Aurangabad Municipal Corporation

    औरंगाबाद. जातिसूचक नाम के चलते दो समाज में तनाव निर्माण होकर जातिय संघर्ष निर्माण होने की बढ़ती निरंतर घटनाओं पर रोक लगाने के लिए राज्य सरकार (State Government) ने हाल ही में पारंपरिक पध्दति से गांव सहित शहरों, बस्तियां, चौक, कॉलोनियों, सड़कों का नाम बदलने का निर्णय लिया है। सरकार के इस निर्णय के बाद औरंगाबाद महानगरपालिका (Aurangabad Municipal Corporation) ने शहर के जातिसूचक कालोनियों (Colonies) के नाम बदलने पर काम शुरु किया है। 

    महानगरपालिका की उपायुक्त अपर्णा थेटे ने बताया कि सरकार के आदेश के बाद महानगरपालिका के वार्ड अधिकारियों को जातिसूचक बस्तियां और सड़कों के नाम ढूंढने की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी। बीते कुछ दिनों से वार्ड अधिकारियों ने अपने अपने वार्डों में जातिसूचक कालोनियों की सूची प्रशासन के पास सौंपी है। इस सूची में करीब 50 जातिसूचक नाम प्रशासन को मिले है। 

    लोगों से नए नाम मांगे गए

    उसके बाद प्रशासन ने जातिसूचक कालोनियों के नाम बदलने के लिए परिसर के नागरिकों से नए नाम मंगाए है। नागरिकों से नाम मिलते ही वह नाम अखबारों में प्रगटन द्वारा प्रकाशित किए जाएंगे।उसके बाद जातिसूचक कालोनियों  के नाम बदले जाएंगे। 

    इन परिसरों के बदले जाएंगे नाम 

    मनपा उपायुक्त अपर्णा थेटे ने बताया कि शहर के 1 से 9 प्रभागों में जातिसूचक कालोनियों में ब्राम्हण गल्ली, बेगमपुरा, लोटाकारंजा, मालिवाडा, काचीवाडा, तेलंगवाडा, बोहरी कठडा, जोहरीवाडा, कुंभारवाडा, पारधीपुरा, भोईवाडा, कैकाडीवाडा, भिल्ल गल्ली, डिंबर गल्ली, भंगीवाडा, मांगवाडा, चांभारवाडा, मोमीनपुरा, ध्दवाडा, सोनार गल्ली, पटेल नगर, शहानगर, कुरैशी गल्ली, माली गल्ली, वैदुवाडा, मुल्ला गल्ली, तेली गल्ली, सुतारवाडा, धनगरवाडा, कोलीवाडा, गोंधळवाडा इस तरह के करीब 50  जातिसूचक नाम पर कालोनियां अथवा गलियां है। इनका नाम बदलने का काम  प्रशासन द्वारा जल्द किया जाएगा।