Assembly election Maharashtra

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नवभारत न्यूज नेटवर्क
मुंबई:
राज्य में लोकसभा चुनाव को लेकर जहां कई सीटों पर असंतोष नजर आ रहा है, वहीं कुछ जगहों पर सीधे बगावत भी देखने को मिल रही है। हालांकि कुछ सीटों पर नेताओं ने अगला विधानसभा चुनाव देखते हुए शांत रहने का फैसला भी कर लिया है। इस लोकसभा चुनाव में बागी उम्मीदवारों के लिए 6 माह बाद होने वाले विधानसभा चुनाव की राह भी मुश्किल मानी जा रही है। चर्चा है कि उत्तम जानकर, हर्षवर्धन पाटिल, विजय शिवतारे, किरण सामंत जैसे इच्छुक उम्मीदवारों को टिकट न मिलने पर उन्होंने इस समय शांत रहना पसंद किया, जबकि वसंत मोरे, चंद्रहार पाटिल सहित कुछ नेताओं ने बगावती सुर अपनाए रखा है। 

विधानसभा पर नजर  
राज्य में महायुति और महाविकास अघाड़ी की मुख्यतः तीन-तीन पार्टियाँ हैं, इसलिए दोनों पक्षों में टिकट वितरण में समस्या अब भी बनी हुई है। सभी दलों के नेताओं में असंतोष दिखाई पड़ी। इसकी पहली चिंगारी बारामती संसदीय क्षेत्र में भड़की। विजय शिवतारे अजित पवार के खिलाफ खड़े हो गए, लेकिन वरिष्ठ नेताओं के समझाने पर शिवतारे शांत हो गए। इसके इनाम के तौर पर शिवतारे को विधानसभा के लिए पुरंदर सीट से टिकट का आश्वासन मिला है। इंदापुर में यही स्थिति है। बीजेपी नेता हर्षवर्धन पाटिल और अजित पवार के बीच छत्तीस का आंकड़ा जगजाहिर है। चूंकि हर्षवर्धन अब अजित पवार के लिए काम कर रहे हैं तो इसका फायदा उन्हें विधानसभा में होगा। उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने एक सार्वजनिक सभा में ऐसा संकेत भी दिया। माना जा रहा है कि पवार समर्थक विधायक अप्पा भरणे का टिकट कट जायेगा। 

माढ़ा में नाटकीय घटनाक्रम
माढ़ा निर्वाचन क्षेत्र में नाटकीय घटनाक्रम हुआ, जो राज्य में काफी चर्चित रहा है। उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा विशेष विमान से नागपुर बुलाए गये उत्तम जानकर ने भाजपा छोड़ दी और शरद पवार के साथ जाने का फैसला किया। माना जा रहा है कि जानकर मालशिरस निर्वाचन क्षेत्र में महाविकास अघाड़ी के उम्मीदवार होंगे। मंत्री उदय सामंत के भाई किरण सामंत रत्नागिरी-सिधुदुर्ग सीट को लेकर उत्सुक थे, लेकिन नारायण राणे के कारण उन्हें पीछे हटना पड़ा। अब चर्चा है कि उन्हें राज्यसभा भेजा जाएगा। वैसे पुणे से एमएनएस को राम राम कह वसंत मोरे ने भी बगावत की है। सांगली सीट पर भी कांग्रेस में बगावत का असर अगले विधानसभा चुनाव पर हो सकता है।