Aurangabad Municipal Corporation

    औरंगाबाद : महानगरपालिका (Municipal Corporation) के प्रभाग रचना को लेकर भाजपा नेता और पूर्व नगरसेवक समीर राजूरकर द्वारा सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में दायर किए विशेष अनुमति याचिका पर गुरुवार (Thursday) को सुप्रीम कोर्ट के  मुख्य न्यायाधीश वी रमन्ना,  न्यायमूर्ति एएस बोपन्ना और न्यायमूर्ति हिमा कोहली के खंडपीठ के सामने विस्तृत सुनवाई हुई। सुनवाई के दरमियान नए से प्रभाग रचना किए जाने के चलते याचिका के लिए साध्य हो चुका है, इसलिए इस याचिका का निपटारा किया जाना चाहिए, क्यों कि याचिका का मकसद पूरा हो चुका है। यह दलील सुप्रीम कोर्ट में  राज्य चुनाव आयोग (State Election Commission) द्वारा दी गई।

    नए प्रभाग रचना होने के कारण याचिका का निपटारा करने में  याचिका कर्ता समीर राजूरकर ने सहमति जताई है। लेकिन, पूर्व के प्रभाग रचना की गोपनीय जानकारी बड़े पैमाने पर राजनीतिक दलों तक  पहुंचाई गई है। उसके आधार पर अवैध प्रभाग रचना की गई थी। यह बात  खुद राज्य चुनाव आयोग ने खंडपीठ के सामने पेश किए हलफनामें  मान्य की थी। औरंगाबाद महानगरपालिका कमिश्नर आस्तिक कुमार पांडेय ने इस मामले को गंभीरता से लेकर संबंधितों पर कार्यवाही के आदेश दिए थे। जिसके चलते इसके आगे गोपनियता का उल्लघंन नहीं  होगा। यह निर्देश राज्य चुनाव आयोग को दिए जाए। उसके अनुसार प्रभाग रचना करते समय कानूनी प्रक्रिया पर अमलीजामा पहनाते हुए विस्तृत सुनवाई का अवसर दिया जाए। उसके बाद ही वार्ड संरचना और आरक्षण अंतिम रुप दे। यह निर्देश राज्य चुनाव आयोग को देने की विनंती याचिका कर्ता समीर राजूरकर ने की।

    याचिका का निपटारा हो जाने से औरंगाबाद महानगरपालिका चुनाव का  रास्ता साफ हो चुका है। लेकिन, वार्ड संरचना करते समय  सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सख्ती से पालन राज्य चुनाव आयोग को करना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने  राज्य चुनाव आयोग को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि वार्ड गठन के संबंध में गोपनीय और संवेदनशील जानकारी अब राजनीतिक दलों तक प्रदान न की जाए। इससे पूर्व वार्ड संरचना  करते समय गोपनीय जानकारी राजनीतिक दलों तक पहुंचाई गई थी। जिससे कुल मिलाकर प्रभाग रचना पर विपरित परिणाम हुआ है। यह बात राज्य चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पेश किए हलफनामें में  मानी है। इस मामले में याचिका कर्ता समीर राजूरकर की ओर से वरिष्ठ विधि तज्ञ देवदत कामत, एड. डीपी पालोदकर, एड. शशिभूषण आडगांवकर ने पैरवी की। वहीं, राज्य चुनाव आयोग की ओर से एड.अजीत कडेठाणकर ने अपना पक्ष रखा।

    इच्छुकों के चेहरे खिले 

    पिछले दो साल से महानगरपालिका चुनाव लड़ने के आस लगाए हुए सभी दलों के इच्छुकों के चेहरे मुरझाए हुए थे। कोरोना के चलते करीब पौने दो साल से महानगरपालिका चुनाव लड़ने के इच्छुक बेचैन थे। गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में प्रलंबित पूर्व नगरसेवक समीर राजूरकर की याचिका सुलझने पर इच्छुकों में खुशी की लहर दौड़ी है। महानगरपालिका सूत्रों ने बताया कि राज्य चुनाव आयोग दो से तीन माह में महानगरपालिका चुनाव की प्रक्रिया पूरी कर सकता है।