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    भंडारा. महाराष्ट्र सार्वजनिक विद्यापीठ कानून में राज्य सरकार द्वारा किए गए बदलाव से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की संभावना है. इसलिए राज्य सरकार इन बदलावों पर पुनर्विचार करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की ओर से तहसीलदार के माध्यम से निवेदन भेजा गया.

    निवेदन में कहा गया है कि 15 दिसंबर को हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय की स्वायत्तता पर हमला करते हुए अपने राजनीतिक हितों के लिए महाराष्ट्र सार्वजनिक यूनिवर्सिटी कानून में संशोधन करने का निर्णय लिया गया. इस कैबिनेट बैठक में लिया गया निर्णय प्रस्तावित है. आने वाले सत्र में राज्य सरकार अपने इस निर्णय को कानून में बदलने का इरादा रखती है.

    सरकार के इस फैसले से राज्यपाल का वह अधिकार भी छीन लिया जाएगा. जिसके तहत राज्यपाल जो कि राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति हैं, वे सीधे कुलपति की नियुक्ति नहीं कर पाएंगे. राज्यपाल को राज्य सरकार द्वारा सुझाए गए दो नामों में से कुलपति का चयन करना होगा. इस तरह, राज्य सरकार कुलाधिपति के अधिकारों में पूरी तरह से दखल दे रही है.

    विश्वविद्यालय में प्रभारी कुलपति के रूप में नया पद सृजित किया जाएगा एवं उस पद पर उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री की नियुक्ति की जाएगी. कानून में बदलाव कर राज्य सरकार विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को नियंत्रित करने की कोशिश कर रही है. जिस तरह से निर्णय लिया जा रहा है. उससे राजनीतिक दलों एवं नेताओं के अनुचित हस्तक्षेप को बढ़ जाएगा.

    राज्यपाल यानी कुलाधिपति सभी विश्वविद्यालयों के प्रमुख होते हैं एवं यह उनके अधिकारों पर कुल हमला है. राजनीतिक दबाव के कारण सभी गुणवत्ताधारक प्रोफेसरों और छात्रों पर इस निर्णय का प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है. हर फैसले में राज्य सरकार का हस्तक्षेप रहने की संभावना बढ गयी है.

    इस निर्णय से विश्वविद्यालयों की गुणवत्ता में पूरी तरह से गिरावट आने का डर बढ़ेगा. यह निर्णय विश्वविद्यालय शिक्षा की गुणवत्ता का राजनीतिकरण करेगा. छात्रों के हित को देखते हुए इस निर्णय को तत्काल रद्द की मांग अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने की है. इस मांग के संबंध में निवेदन दिया गया.  इस अवसर पर भंडारा नगर मंत्री सार्थक कुंभलकर, आदित्य देवगड़े, विवेक मेश्राम, नचिकेत बांडेबुचे आदि उपस्थित थे.