18,000 children infected in Nashik, first infected on 28 March 2020
प्रतीकात्मक तस्वीर

    • 107 बच्चों को दी गई सामाजिक, मानसिक, आर्थिक सहायता

    अकोला. रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 उपक्रम रेलवे स्टेशन पर बेसहारा, भिखारियों और बाल मजदूरों के लिए एक संजीवनी बन गया है. यह रेल मंत्रालय, केंद्रीय महिला एवं बाल विकास विभाग की एक पहल है. अकोला में इस प्रोजेक्ट को तीक्ष्णगत मल्टीपर्पज वेलफेयर सोसाइटी को सौंप दिया गया है.

    इस संस्था ने पिछले तीन वर्ष में कुल 107 बच्चों को सामाजिक, मानसिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान करने की जानकारी तीक्ष्णगत सोसायटी के संस्थापक अध्यक्ष सुगत वाघमारे ने दी. देश भर के 541 जिलों और 114 रेलवे स्टेशनों पर ‘रेलवे चाइल्ड हेल्पलाइन 1098’ चौबीसों घंटे चल रही है. यदि आप 1098 पर कॉल करते हैं, तो संकटग्रस्त बच्चों को टीम द्वारा रेस्क्यू किया जाएगा. इसके लिए जीआरएफ और आरपीएफ पुलिस उनकी मदद कर रही है.

    वाघमारे ने कहा कि इस पहल का एकमात्र उद्देश्य रेलवे स्टेशन और उसके आसपास के बच्चों की सुरक्षा करना है. चाइल्ड लाइन ने बताया है कि जो बच्चे किसी कारणवश अपने परिवार से भटक गए हैं, वे रेलवे पर निर्भर हैं. परामर्श के साथ ऐसे बच्चों के पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित करने के लिए देश भर में ‘रेलवे चाइल्ड लाइन’ का एक नेटवर्क स्थापित किया गया है. देश भर में संचालित होने वाली रेलवे चाइल्ड लाइन पिछले तीन वर्षों से अकोला जैसे उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में काम कर रही है.

    रेलवे चाइल्ड लाइन अनाथों, बेसहारा, भिखारियों, अपराध के शिकार, बाल श्रम, अलगाव और बाल शोषण के शिकार बालकों तक पहुंचने के लिए काम कर रही है. कुछ बच्चे जानबूझ कर घर छोड़ देते हैं, कुछ लापता हो जाते हैं और कुछ नशे की वजह से भटक जाते हैं. रेलवे स्टेशन क्षेत्र में ऐसे नाबालिगों की संख्या बढ़ती ही जा रही है. हेल्पलाइन नंबर 1098 पर लगातार सूचनाएं मिल रही हैं. इसको लेकर दिन-रात फोन आ रहे हैं. वहीं संबंधित बच्चों तक पहुंचने और उनकी मदद करने के लिए ‘रेलवे चाइल्ड लाइन’ कार्यरत हैं.

    अकोला में 12 लोगों की टीम

    रेलवे स्टेशनों पर असहाय, व्यसनी, भीख मांगने और आवारा बच्चों की बढ़ती संख्या की पृष्ठभूमि में अकोला जिले में ‘रेलवे चाइल्ड लाइन’ शुरू की गई थी. वर्तमान में जिले के अकोला, अकोट, मुर्तिजापुर, बोरगांव मंजू, बार्शीटाकली, पारस रेलवे स्टेशनों के क्षेत्र में ऐसे बच्चों की काउंसलिंग एवं पुनर्वास का कार्य ‘तीक्ष्णगत मल्टीपर्पज वेलफेयर सोसाइटी’ के माध्यम से किया जा रहा है. संस्था का रणपिसे नगर में एक कार्यालय है और केंद्र समन्वयक और परामर्शदाता के साथ काम करने वाले 12 लोगों की एक टीम है. बच्चे के असुरक्षित या घूमते पाए जाने पर उनकी मदद करने, घर छोड़ने, उन्हें सलाह देने और उन्हें उनके परिवारों से मिलाने के लिए टीम मदद करती है.

    संस्था ने पिछले तीन वर्षों में रेलवे स्टेशन और जिले में 107 बच्चों की विभिन्न प्रकार से मदद की है. जिसमें 36 बच्चों को खाद्यान्न, 10 बच्चों को चिकित्सा सहायता, 15 बच्चों को स्कूल सामग्री और 4 बच्चों को आश्रय प्रदान किया है. साथ ही 2 परित्यक्त बच्चे और एक भीख मांगने वाली महिला का एक बच्चा तथा रेलवे स्टेशन पर भीख मांगने वाले 3 बच्चे इस तरह कुल 6 को चाइल्डकेअर सुविधाएं, 9 बच्चों की होम काउंसलिंग, 13 भागे हुए और ट्रेन से यात्रा करने वाले 2 बच्चे ऐसे 15 बच्चों का पुनर्वास, परिजन तथा रिश्तेदारों से पीड़ित 2 बच्चें इस तरह कुल 107 बालकों की संस्था द्वारा सामाजिक, मानसिक एवं आर्थिक सहायता प्रदान की गयी है.- सुगत वाघमारे, संचालक, तीक्ष्णगत मल्टीपर्पज वेलफेयर सोसाइटी, अकोला.