hospital
Representational Pic

    • डफरिन में प्रसूताओं के हाल-बेहाल 

    अमरावती.  महिलाराज में जिला महिला सरकारी अस्पताल (डफरिन) का व्यवस्थापन चमरमरा जाने से प्रसूताओं असुविधाएं झेलने विवश होना पड़ रहा है. क्योंकि अस्पताल का व्यवस्थापन डाक्टर व स्टाफ के अभाव में चरमरा गया है. वर्तमान में प्रभारी और प्रशिक्षार्थियों के भरोसे पर अस्पताल चलाया जा रहा है.

    यहां प्रसूति उपचार के लिए आने वाली महिलाओं की स्वास्थ्य देखभाल व समय पर इलाज के लिए डॉक्टरों और नर्सों सहित मानव संसाधन की कमी हो रही है. जिसका असर डफरिन अस्पताल की स्वास्थ्य सेवा पर पड़ा है. पालकमंत्री, सांसद, स्थानीय विधायक व कलेक्टर तक महिला होने के बाद भी डफरिन का यह हाल होने पर अचरज व्यक्त किया जा रहा है.  

    चार्ज सौंपकर छुट्टी पर गई डीन

    जिला महिला अस्पताल के स्वास्थ्य अधीक्षक डा. संजय वारे के पदभार संभालने के बाद उनके स्थान पर प्रभारी डीन का कार्यभार डॉ. विद्या वाढोडकर को सौंपा गया. वाढोडकर के पास टीबी अस्पताल की जिम्मेदारी भी है. पिछले कई दिनों से प्रभारी डीन डॉ. वाढोडकर भी अपना कार्यभार एक महिला डाक्टर को सौंप कर छुट्टी पर चली गई है. जिससे अस्पताल के व्यवस्थापन में कठिनाइयां जा रही हैं.  

    स्वास्थ्य सेवा प्रभावित

     डफरिन अस्पताल में एक अधीक्षक पद है. वर्तमान में उस पद पर प्रभारी अधिकारी कार्यरत है. वर्ग 1 चिकित्सा अधिकारी के 4 पद हैं, उनमें से 3 रिक्त हैं. जबकि द्वितीय श्रेणी में मेडिकल ऑफिसर के 19 पद हैं. जिनमें से अधिकांश पदों पर ठेका पध्दति पर नियुक्त डाक्टर कार्यरत हैं. अधिसेविका का एक पद भरा गया है और प्रशासनिक कार्यालय में दो में से एक पद भी रिक्त है. जो एक पद भरा गया है. उस पद पर भी प्रभारी की ही नियुक्ति की गई है.

    वर्ग 3 में सहायक अधीक्षक का एक पद भरा गया है. छोटे बच्चों को स्वास्थ्य देखभाल प्रदान करने के लिए नर्सिंग स्टाफ के 14 पद और 2 नर्स हैं. स्टाफ नर्स के 60 पद भरे गए है. अन्य 38 नर्स, वार्डन व स्वीपर समेत कुल 57 पद हैं. लेकिन इनमें से भी 15 पद रिक्त ही है. नतीजतन मरीजों की संख्या के हिसाब से अस्पताल में कार्यरत मनुष्यबल बेहद कम है. जिसका असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है.

     

    प्रशिक्षनार्थियों को लगाया काम पर  

    डाक्टरों और नर्सों का प्रशिक्षित लेने वाले कुछ प्रशिक्षनार्थी जिला महिला अस्पताल में प्रैक्टिस करते हैं. प्रशिक्षण पर रहने वाले यह भविष्य के डाक्टर विशेषज्ञ डॉक्टरों के मार्गदर्शन में महिला रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करते हैं. लेकिन डफरिन अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर प्रभारी ही हैं. जिससे प्रशिक्षनार्थियों को समय पर वरिष्ठों से मार्गदर्शन मिलता है या नहीं. इस पर भी संदेह व्यक्त किया जा रहा है. 

     

    काम से बढ़कर काम का तनाव 

    अस्पताल में ज्यादातर अधिकारी प्रभारी और मनुष्यबल की कमी के कारण उपस्थित डॉक्टरों, नर्सों और अन्य कर्मचारियों पर काम का तनाव बढ़ गया है. इससे महिला मरीजों को काफी परेशानी हो रही है. प्रसूति उपचार के लिए आने वाली महिलाओं को तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है. लेकिन मैनपावर की कमी के कारण डॉक्टर और नर्स मरीजों को समय पर सेवा नहीं दे पा रहे हैं. नतीजतन मरीजों का गुस्सा बढ़ रहा है, जिससे स्वास्थ्य सेवा प्रभावित हो रही है.

     

    मैनपावर की कमी से बढ़ा तनाव

    जिला महिला अस्पताल में मैनपावर की कमी है. मेरे पास भी डफरिन अस्पताल के डीन का अतिरिक्त चार्ज है. डॉक्टरों और नर्सों की कमी के कारण काम का तनाव बढ़ गया है. ठेका पध्दति के आधार पर डॉक्टरों की भर्ती की गई है. सरकार स्तर पर रिक्त पदों को भरने के लिए पत्राचार शुरू है. 

    -डा. विद्या वाढोडकर, अधीक्षक डफरिन