manoj jarange patil

Loading

छत्रपति संभाजीनगर. मराठा आरक्षण (Maratha Reservation) कार्यकर्ता मनोज जरांगे (Manoj Jarange) ने सोमवार को विद्वानों से आरक्षण मुद्दे पर एक मजबूत कानून के लिए सरकार को लिखित रूप में उनके सुझाव देने की अपील की है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा उनकी मांगें स्वीकार किए जाने के बाद 40 वर्षीय कार्यकर्ता ने शनिवार को आरक्षण के लिए अपना अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त कर दिया।

मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने घोषणा की कि जब तक मराठों को आरक्षण नहीं मिल जाता, तब तक उन्हें अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) द्वारा प्राप्त सभी लाभ दिए जाएंगे। जरांगे के साथ बातचीत के बाद सरकार द्वारा एक मसौदा अधिसूचना जारी की गई थी, जिसमें कहा गया था कि एक मराठा व्यक्ति के रक्त रिश्तेदार, जिनके पास यह दिखाने के लिए दस्तावेज हैं कि वह कृषक कुनबी समुदाय से हैं, उनको भी कुनबी के रूप में मान्यता दी जाएगी। कुनबी, एक कृषक समुदाय है जो ओबीसी श्रेणी में आता है।

पिछले अगस्त से मराठों के लिए आरक्षण के लिए आंदोलन का नेतृत्व कर रहे जरांगे सभी मराठों के लिए कुनबी प्रमाण पत्र की मांग कर रहे हैं। कार्यकर्ता ने शुक्रवार को अपने हजारों समर्थकों की उपस्थिति में मुंबई के उपनगरीय शहर नवी मुंबई के वाशी में अपना उपवास शुरू किया और बाद में सरकार द्वारा एक मसौदा अधिसूचना जारी करने के बाद इसे समाप्त कर दिया।

मसौदा अधिसूचना में उनकी प्रमुख मांगों में से एक को मान लिया गया था। सोमवार को रायगढ़ किले से जालना स्थित अपने गांव के लिए रवाना होते समय जरांगे ने कहा, ”मराठा आरक्षण के लिए एक कानून पर काम चल रहा है। लोगों से अगले 15 दिनों में इस पर अपने सुझाव देने के लिए कहा गया है। मराठा समुदाय के विद्वानों को इस पर अपने सुझाव सरकार को लिखित रूप से देने चाहिए।” उन्होंने कहा, “इससे मराठों के लिए कानून को मजबूत करने में मदद मिलेगी।” (एजेंसी)