Team India
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    -विनय कुमार 

    रवि शास्त्री की निगरानी में भारतीय टीम ने भले  आईसीसी ट्राॅफी नहीं जीती, लेकिन क्रिकेट की दुनिया में टीम इंडिया ने कोच रवि शास्त्री की अगुवाई में एक खास धाक ज़रूर जमाई। विदेशी पिचों पर मुकाबलों में कैसे विपक्षी टीम को शिकस्त देना है, इसकी रणनीति तो मैनेजमेंट के साथ मिलकर उन्होंने ही तैयार की थी।  

    गौरतलब है कि साैरव गांगुली (Sourav Ganguly) की कप्तानी में भारतीय टीम ने विदेशी मैदानों में कुछ जीत ज़रूर हासिल की थी, वो रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ही हैं, जिनकी कोचिंग में टीम इंडिया ने सूरमा मानी जानी वाली टीमों को उनके डोमेस्टिक ग्राउंड में धूल चटाई। एक मैच नहीं बल्कि, सीरीज भी जीती। इतिहास गवाह है कि कोच रवि शास्त्री की अगुवाई में भारतीय टीम ने ऑस्ट्रेलिया, वेस्ट इंडीज और और साउथ अफ्रीका में बेहतरीन जीत हासिल की। रवि शास्त्री ने बतौर कोच अपने कार्यकाल में कई युवा खिलाड़ियों को भारतीय टीम में शामिल होने का मौका दिया।

    नया जोश और जुनून भर गए युवाओं में रवि शास्त्री

    12 जुलाई 2017 का वो दिन जब रवि शास्त्री ने अनिल कुंबले (Anil Kumble) की जगह टीम इंडिया के हेड कोच का पद संभाला था। इससे पहले शास्त्री 2014 से 2016 तक भारतीय टीम के डायरेक्टर थे। भारतीय टीम में नए बदलावों के लिए रवि शास्त्री से काफी उम्मीदें थीं, जिसपर वे खूब खरे उतरे। उन्हें एक बात का मलाल ज़रूर रहेगा कि, उनके कार्यकाल में भारतीय टीम एक भी ICC Trophy अपने नाम नहीं कर सकी। लेकिन, तस्वीर का एक सच्चा रुख़ ये भी है कि बीते 4 सालों में उनकी निगरानी में टीम इंडिया का ज़बरदस्त दबदबा रहा। रवि शास्त्री ने उन युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी, जिन्होंने IPL में बेहतरीन प्रदर्शन किया। युवाओं को मौके दिए और उनमें एक अलग लेवल का जोश और जुनून भरा। समूची दुनिया ने इस बात को देखा कि किसी भी हालात में, दुनिया की किसी भी टीम के खिलाफ खुलकर खेलने की बात हो, खेलने की छूट दी, चाहे रिज़ल कुछ भी हो। यही वजह रही कि भारतीय टीम के प्लेइंग इलेवन में लगातार कई बदलाव भी देखने मिले। ये बदलाव सही भी साबित हुए। हां, इस रणनीति की वजह से ICC के टूर्नामेंट में कई सवाल भी उठे।

    रवि शास्त्री ऐसे रहे सफल कोच 

    भारतीय टीम ने शास्त्री के कोच रहते ऑस्ट्रेलिया में (Australia vs India Test Series) दो टेस्ट सीरीज जीती। विराटसेना ने इसी साल अगस्त-सितंबर में इंग्लैंड में 5 मैचों की टेस्ट सीरीज (India vs England Test Series, 2021) खेली, जिसमें 2-1 से जीत दर्ज़ की।  ये वो परिणाम हैं जो रवि शास्त्री को एक कामयाब कोच बनाते हैं। यही नहीं, उनके कार्यकाल में टीम इंडिया ने 42 में से 24 टेस्ट मैचों में जीत हासिल की। वहीं वनडे इंटरनेशनल में तो भारतीय क्रिकेट टीम ने गजब प्रदर्शन किया। अब तक खेले कुल 79 वनडे मुकाबलों में से 53 में जीत दर्ज की। T20 इंटरनेशनल की बात की जाए तो रवि शास्त्री के कार्यकाल में टीम इंडिया ने 67 मैच खेले, जिसमें 43 मुकाबलों में जीत हासिल की। कुल मिलाकर रवि शास्त्री के कार्यकाल में टीम इंडिया ने 65 फीसदी की जीत क्रिकेट के तीनों फाॅर्मेट में हासिल की। ये आंकड़े इस बात की आईना हैं कि भारतीय क्रिकेट टीम ने रवि शास्त्री की निगरानी में कितनी धमक बनाई है। यही नहीं, टेस्ट क्रिकेट में लंबे समय तक भारतीय टीम नंबर वन रैंकिंग में रही।

    कई खिलाड़ियों का हुआ अंतरराष्ट्रीय डेब्यू

    रवि शास्त्री के (Ravi Shastri) कार्यकाल में कई नई प्रतिभाएं सामने लाई गईं। आज BCCI के पास इतने युवा जानदार खिलाड़ियों के ऑप्शंस हैं कि एक ही समय दो टीमें मैदान पर उतारी जा सकती हैं। जब रवि शास्त्री भारतीय टीम के साथ बतौर हेड कोच ज्वाइन किए थे, तब से अब तक 24 युवा खिलाड़ियों को वनडे में डेब्यू करने का अवसर मिला। वहीं, अंतरराष्ट्रीय टेस्ट क्रिकेट में 14 युवा खिलाड़ियों ने कदम रखा। इसके अलावा 22 युवा खिलाड़ी T20 क्रिकेट में डेब्यू करते नज़र आए। इतिहास गवाह है कि, उनसे पहले किसी भी कोच के कार्यकाल में इतने खिलाड़ियों को डेब्यू करने का अवसर नहीं मिला। खास बात ये रही कि रवि शास्त्री ने उन खिलाड़ियों पर बार-बार अपना विश्वास दिखाया जो आने वाले कल टीम इंडिया के लिए तुरुप का पत्ता साबित हो सकते हैं। ऋषभ पंत, हार्दिक पांड्या, युजवेंद्र चहल जैसे धुरंधर खिलाड़ी उन्हीं में शामिल हैं। हालांकि, रवि शास्त्री (Ravi Shastri) के कार्यकाल में एक भी ICC Trophy टीम इंडिया नहीं जीत पाई, लेकिन उन्होंने ऐसे धारदार खिलाड़ी BCCI को चुनकर दिए हैं, जो भविष्य में महान इतिहास रचने का माद्दा रखते हैं।