Farmer Suicides

Loading

अमरावती. प्रकृति की अनियमितता से फसलों का नुकसान, कृषि उपज की अनुत्पादकता, कर्ज का बोझ आदि विभिन्न कारणों के कारण पिछले 10 माह में जिले के 286 किसानों ने अपनी जीवन यात्रा समाप्त कर ली है. लेकिन सरकार ने केवल 155 आत्महत्या मामलों को सरकार की योजना के लिए ‘पात्र’ घोषित किया गया है. जबकि 55 प्रकरणों को ‘अपात्र’ करार दिया गया है. जिससे यह 55 पीड़ित परिवार सरकारी सहायता से वंचित रहेंगे. 76 प्रकरण जांच के चलते प्रलंबित है.

जनवरी से 15 नवंबर 2023 के बीच जिले में 286 किसानों ने आत्महत्या की. कुछ ने फांसी लगा ली, कुछ ने जहर पी लिया, कुछ ने कुओं और झीलों में कूदकर अपनी जीवन यात्रा समाप्त की. कृषि अनुत्पादकता, प्रकृति की अनियमितता, अपेक्षित उत्पादन नहीं आने की निश्चितता, आर्थिक संकट, बढ़ते बैंक ऋण आदि से किसान चिंतित हैं. इसके कारण, परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा कैसे करें आदि तरह की समस्याओं के भंवर में फंसा किसान आत्महत्या जैसा कदम उठा लेता है. आत्महत्या कोई समस्या का समाधान नहीं है, लेकिन निराश व परेशान किसान यह कदम उठा लेता है.

76 प्रकरण प्रलंबित

जिले में जनेवरी से सितंबर अंत तक सर्वाधिक 35 किसान आत्महत्याएं मोर्शी तहसील में हुई. उसके बाद चांदूर बाजार में 32, अंजनगांव 27, वरुड 23, अचलपूर 22, नांदगांव खंडेश्वर 19, दर्यापुर 19, चिखलदरा 14, धारणी 12, भातकुली 11, धामणगांव रेलवे 8, तिवसा 8, चांदूर रेलवे में 7 किसान आत्महत्या हुई. जिला प्रशासन अंतर्गत समिति ने जांच में जनवरी से 15 नवंबर तक केवल 155 प्रकरण ‘पात्र’ करार दिया है.  76 प्रकरण जांच के चलते प्रलंबित है. 

तहसीलवार आत्महत्याओं की स्थिति

तहसील कुल आत्महत्या पात्र अपात्र प्रलंबित
अमरावती 14           11 00 03
भातकुली 11      04 07 00
नांदगाव खंडेश्वर 19   12 02 05
चांदूर रेलवे 07 05 01 01
धामणगांव रेलवे 08 07 01 01
तिवसा 08 07 00 01
मोर्शी 35 25 08 02
वरुड 23 13 06 04
अचलपूर 22 09 07 03
चांदुर बाजार 32 20 09 03
दर्यापूर 19 11 07 01
अंजनगाव 27 20 07 01
धारणी  12 05 01 06
चिखलदरा 14  06 00 08

मानसिक तनाव में किसानों का समुपदेशन करेंगे

किसानों की आत्महत्या को रोकने के लिए प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे हैं और सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार स्थानीय स्तर पर भी प्रयास किये जा रहे हैं. नागरिकों या किसान परिवारों से अनुरोध है कि यदि किसान किसी कारण से मानसिक तनाव में है तो तुरंत कृषि, सहकारिता, तहसील या स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सूचित करें ताकि संबंधित किसान को समुपदेशन दिया जा सके. स्थानीय स्तर पर काउंसलर नियुक्त किये गये हैं, जो किसानों को तदनुसार मार्गदर्शन देंगे.

-विवेक घोडके, निवासी उपजिलाधिकारी, अमरावती.