किसानों की लड़ाई सत्य की लड़ाई थी, असत्य को तो पराजित होना ही था

    • किसान बिल वापसी की घोषणा पर नेताओं की प्रतिक्रिया
    • अनेक नेताओं ने निर्णय का स्वागत किया

    अकोला. आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की है कि तीनों किसान बिल वापस लिए जाएंगे. इस बात को लेकर जब विभिन्न पार्टियों के नेताओं से बातचीत की गयी तो किसी ने कहा कि किसानों की लड़ाई सत्य की लड़ाई थी, जीत तो अंत में सत्य की होनी ही थी, तो किसी ने कहा कि प्रधानमंत्री जी का यह निर्णय स्वागत योग्य है. प्रस्तुत है शहर के गणमान्यों और जनप्रतिनिधियों की प्रतिक्रियाएं. 

    निर्णय स्वागत योग्य-गोवर्धन शर्मा

    अकोला के वरिष्ठ भाजपा विधायक गोवर्धन शर्मा से बातचीत करने पर उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री महोदय का यह निर्णय स्वागत योग्य है और हम उनके इस निर्णय का स्वागत करते हैं. 

    निर्णय पहले लेते तो कई किसानों की जान बच जाती-डा.जीशान हुसैन

    प्रदेश युवक कांग्रेस के महासचिव तथा पार्षद डा.जीशान हुसैन ने कहा कि कुछ पूंजी पतियों के कहने में आकर प्रधानमंत्री महोदय तीन काले कृषि कानून लाए थे जिन्हें आज वापस लेने की घोषणा की गयी है. यदि कानून वापसी की घोषणा कुछ माह पहले की गयी होती तो कई बेकसूर किसानों की जान बच सकती थी. आज भी कानून वापसी की घोषणा सिर्फ यूपी के चुनाव को देखकर की गयी है. 

    चुनाव को देखकर निर्णय- अशोक अमानकर

    जिला कांग्रेस कमेटी ग्रामीण के अध्यक्ष अशोक अमानकर ने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए प्रधानमंत्री महोदय ने यह निर्णय लिया है, हो सकता है कि चुनाव के बाद वे अपना यह निर्णय बदल दें, कुछ कहा नहीं जा सकता है.

    सत्य की जीत होनी ही थी- हिदायत पटेल

    जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष तथा वरिष्ठ सहकार नेता हिदायत पटेल ने कहा कि किसानों की लड़ाई सत्य की लड़ाई थी और अंत में सत्य की जीत होनी ही थी. निर्णय स्वागत योग्य है लेकिन इस पर तुरंत अमल होना चाहिए. यह भी उतना ही सही है कि निर्णय उ.प्र. चुनाव को देखकर लिया गया है.

    केंद्र द्वारा कुठाराघात- धनंजय मिश्रा

    शेतकरी संगठन के विदर्भ अध्यक्ष धनंजय मिश्रा ने कहा कि संसद में बहुमत होने के बाद भी केंद्र सरकार द्वारा कुछ किसान संगठनों के दबाव में यह निर्णय लिया है, आज के इस निर्णय से किसानों पर कुठाराघात हुआ है. तीन कृषि कानून लाने से किसानों को स्वतंत्रता मिलनी थी जो कि अब दूर हो गयी. चुनाव को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री महोदय ने यह कानून वापस लेने की घोषणा की है.

    किसानों को आंदोलन का फल मिला- रविकांत तुपकर

    स्वाभिमानी किसान संगठन के नेता रविकांत तुपकर ने कहा कि तीन कृषि कानून वापस लेने की घोषणा की गयी यह किसान आंदोलन को मिला यश है. किसानों ने केंद्र सरकार का पूरा घमंड निकाल दिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तुरंत अध्यादेश निकालना चाहिए कि यह कानून वापस लिए गए हैं.