2 borewells in 1 campus, bypassing rules
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    धामनगांव रेलवे. दिन ब दीन बढती धुप से जलास्रोंतो का लेवल घटता जा रहा है. तहसील के बगाजी सागर डैम में केवल 40 प्रतिशत जलभंडार शेष है. यदि पानी का इस्तेमाल संभालकर नहीं किया गया तो 44 गांवों को भीषण जलसंकट से जुझना पडेगा.

    283.87 दलघमी क्षमता

    लोअर वर्धा प्रकल्प के तहत अमरावती तथा वर्धा, इन 2 जिलो की सीमा पर बगाजी सागर डैम है. धामनगांव शहर के साथ ही जुना धामनगांव, पुलगांव, देवली तहसील के 44 गावों को इसी डैम से जलापूर्ति की जाती है. डैम में जलसंग्रह क्षमता 283.87 दशलक्ष घनमीटर है. गत वर्ष यह डैम 94 प्रतिशत भरा था. लेकिन अब सिंचाई हेतू पानी छोडा गया है.

    पानी की मांग बढी

    विगत 15 दिनों से सूर्यनारायण ने अपना प्रताप बताते हुऐ तापमान 44 डिग्री सेल्सीयस तक पहुंचा दिया है. जिसकी वजह से ‘जल ही जिवन है’ की अनुभूति हो रही है. परिणामस्वरूप जलाशय का स्तर घटता जा रहा है. अब तक करीबन 50.15 टीएमसी जलाशय इस्तेमाल हो गया है और 40 प्रतिशत जलाशय का महत्व नहीं समझा गया तो *पानी के लिए त्राहिमाम त्राहिमाम मचने की संभावना है.

    पानी का दुरुपयोग टाले

    बढते तापमान में बाष्पीभवन के चलते पानी भांप बनकर ऊड रहा है. जिससे जलाशयों का जलस्तर निरंतर घट रहा है. यह नैसर्गिक प्रक्रिया है, लेकिन मानव निर्मित पानी का दुरुपयोग जैसे नलों को टोटी न होना, सडको पर बेवजह पानी फेंकना, साफसफाई हेतु निश्चीत पानी ऊपयोग ना करते हुए बेतहाशा पानी बहाना, वाहनों को बेवजह नियमीत धोना आदि कारणों के साथ ही जलशुध्दि केंद्रो पर होनेवाली तकनीकी खराबी से असमय जलापूर्ति करने की वजह से नल आने की सूचना नहीं मीलने से बेकार बहनेवाला पानी भी इसका प्रमुख कारण है. साथ ही परिवार की जरुरत मुताबिक जलसंग्रह होने पर भी नल की टोंटियों को बंद नही कीया जाना. इन बातों पर ध्यान देकर जलसंग्रह के महत्व को समझने से जलसंकट की तीव्रता को निश्चीत ही कम किया जा सकता है. – पवन पंधरे, उपविभागीय अभियंता, लोअर वर्धा