Australia to win India-Australia Test series, but match would be tough: Wasim Akram

    -विनय कुमार

    पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व धाकड़ तेज गेंदबाज वसीम अकरम (Wasim Akram Pakistan Fast Bowler) अपने देश की टीम का कोच नहीं बनना चाहते हैं। उनका कहना है कि यह काम बहुत टाइम टेकिंग है। साथ ही उनके देश में क्रिकेट के प्रशंसक बदतमीजी भी करते हैं। हालांकि, वसीम अकरम ने कहा कि जब भी पाकिस्तान क्रिकेट टीम को जरूरत होगी, अपने देश के खिलाड़ियों और युवाओं की सहायता के लिए हमेशा मौजूद रहेंगे।

    वसीम अकरम (Wasim Akram) ने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में पाकिस्तान की टीम में रहते हुए 414 टेस्ट (Wasim Akram Test Wickets) और 502 एकदिवसीय विकेट(Wasim Akram ODI Wickets)  लिए हैं। उन्होंने ICC World Cup 1996 और 1999 में भी हिस्सा लिया था। वसीम अकरम ने ‘क्रिकेट पाकिस्तान’ (Cricket Pakistan) को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘”जब आप कोच (Cricket Team Coach) बनते हैं, तो आपको टीम को साल में कम-से-कम 200 से 250 दिन देने की जरूरत होती है, और यह बहुत समय होता है। मुझे नहीं लगता कि मैं अपने परिवार से, पाकिस्तान (Pakistan Wasim Akram) से दूर रहकर इतना काम संभाल सकता हूं। और वैसे भी मैं  पाकिस्तान सुपर लीग (Pakistan Super League PSL) में अधिकांश खिलाड़ियों के साथ समय बिताता हूं, उन सभी के पास मेरा नंबर है।”

    वसीम अकरम(Wasim Akram) ने पाकिस्तानी क्रिकेट टीम के प्रशंसकों (फैंस) और फॉलोअर्स की बदतमीजी और बेरुखी को भी कोच नहीं बनने की वजहों में शामिल किया। वसीम ने कहा, “मैं मूर्ख नहीं हूं। मैं देखता और सुनता हूं, कि लोग किस तरह कोच (coach) और सीनियर्स (seniors in Pakistan Cricket) के साथ बदतमीजी करते हैं। खेलने वाला कोच नहीं होता है। यह काम खिलाड़ियों का है। कोच केवल प्लानिंग बनाने (coach plnas for team) में मदद कर सकता है, इसलिए अगर टीम हारती है, तो मुझे नहीं लगता कि कोच को उतना जिम्मेदार ठहराना चाहिए, जितना एक देश के तौर पर जिम्मेदार हम ठहराते हैं।”

    अकरम यहीं नहीं रुके उन्होंने कहा, “इसलिए मुझे इन सबका डर भी लगता है, क्योंकि मैं अपने साथ किसी तरह की बदतमीजी (misbehaviour) बर्दाश्त नहीं कर सकता। हम ऐसे ही बनते जा रहे हैं। मुझे लोगों से प्यार है, खेल के लिए उनका जोश और उत्साह (love for Cricket) भी पसंद है। लेकिन, social media पर उनकी बदतमीजी झलकती है, जो यह साफ नजर आती है।”