दो सभापतियों के चुनाव को चुनौती, जि.प. सदस्या नीमा गवई ने विभागीय

    • आयुक्त की ओर दाखिल की याचिका
    • आरोप है कि 29 अक्टूबर की विशेष सभा अवैध थी

    अकोला. जिला परिषद सभापति के दो रिक्त पदों के लिए 29 अक्टूबर को मतदान हुआ था. लेकिन जिला परिषद की निर्दलीय सदस्या नीता गवई ने 2 नवंबर को अमरावती विभागीय आयुक्त के पास एक याचिका दायर कर विषय समिति सभापति और महिला एवं बाल कल्याण समिति सभापति के चुनाव को चुनौती दी है.

    याचिका पर 16 नवंबर की दोपहर 3 बजे विभागीय आयुक्त कार्यालय में सुनवाई होगी. इस सुनवाई में उपस्थिति की सूचना जिलाधिकारी, अध्यासी चुनाव अधिकारी, जि.प. के उप मुख्य कार्यकारी अधिकारी, महिला एवं बाल कल्याण समिति की सभापति स्फूर्ति गावंडे और विषय समिति के सभापति सम्राट डोंगरदिवे को दी गयी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार, ओबीसी के राजनीतिक आरक्षण को रद्द करने के कारण अकोला जिला परिषद के 14 जिला परिषद सदस्यों को अयोग्य घोषित कर दिया गया था.

    जिसमें महिला व बाल कल्याण समिति सभापति और विषय समिति सभापतियों का समावेश था. जिलाधिकारी ने 20 अक्टूबर को नोटिस जारी कर कहा कि उपचुनाव के बाद दो सभापतियों के चुनाव को लेकर 29 अक्टूबर को विशेष बैठक की जाएगी. यह नोटिस 21 को आवक, जावक विभाग में भेजी गयी थी. लेकिन यह नोटिस बारेगांव मंजू सर्कल की निर्दलीय सदस्य नीता गवई को 26 अक्टूबर को मिली.

    हालांकि, महाराष्ट्र जि.प. और पं.स. अधिनियम, 1961 की धारा 111 (4) के तहत जि.प. की विशेष बैठक की सूचना दस दिन पहले प्राप्त करना अनिवार्य है. जिससे गवई ने सभापतियों चुनाव के लिए ली जानेवाले सभा गैर कानूनी होने का आरोप करते हुए चुनाव रद्द करने की मांग की याचिका विभागीय आयुक्त की ओर दाखिल की है. याचिकाकर्ता की ओर से एड.संतोष रहाटे और एड.विनित सिरसाट पक्ष रखेंगे. 

    विशेष बैठक की सूचना 10 दिन पूर्व दी जानी चाहिए. लेकिन जिलाधिकारी ने 22 से 26 अक्टूबर के बीच कुछ जिला परिषद सदस्यों को नोटिस जारी किया. महाराष्ट्र जि.प., पं.स. अधिनियम, 1961 की धारा 111(4) के उल्लंघन के परिणामस्वरूप इस विशेष सभा को अवैध घोषित कर इसे रद्द कर दिया जाना चाहिए, यह मांग विभागीय आयुक्त की ओर की गयी है.-नीता गवई