5 वर्ष से ज्वार, मक्का, सूर्यफूल की बुआई की बंद – जंगली सुअरों का आतंक

अकोला. जिले में अकोला, अकोट, तेल्हारा तहसील के हजारों हेक्टेयर खेती पर किसान पहले गांवरान ज्वार, सूर्यफूल व मक्के की बुआई करते थे. लेकिन जंगली सुअरों की संख्या बढ़ने से किसानों ने पिछले 5 वर्ष से ज्वार, सूर्यफूल व मक्के की बुआई बंद की है. 6 से 7 वर्ष पहले ग्राम केलीवेली, गांधीग्राम, चोहोट्टाबाजार, कुटासा, आपातापा, आपोती, दहिहांडा, देवरी व परिसर के सैंकड़ों गांवों में किसान गांवरान ज्वार का विक्रमी उत्पादन ले रहे थे. ट्रक भरकर किसानों का माल बिक्री के लिए अकोला व अकोट के बाजार समितियों में जाता था. सैंकड़ो एकड़ पर पीला समुद्र दिखई दे इस तरह सूर्यफुल की फसल देखनेवालों का मन मोह ले लेती थी. लेकिन अब जंगली सुअरों के आतंक से किसानों ने इस ओर मुंह फेर लिया है. 

डेयरी पशुओं की संख्या कम

पहले गांवरान ज्वार की बुआई होने से कड़बी कुट्टी निकलती थी. किसान गाय, भेंस के लिए कड़बी कुट्टी तैयार कर रखते थे. ज्वार की बुआई कम होने से कड़बी-कुट्टी कम हो गई है, जिससे पशुओं ने दूध देना कम किया. धीरे धीरे डेयरी पशुओं की संख्या भी कम हो रही है. 

जंगली सुअरों का आतंक

जंगली सुअरों की वर्ष में 2 बार पैदावार होती है. एक की समय में 20 पिल्लों की पैदावार होने से जंगली सुअरों की संख्या बहुत अधिक बढ़ गई है. जंगली सुअरों ने इसके पूर्व फसल का नुकसान व अनेकों पर जानलेवा हमला करने से परिसर में आतंक मचाया है. किसान जान मुठ्ठी में लेकर खेती की रखवाली कर रहे है.