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    अकोला. गणेश कुमार गुरबानी के इलाज में अक्षम्य देरी और लापरवाही करते हुए यहां के आइकॉन हॉस्पिटल ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और भारतीय संक्रामक रोग नियंत्रण अधिनियम 1897 का उल्लंघन किया है. इस मामले में आईपीसी की धारा 188 के तहत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई जाए, यह आदेश जिलाधिकारी नीमा अरोरा ने जिला शल्य चिकित्सक को दिए हैं.

    वहीं, आवेदक के गुरबानी परिवार को मामले का निपटारा होने तक आइकॉन अस्पताल को बकाया राशि का भुगतान न करें, ऐसा आदेश में कहा गया है. इस बीच, गुरबानी परिवार, जो आदेश से संतुष्ट नहीं था, ने इस संबंध में उच्च न्यायालय में एक याचिका दायर करने का फैसला किया है. यह जानकारी गुरबानी परिवार ने एक पत्रकार परिषद के दौरान दी. 

    अस्पताल की ओर से लापरवाही

    शहर के गौरक्षान रोड स्थित बालाजी नगर क्षेत्र निवासी गणेश कुमार गुरबानी (43) को कोरोना प्रकोप के इलाज के लिए 3 मई 2021 को आइकॉन अस्पताल में भर्ती कराया गया था. लेकिन 18 मई 2021 को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई. इस बीच, गुरबानी परिवार ने आरोप लगाया है कि अस्पताल में ऑक्सीजन की कमी के कारण मरीज की मौत हो गई.

    इस संबंध में गणेश कुमार गुरबानी के पुत्र लोकेश ने 20 मई 2021 को जिलाधिकारी के पास शिकायत दर्ज करायी थी और आइकॉन अस्पताल के प्रबंधन के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की थी. इसी के तहत जिलाधिकारी ने 20 मई को जिला शल्य चिकित्सक की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन कर सात दिन में रिपोर्ट देने को कहा था. हालांकि जांच समिति ने 45 दिन देरी से 7 जुलाई 2021 को अपनी गोपनीय रिपोर्ट तैयार कर 13 जुलाई 2021 को जिलाधिकारी कार्यालय में जमा कर दी.

    रिपोर्ट में आइकॉन अस्पताल को क्लीन चिट दे दी गई और गुरबानी परिवार ने इस पर आपत्ति जताते हुए रिपोर्ट को खारिज कर दिया. उन्होंने अस्पताल के खराब प्रबंधन के पुख्ता सबूतों के साथ 2 अगस्त 2021 को जिलाधिकारी कार्यालय में अपनी आपत्ति प्रस्तुत की. उन्होंने जांच समिति के काम पर सवाल उठाते हुए आइकॉन अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. तदनुसार, जिलाधिकारी कार्यालय द्वारा किए गए एक सावधानीपूर्वक सर्वेक्षण में जांच रिपोर्ट में कई आपत्ति जनक खुलासे हुए.

    जिससे जिलाधिकारी नीमा अरोरा ने गणेश कुमार गुरबानी के उपचार में अक्षम्य लापरवाही पाए जाने से स्थानीय आयकॉन हॉस्पिटल ने आपदा प्रबंधन अधिनियम 2005 और भारतीय संक्रामक रोग नियंत्रण अधिनियम 1897 का उल्लंघन पाए जाने पर इस प्रकरण में भादंसं की धारा 188 के तहत पुलिस में शिकायत दाखिल करने के आदेश जिला शल्य चिकित्सक को 4 सितंबर 2021 को दिए हैं. इसी तरह मरीज के उपचार के लिए की गयी डेढ़ लाख रू. की शेष रकम, प्रकरण का नतीजा आने तक अस्पताल प्रशासन को न दिए जाए यह भी आदेश में कहा गया है. 

    जांच समिति में अस्पताल के भागधारक का समावेश

    जिलाधिकारी नीमा अरोरा द्वारा दिया गया आदेश संतोषजनक था, लेकिन हम इससे पूरी तरह संतुष्ट नहीं थे. जांच रिपोर्ट में जान बूझकर देरी करनेवाली जांच समिति में उक्त अस्पताल में भागधारक डा.प्रवीण सपकाल का समावेश रहने से समिति ने अस्पताल की ओर से रिपोर्ट देने का आरोप करते हुए लोकेश गुरबानी ने इस प्रकरण में उच्च न्यायालय में न्याय की मांग करने की बात कही. पत्र परिषद में गुरबानी परिवार के अन्य सदस्य भी उपस्थित थे.