Anganwadi Workers Protest Bhandara

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लाखांदूर. सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत महिला कर्मियों को सरकारी कर्मचारी के रूप में घोषित करने सहित अन्य मांगों को लेकर कामबंद आंदोलन शुरू किया गया है. उक्त आंदोलन के कारण ग्रामीण क्षेत्र के आंगनवाड़ी केंद्रों के विभिन्न लाभार्थी सरकार के विभिन्न योजनाओं से वंचित होने पर आक्रोश व्यक्त किया जा रहा है. हालांकि उक्त आंदोलन के कारण तहसील के लगभग सभी गावों के आंगनवाड़ी केंद्र निर्मनुष्य ठहरने की चर्चा से जा रही है. 

प्राप्त जानकारी के अनुसार सरकार के महिला एवं बाल विकास प्रकल्प के तहत लगभग सभी गावों में आंगनवाड़ी केंद्र शुरू किए गए है. उक्त केंद्रों के तहत 3 से 6 वर्ष आयु के बालकों सहित स्तनदा माता एवं गर्भवती माताओं को सरकार निर्देशानुसार नियमित सकस आहार उपलब्ध किया जाता है. हालांकि विभिन्न गावों के जनसंख्या के अनुसार शुरू इस केंद्रों के तहत लाभार्थी बालकों को शिक्षा में रुचि निर्माण होने के लिए विभिन्न उपक्रमों का भी आयोजन किया जाता है. किंतु पिछले कुछ वर्षों से उक्त केंद्रों में कार्यरत महिला कर्मियों को पर्याप्त मात्रा में मानधन नहीं दिए जाने के कारण उक्त कर्मियों ने सरकार के खिलाफ नाराजगी व्यक्त की है.

इस बीच महाराष्ट्र राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी कृति समिति के नेतृत्व में आंगनवाड़ी के महिला कर्मियों ने विभिन्न मांगों को लेकर विगत 4 दिसंबर से काम बंद आंदोलन शुरू किया है. उक्त मांगों में सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशानुसार आंगनवाड़ी कर्मियों को सरकारी कर्मी के रूप में घोषित कर वेतन श्रेणी, ग्रैच्युटी, भविष्य निर्वाह निधि, पेंशन लागू करे, प्रती बालक को उपलब्ध किए जा रहे सकस आहार के कीमतों में वृद्धि करे, फिलहाल स्थिति में आंगनवाड़ी कर्मियों को दी जा रहे मानधन में तत्काल वृद्धि करे सहित अन्य मांगों का समावेश है.

हालांकि ग्रामीण क्षेत्र में बालक, स्तनदा माता, गर्भवती माता आदि लाभार्थियों को नियमित सकस आहार सहित विभिन्न सरकारी योजना के लाभ में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले आंगनवाड़ी कर्मियों की उक्त मांगे पूर्ण होने के लिए सरकार एवं प्रशासन ने तुरंत पहल करने की मांग लाभार्थी एवं नागरिकों में की जा रही है.