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    चांदूर बाजार. शहर के विकास में नगराध्यक्ष की भूमिका अहम है, लेकिन नगराध्यक्ष को वित्तीय अधिकार का इस्तेमाल करने में सक्षम नहीं थे. जिसके चलते चांदूर बाजार के नगराध्यक्ष नितिन कोरडे ने मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर बेंच में एक याचिका दायर कर नगराध्यक्ष को वित्त अधिकार देने की मांग की थी.

    जिसका संज्ञान लेकर कोर्ट ने राज्य के नगर विकास विभाग के सचिव व अन्य प्रतिवादियों को नोटीस जारी कर 4 सप्ताह के भितर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए है. उसी प्रकार उच्च न्यायालय ने कोरडे को नियमानुसार वित्तीय अधिकार का इस्तेमाल करने संबंधी अंतरिम आदेश भी दिया है. 

    अन्य प्रतिवादियों से मांगा जवाब

    नगराध्यक्ष नितिन कोरडे ने शुरुआत में जिलाधीश को इस संबंध में निवेदन दिया था. लेकिन कलेक्टर ने संज्ञान नहीं लिए जाने से वे हाईकोर्ट पहुंचे. याचिका में अन्य प्रतिवादियों में अमरावती संभागीय आयुक्त, जिलाधीश और चांदूर बाजार नगर परिषद के मुख्याधिकारी हैं. महाराष्ट्र नगर परिषद नगर पंचायत और औद्योगिक वसाहत अधिनियम की धारा 58 (1-ए) के अनुसार, नगर परिषद के वित्तीय निर्णय के लिए नगराध्यक्ष की मंजूरी की आवश्यकता होती है. लेकिन चांदूर बाजार नगर पालिका के मुख्याधिकारी 14 अगस्त 2015 के शासन निर्णयानुसार कोराडे को वित्तीय शक्तियों का प्रयोग नहीं करने देते है, यह आरोप याचिका में किया गया.

    इस याचिका पर न्यायमूर्ति सुनील शुक्रे व अनिल किलोर के समक्ष सुनवाई हुई. जिसमें उच्च न्यायालय ने नगर विकास विभाग के सचिव व अन्य प्रतिवादियों को नोटिस भेजकर कोरडे को नियमानुसार वित्तीय अधिकार का इस्तेमाल करने देने का अंतरिम आदेश दिया. जिससे कोरडे को राहत मिली है. याचिकाकर्ता की ओर से एड. राहील मिर्जा कामकाज देख रहे है.

    राज्यभर के नगराध्यक्षों को मिलेगा न्याय

    राज्य सरकार ने नगराध्यक्षों के वित्त अधिकार छीन लिए थे. इसी आदेश से महाराष्ट्र के नगराध्यक्षकों न्याय मिला है. –  नितीन कोरडे, नगराध्यक्ष, चांदूर बाजार