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    औरंगाबाद : घर में श्वान (Dog) पालने के लिए महानगरपालिका (Municipal Corporation) की ओर से लाइसेंस (Licence) लेना अनिवार्य है। इसकी जानकारी बहुत श्वान प्रेमियों को थी। हाल ही में  महानगरपालिका प्रशासन (Municipal Administration) ने जिसके पास श्वान है, उसके मालिक (Owner) को लाइसेंस (License) लेना अनिवार्य किया है। जो श्वान पालनेवाला मालिक महानगरपालिका से लाइसेंस नहीं लेगा, उसका श्वान जब्त करने की चेतावनी महानगरपालिका प्रशासन की ओर से दी गई थी। महानगरपालिका प्रशासन के चेतावनी के बाद शहर के 510 श्वान प्रेमियों ने महानगरपालिका की ओर से नए लाइसेंस लिए। वहीं, 74 लोगों ने अपने लाइसेंस रिनिवल किया।

    महानगरपालिका के उपायुक्त सौरभ जोशी ने बताया कि जिस श्वान मालिक के पास श्वान पालने का लाइसेंस नहीं रहेगा, उसका श्वान जब्त करने की कार्यवाही प्रशासन की ओर से शुरु की जाएगी। उन्होंने बताया कि शहर में 20 हजार सेे अधिक नागरिकों के पास श्वान पाले हुए है। श्वान को रेबिज का इंजेक्शन देना अनिवार्य है। इसके बावजूद बिना रेबिज का इंजेक्शन दिए श्वान को पालते है। जोशी ने साफ किया कि प्रशासन ने नए साल के प्रथम दिन से शहर के जिस नागरिक के पास पालतु जानवर, श्वान है, उस ओर लक्ष्य केंद्रित किया है। 1 जनवरी से हर पाले हुए श्वान का लाइसेंस रहना जरुरी है। जिसके पास लाइसेंस नहीं रहेगा, उसका श्वान जब्त  कर उसे महानगरपालिका के कोंडवाडा में बंद किया जाएगा।  

    गत वर्ष लाइसेंस लेने में नहीं दिखाई श्वान प्रेमियों ने अधिक दिलचस्पी 

    जोशी ने बताया कि गत वर्ष श्वान और पालतु जानवर पालने वाले नागरिकों ने महानगरपालिका से लाइसेंस लेने में अधिक दिलचस्पी नहीं दिखाई थी। नगर निगम  कमिश्नर आस्तिक कुमार पांडेय के सूचना पर जल्द ही बिना लाइसेंस वाले श्वानों को जब्त करने की मुहिम हाथ में ली जाएगी। महानगरपालिका के पशुसंवर्धन अधिकारी डॉ. शेख शाहेद ने  बताया कि 31 दिसंबर 2021 तक महानगरपालिका को जानवर पालने को लेकर दिए जानेवाले लाइसेंस से 3 लाख 61 हजार रुपए का राजस्व मिला। इससे पूर्व इतनी बड़ी राशि श्वान और पालतु जानवर पालने के लिए दिए जानेवाले लाइसेंस नहीं मिली थी। अंत में डॉ. शेख शाहिद ने बीते 6 साल में श्वान के लाइसेंस से मिले राजस्व की जानकारी देते हुए बताया कि साल 2014-15 में नए लाइसेंस 97- रिनिवल 49, राजस्व 65 हजार 550 रुपए वसूला गया था। साल 2015-16 में नए लाइसेंस 119 – रिनिवल 56, राजस्व 76 हजार 550 रुपए। साल 2016 -17 में नए लाइसेंस 152 – रिनिवल 67, राजस्व-92 हजार 200 रुपए। साल 2017-18 में नए लाइसेंस 53 – रिनिवल 56, राजस्व वसूली 42 हजार 650 रुपए। साल 2018-19 में नए लाइसेंस 59 – रिनिवल 61, राजस्व वसूली 51 हजार 50 रुपए, साल 2019-20 में नए लाइसेंस 109 – नुतनीकरण 52, राजस्व वसूली 77 हजार 750 रुपए। साल 2020-21 में नए लाइसेंस 83 – रिनिवल 83, राजस्व वसूली 82 हजार 650 रुपए।  साल 2021-22 में नए लाइसेंस 51-रिनिवल 74, राजस्व वसूली 3 लाख 61 हजार 250 रुपए।