bio-bubble-is-tough-but-indians-more-tolerant-sourav-ganguly

    -विनय कुमार 

    इसमें कोई दो राय नहीं कि विदेशी मैदानों पर जीतने का जुनून भारतीय टीम में साैरव गांगुली (Sourav Ganguly) ने ही भरा है। इसकी पहली मिसाल 19 साल पहले दिखी थी, जब भारतीय टीम ने इंग्लैंड को उन्हीं की ज़मीन पर धूल चटाई थी और ट्रॉफ़ी अपने नाम किया था। बात 13 जुलाई 2002 की है। टीम इंडिया के कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Captain Indian Cricket Team 2002 India vs England) की कप्तानी में भारत ने ‘नेटवेस्ट सीरीज’ का फाइनल (NatWest Series 2002) जीतकर इतिहास रचा था। इस जीत की सबसे बड़ी बात ये थी कि इंग्लैंड को उसी की सरजमीं पर हराकर जीत हासिल कर ‘दादा’-टीम का भारत लाैटना।

    घबरा गई थी ‘अंग्रेजी’ पलटन

    करोड़ों प्रशंसकों लोगों की निगाहें आप पर हों, और आप उम्मीद पर खरा न उतरो, तो उसका मलाल किसे नहीं होगा। तब अंग्रेजी खेमे (Team England) की स्थिति भी वैसी ही थी। उन्होंने सोचा भी नहीं था कि टीम इंडिया उन्हें बड़ा स्कोर करने के बावजूद भी बुरी तरह से धूल चटाएगी। खासकर तब, जब मैच के बीच में उनका पलड़ा भारी हो गया था, लेकिन रुख़ पलट गया। जो अंग्रेज़ी टीम जीत की संभावनाओं की खुशी के पुए पका रही थी, कि अचानक भारत के खिलाड़ियों के रौद्र रूप को देखकर घबरा गए। भारत जीत गया, और इंग्लैंड सहम गया। इसी के साथ सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Captain Indian Cricket Team 2002) की ‘दादा’गिरी भी शुरू हो गई। ‘दादा’ की कप्तानी में भारतीय क्रिकेट टीम ने विदेशी मैदानों पर जीत का स्वाद ऐसा चखा कि उसके बाद विरोधी टीमों को नाकों चने चबाने पड़ने लगे।

    भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व दमदार कप्तान साैरव गांगुली (Sourav Ganguly Former Captain Indian Cricket Team) ने भारतीय क्रिकेट टीम के लिए कई महत्वपूर्ण योगदान दिया हैं। उन्होंने बल्लेबाजों से लेकर गेंदबाजों तक को तराशने में कड़ी मेहनत की। जिसके बाद परिणाम यह निकला कि उनके संन्यास लेने के बाद टीम इंडिया ने महेंद्र सिंह धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में आईसीसी की तीनों ट्राॅफियों (ICC T20 WORLD CUP 2007, ICC ODI WORLD CUP 2011, ICC CHAMPIONS TROPHY 2013) पर कब्जा किया। सौरव गांगुली भले ही अपनी कप्तानी में भारत को ‘आईसीसी ट्राॅफी’ (ICC TROPHY) न जिता पाए हों, 17 साल पहले इंग्लैंड के मैदान में ‘नेटवेस्ट सीरीज’ (NatWest Series 2002) जीतकर इतिहास रचा था।  

    बेहद रोमांचक मैच में ऐसे जीता भारत.

    NatWest Series 2002 थी। लंदन का लाॅर्ड्स (Lord’s Stadium England) मैदान था। इस पिच पर तेज रफ्तार से आने वाली गेंदें किसी भी बल्लेबाज को मुश्किल पैदा कर देती हैं। उस मैच में इंग्लैंड ने टाॅस जीता और पा बल्लेबाजी करते हुए भारत के सामने जीत के लिए 326 रनों का लक्ष्य रखा था। नासिर हुसैन (Nasir Hussain) ने 115 और मार्कस ट्रेस्कोथिक (Marcus Trescothick) ने 109 रनों की बेहतरीन शतकीय पारियां खेली। तेज पिच पर भारत के लिए यह लक्ष्य हासिल करना बहुत आसान नहीं था। ऐसा मौका भी आया उस मैच के दौरान, जब लगा कि टीम इंडिया की पकड़ छूट चुकी है। क्योंकि, 146 रनों के अंदर भारत की आधी टीम आउट हो चुकी थी।  कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Captain), वीरेंद्र सहवाग (Virendra Sehwag), सचिन तेंडुलकर (Sachin Tendulkar) और राहुल द्रविड़ (Rahul Dravid) जैसे महारथी शामिल थे। मैच हाथ से निकला  जा रहा था। तभी छठे नंबर पर बल्ला थामे क्रीज पर युवराज सिंह (Yuvraj Singh) आए और 7वें नंबर पर आए मोहम्मद कैफ (Mohammed Kaif) ने इंग्लिश गेंदबाजों की बेरहमी से शुरू कर दी। मोहम्मद कैफ ने युवराज (69 रन) के साथ 121 रनों की बेहतरीन पार्टनरशिप कर टीम इंडिया की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। युवराज सिंह 63 गेंदों में 69 रन बनाकर आउट हुए। तब भी भारत जीत के लक्ष्य से 59 रन जीत दूर था। लेकिन, 

    मोहम्मद कैफ़ ने हिम्मत नहीं हारी और 75 गेंदों में 6 जानदार चौके और 2 शानदार छक्कों की मदद से 89 रन बनाकर नाबाद रहते हुए टीम इंडिया को ऐतिहासिक जीत दिलाई थी।

    ‘दादा’गिरी में नज़र आई लहराती टी-शर्ट

    जीत की खुशी में भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली (Sourav Ganguly Captain Indian Cricket Team NatWest Series 2002 India vs England) ने अपनी टी-शर्ट उतारकर हवा में लहराते हुए अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया था। उन्होंने उस बीते कल का इस मैच में बदला ले लिया, जिसका मानों उन्हें शिद्दत से इंतजार था।  गौरतलब है कि, 2002 में इंग्लैंड क्रिकेट टीम ने भारत का दौरा किया था। इस दौरे का एक वनडे मैच मुंबई के वानखेडे स्टेडियम (India vs England Mumbai Wankhede Stadium 2002) में खेला गया था, जिसमें इंग्लैंड ने भारत को हरा दिया था। उस मैच में जीत ही एंड्रयू फ्लिंटॉफ (Andrew Flintoff) ने अपनी जर्सी उतारकर स्टेडियम में दौड़ लगाना शुरू कर दिया था। यह नजारा तब भारत के कप्तान सौरव गांगुली की आंखों में चुभ गई थी। जिसका बदला उन्होंने ‘नेटवेस्ट सीरीज’ (NatWest Series) जीतने के बाद अपनी टी-शर्ट हवा में लहराते हुए ले लिया था। ये थी दादा’गिरी’ की ज़िंदा मिसाल।