Entrepreneurs and business organizations expressed concern over the increasing graph of organized

    औरंगाबाद. शहर (City) के रेलवे स्टेशन (Railway Station) एमआईडीसी (MIDC) में स्थित भोगले ऑटोमोटिव कंपनी (Bhogle Automotive Company) में कार्यरत एक कामगार द्वारा हैंड वाश लिक्विड पीने के बाद गुस्साएं कुछ युवकों ने कंपनी में प्रवेश कर कंपनी के संचालक और अन्य अधिकारियों पर किए हमले का औद्योगिक और व्यापारी संगठनाओं ने तीव्र निषेध किया। सभी संगठनाओं ने जिले भर में जारी ऐसी संगठित अपराधों पर सख्त कदम उठाने पर बल देकर इन घटनाओंं पर गहरी चिंता जतायी।

    औद्योगिक संगठनाओं की ओर से शहर के उद्योजक राम भोगले ने आयोजित एक प्रेस वार्ता में  बताया कि भोगले ऑटोमोटिव कंपनी में सचिन गायकवाड़ नामक एक कामगार कार्यरत है। बीते कुछ दिनों से वह कंपनी द्वारा  उत्पादन को लेकर तय किए गए मानदंडों को अनदेखी कर काम में  लापरवाही कर रहा था। कंपनी के मैनेजमेंट ने उससे कई बार कंपनी के मानदंडों के अनुसार काम करने के लिए उसे समझाया। इसके बावजूद उक्त कामगार द्वारा हर दिन उसे दिए हुए काम में सिर्फ 30 प्रतिशत ही काम कर रहा था। उसके इस हरकत से कंपनी का मैनेजमेंट परेशान था। इसी दरमियान उसे उत्पादन के काम से हटाकर उसे पूर्ण क्षमता से काम करने का लिखित आश्वासन देेने पर ही कंपनी में उसके द्वारा किए जानेवाला काम को दोबारा देने का निर्णय कंपनी मैनेजमेंट ने लिया था।

    संचालक से मिलने के बाद पिया हैंड वॉश लिक्वीड

    रविवार की सुबह सचिन गायकवाड़ कंपनी पहुंचा। वहां उसने कंपनी के संचालक नित्यानंद भोगले से मुलाकात की। तब उन्होंने उसे कंपनी के तय मानदंडों के अनुसार काम करने की  सलाह देते हुए लिखित स्पष्टीकरण मांगा। इससे गुस्साएं सचिन गायकवाड़ ने कंपनी में प्रवेश के भीतर हाथ धोने के लिए रखा हैंड वॉश लिक्वीड पी लिया। जिसके बाद उसकी मामूली तबियत बिगड़ी। इस घटना के बाद कंपनी के अधिकारियों ने उसे तत्काल बजाज अस्पताल में भर्ती कराया। जहां आज उसकी हालत सामान्य है।

    अज्ञात युवकों ने कंपनी में प्रवेश कर अधिकारियों को पीटा

    सचिन गायकवाड़ के हैंड वॉश लिक्विड पीने की घटना को लेकर उसके रिश्तेदारों को पता चलने पर कुछ युवक गुंडागर्दी करते हुए कंपनी में जबरन घुस गए, तब कंपनी के संचालक नित्यानंद भोगले ने उनसे चर्चा करने को तैयार हुए, पर जबरन कंपनी में घूसे उन लोगों ने बिना  कोई चर्चा किए कंपनी के संचालक और वहां कार्यरत अधिकारियों पर हमला कर उन्हें लहुलूहान कर दिया। विशेषकर, हमलावरों के सीसीटीवी के सामने सबको पिटने से उद्योजकों में दहशत का माहौल होने का दावा उद्योजक राम भोगले ने किया। इस घटना के बाद हमलावरों ने कंपनी के अधिकारियों पर झूठे क्रूरता का मामला दर्ज करने को लेकर दी शिकायत पर भी राम भोगले ने आश्चर्य जताकर कानून का गलत इस्तेमाल करने को लेकर  चिंता जतायी।

    संगठित अपराध से परेशान है उद्योजक

    एक सवाल के जवाब में उद्योजक राम भोगले ने बताया कि पिछले कुछ सालों से शहर सहित परिसर में स्थित उद्योजक संगठित अपराध से परेशान है। कई लोग उद्योजकों के अलावा पेट्रोल पंप, वाहन शोरुम, व्यापारियों को परेशान किए हुए है। कई युवक जाति और धर्म का सहारा लेकर हमें परेशान किए हुए है। जिसका उदाहरण देते हुए भोगले ने बताया कि पेट्रोल पंप से जबरन इंधन भरना, कंपनियों में आकर गुंडागर्दी करना, अलग-अलग ऑटोमोबाईल शोरुम में बिना पैसे भरे वाहन ले जाना, वर्कशॉप का बिल न देना धमकियां  देना, हमेशा विशेष कानून का डर दिखाकर धमकाना आदि प्रकार के निरंतर जारी है। इस पर रोक लगाने के लिए सभी से सहकार्य की अपील राम भोगले ने की।

    गुंडागर्दी से औरंगाबाद के विकास को लगेगा ब्रेक

    प्रेस वार्ता में उपस्थित सीएमआईए के अध्यक्ष शिवप्रसाद जाजू, सीआईआई के रमण अजगांवकर, मसिआ के उपाध्यक्ष अनिल पाटिल, औरंगाबाद फस्र्ट के प्रितेश  चटर्जी, पेट्रोल डिलर एसोसिएशन के अखिल अब्बास, व्यापारी महासंघ के सचिव लक्ष्मीनारायण राठी, मराठवाड़ा हॉस्पिटल एसोसिएशन के डॉ. हिमांशु गुप्ता, रवि माछर ने कहा कि शहर में इस तरह गुंडागर्दी जारी रही और संगठित अपराध को इस तरह बढ़ावा दिया गया तो शहर के विकास को ब्रेक लगेगा। जाजू ने कहा कि औद्योगिक संगठनाओं का प्रयास है कि औरंगाबाद में ज्यादा से ज्यादा देश सहित विदेश की नामचीन कंपनियां अपना उत्पादन शुरु करें। परंतु, ऐसी घटनाओं की चर्चा देश स्तर पर पहुंचने के बाद नामचीन उद्योजक यहां आकर अपना उद्योग शुरु करने से कतराते है। जिससे शहर के विकास को ब्रेक लगेगा। ऐसे में हम सबको मिलकर औद्योगिक क्षेत्र में जारी संगठित अपराध को रोक लगाने की जरुरत होने पर शिवप्रसाद जाजू ने जोर दिया। उन्होंने कहा कि उद्यमी बीते डेढ़ साल से कोरोना महामारी से परेशान है। उत्पादन में भारी गिरावट आयी है, इसके बावजूद औरंगाबाद के उद्योमियों ने किसी भी कामगार को बेरोजगार करने का प्रयास नहीं किया।