उपकुलपति बनाम सीनेट सदस्य, ऑनलाइन सीनेट सभा को लेकर ठनी

अमरावती. संत गाडगे बाबा अमरावती विश्वविद्यालय के उपकुलपति डा. मुरलीधर चांदेकर व सीनेट सदस्य आमने सामने आ गए है. ऑनलाइन सीनेट सभा लेने के साथ अनेक प्रश्न नकारे जाने से सभी संगठनों के सीनेट सदस्यों ने शुक्रवार को पत्र वार्ता में उपकुलपति के खिलाफ जमकर आग उगली. परेशानी में डालनेवाले सवाल उपकुलपति द्वारा जानबुझकर टाले जाने से सीनेट सदस्यों में आक्रोश है. प्रेस कॉन्फ्रेंस में सदस्यों ने यह भी कहा कि वे ऑनलाइन सभा ही नहीं बल्कि उपकुलपति की कार्य पद्धति के भी खिलाफ है.

पत्र वार्ता में डा. प्रवीण रघुवंशी, प्रदीप देशपांडे, डा. निलेश गावंडे, डा. विवेक देशमुख, उत्पल टोंगो, डा.नितीन खर्चे, सुनील मानकर आदि समेत अन्य सदस्यों ने आरोप लगाया. जबकि इन आरोपों पर उपकुलपति डॉ. मुरलीधर चांदेकर का कहना है कि कोई सवाल परेशानी में डालनेवाले नहीं है. सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है. कुछ सवाल ‘कॉमन स्टैट्युट’ अनुसार खारिज गए है. अनुमति मिली तो ऑफलाइन सभा लेने की तैयारी भी उन्होंने दर्शायी है. 

परेशानी भरें सवाल टाले

यूनिवर्सिटी की सीनेट की बैठक मंगलवार, 29 दिसंबर को ऑनलाइन जूम ऐप की मदद से होगी. इससे पहले 28 अक्टूबर को प्रशासन ने सीनेट की बैठक ऑनलाइन बुलाई थी. सदस्यों के विरोध के बाद बैठक को रद्द कर दिया गया. लेकिन 29 दिसंबर को बैठक बुलाने वाला एक पत्र 18 नवंबर को सदस्यों को हुआ. इसमें ऑनलाइन या ऑफलाइन का जिक्र नहीं था, लेकिन 19 दिसंबर को सदस्यों को एक नया पत्र भेजा गया जिसमें सीनेट सभा ऑनलाइन होने की बात कही गई.  केवल 10 दिनों के अवधि में ऑनलाइन सभा की सुचना दिए जाने सदस्यों में असंतोष है. 

सदस्यों ने इस मुद्दे पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी से भी गुहार लगाई. राज्यपाल ने संबंधित जिलाधीश  से संपर्क कर बैठक आयोजित करने के बारे में निर्णय लेने के निर्देश दिए. विश्वविद्यालय द्वारा पत्र दिए जाने के बाद जिलाधीश ने जीआर जोडकर जवाब दिया. धारा 144 लागू होने के कारण उपकुलपति ने ऑनलाइन बैठक लेने की बात पत्र में कही है.

लेकिन सदस्यों का कहना है कि विश्वविद्यालय सीनेट हॉल सार्वजनिक स्थान नहीं है और वहां लागू नहीं होता है. इसके अलावा, यदि धारा 144 लागू है भी तो और प्रतिदिन 800 से 1000 छात्र विश्वविद्यालय आ रहे हैं, तो क्या धारा 144 का उल्लंघन नहीं हो रहा है? यह सवाल सदस्यों ने उठाया था. इसके अलावा विवि की परीक्षाएं, उपकुलसचिव का यात्रा घोटाला, जमीन प्रकरण, पूर्व उपकुलपति काल की खरेदी आदि परेशानी भरे सवाल टालने के लिए ऑनलाइन सभा लेने का आरोप सदस्यों ने लगाया है. 

मनपा, जेडी की सभा, फिर सीनेट की क्यों नहीं

लोकसभा, राज्यसभा, विधानसभा, परिषद, महानगरपालिका व अन्य निकाय संस्थाओं का कार्यनियमन परंपरागत पद्धति से फिजीकल डिस्टेंसिंग के साथ हो सकता है, तो 65 से 70 सदस्यवाली सीनेट की सभा क्यों नहीं हो सकती, यह सवाल भी सदस्यों ने पुछा है. 

गड़बड़ी सामने आने के डर से टाले प्रश्न

विश्वविद्यालय अधिनियम, 2016 के तहत उपकुलपति में निहित अधिकारों का दुरुपयोग कर विश्वविद्यालय का कामकाज, शैक्षणिक मानक, अनुसंधान, पाठ्यक्रम, परीक्षाओं के मुद्दों पर कई सदस्यों के सवालों को खारिज कर दिया है. इस पहले की बैठक में भी कई सदस्यों के प्रश्न बार-बार खारिज किए गए है. उनके कार्यकाल की गड़बड़ियों सामने आने के डर से इस प्रकार की स्टैंड लेने का आरोप पत्र वार्ता में लगाया गया है.  सदस्यों का आरोप है कि कुलपति ने सवालों को खारिज करते समय पिछले नीतिगत निर्णय के आधार पर प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत से अवगत कराने की परंपरा को तोड़ा है.

उपकुलपति को नियमों का बंधन हैं- डा. चांडेकर

सदस्यों द्वारा पूछे गए कोई भी प्रश्न उपकुलपति को परेशानी में डालनेवाले नहीं है. विश्वविद्यालय का पहले का स्टैट्युट बदल गया है कॉमन स्टैट्युट लागू है. उपकुलपति को भी स्टैट्युट के बाहर निर्णय लेने कर अधिकार नही. स्टैट्युट के अनुसार सभी के सहमति से कुछ सवालों को खारिज कर दिया गया है. परीक्षा का विषय न्यायप्रविष्ठ है. जिससे बैठक में चर्चा करना संयुक्तिक नही. सभी सवालों के तार्किक जवाब देने के लिए तैयार है.

प्रश्नों की अस्वीकृति से सदस्यों की तरह हमें भी खेद है. लेकिन उपकुलपति को भी कानून का बंधन है. 28 अक्टूबर को बैठक आयोजित करने के लिए राज्यपाल से अनुमति मांगी गई थी, उस समय खारिज कर दिया गया था. 29 दिसंबर को बैठक के संबंध में राज्यपाल से एक पत्र प्राप्त हुआ है और जिलाधीश के निर्देश के अनुसार बैठक आयोजित करने के आदेश दिए गए है. जिले में लागू धारा 144 अनुसार, बैठक ऑनलाइन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है.- डा. मुरलीधर चांदेकर, उपकुलपति