शमी (Mohammed Shami) ने भारतीय गेंदबाजों में सबसे ज्यादा 4 विकेट लिए। जबकि ईशांत शर्मा (Ishant Sharma) सिर्फ 3 ही विकेट झटक पाए। इस ऐतिहासिक मैच में कीवी गेंदबाजों के सामने भारतीय बल्लेबाज संघर्ष करते नजर आ रहे थे, लेकिन टीम इंडिया के बोलर्स कीवी बल्लेबाजों के खिलाफ वो घातक असर डालने में असफल रहे।

    दूसरी पारी की बैटिंग में ‘विराट- सेना’ की खराब एप्रोच-

    भारतीय टीम की हार की सबसे बड़ी वजह रही मैच की दूसरी पारी की बल्लेबाजी में उसकी खराब एप्रोच, जिसके कारण उसे खुद ऐसे हालातों से घिरना पड़ा कि उसकी हार तय हो गई। बारिश के कारण मैच के दो दिन धुल जाने के बाद टीम इंडिया 5वें दिन दूसरी पारी में बल्लेबाजी करने उतरी थी। जिसके बाद ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि अगर भारतीय बल्लेबाज रिजर्व डे (reserve day WTC Final) पर लंच के बाद आधे समय तक बल्लेबाजी कर लेते हैं, तो 200 प्लस स्कोर बना लेंगे और न्यूजीलैंड के सामने दो ही परिणाम रहेंगे- हार या फिर ड्रॉ। लेकिन, भारतीय टीम मैच की दूसरी पारी में बेहद खराब एप्रोच के साथ बल्लेबाजी करती दिखी। ‘रिजर्व डे’ पर लगातार खराब शॉट खेलकर अपना विकेट गंवाती चली गई। पहले चेतेश्वर पुजारा, फिर ऋषभ पंत और आखिरी में रविचंद्रन अश्विन। इन खिलाड़ियों के बेहद गैरजिम्मेदाराना और खराब शॉट के कारण न सिर्फ भारतीय पारी 170 रन पर सिमट गई, बल्कि कीवी टीम को 53 ओवर्स का फासला भी मिल गया जीत के लिए एक बेहद आसान लक्ष्य 139 रन बनाने के लिए। 

    खली तेज गेंदबाज ऑलराउंडर की कमी-

    भारतीय टीम के मैनेजमेंट ने टेस्ट क्रिकेट के इस बड़े ऐतिहासिक मैच में 3 तेज गेंदबाज और 2 स्पिन ऑलराउंडर के कॉम्बिनेशन के साथ मैदान ए जंग में उतरने का फैसला किया था, जो फॉर्मूला टेस्ट फॉर्मेट में पहली बार देखा गया। मैच का पहला दिन बारिश से धुल जाने के बाद कई क्रिकेट-पंडितों ने टीम में अतिरिक्त तेज गेंदबाज को टीम में लेने की राय सामने रखी थी। लेकिन, भारतीय टीम के एंग्री यंग मैन कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli Captain Indian Cricket Team) ने उसी प्लेइंग इलेवन के साथ जाने का फैसला किया। और उसके बाद विराट कोहली को उनका वो निर्णय बहुत महंगा पड़ा। इस मैच में उन्हें हार्दिक पांड्या (Hardik Pandya) जैसे गेदबाज-ऑल राउंडर खिलाड़ी की कमी बहुत महसूस हुई। इस ऐतिहासिक मैच में कप्तान  कोहली शार्दुल ठाकुर (Shardul Thakur) को लेकर इस कमी को दूर कर सकते थे, लेकिन 2 स्पिन गेंदबाज और 3 फास्ट बोलर्स के साथ गए। उनके इस फैसले से न बल्लेबाजी में धार नजर आई और न ही गेंदबाजी में कोई दम दिखा। और इन्हीं गलतियों की वजह से भारत के हाथ से टेस्ट क्रिकेट की पहली वर्ल्ड कप ट्रॉफी हाथ से निकल गई।