एपीएमसी पवनी ने नहीं दी हमाली, हमालों ने जलसमाधि के लिए जिलाधिकारी से मांगी इजाजत

    • हमाल रजिस्टर्ड नहीं थे : एपीएमसी अध्यक्ष वैद्य की सफाई

    भंडारा. कृषि उपज बाजार समिति पवनी में कार्यरत 19 हमालों ने जिलाधिकारी संदीप कदम से भेंट की एवं निवेदन दिया. हमालों ने बताया कि एपीएमसी ने उन्हे हमाली के पैसे नहीं दिए. आर्थिक तंगी की वजह से भूखे मरने की नौबत आयी है. इसलिए 1 अक्टूबर को वैनगंगा नदी के भोजापुर घाट में जल समाधि के अलावा उनके सामने अन्य कोई चारा नहीं है.

    जिला प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने के बाद हमाल बंडू नारदेलवार ने अपनी पीडा को पत्रकार परिषद के जरिए साझा किया. बंडू हटवार ने बताया कि वह अन्य 18 हमालकर्मियों के साथ कृषि उपज बाजार समिति पवनी में कार्यरत है. 1 मार्च से 31 मई 2021 के दौरान इन हमालों ने 40000 क्विंटल धान की तुलाई की. एपीएमसी की ओर से प्रति क्विंटल 7 रु. की दर तय हुई थी. लेकिन काम पूरा होने के बाद एपीएमसी प्रशासन अपनी बात से मुकर गया.

    हमाल बंडू नारदेलवार का दावा है कि सरकार की ओर से तुलाई के लिए पैसा एपीएमसी के खाते में जमा हुआ है. लेकिन एपीएमसी पैसे नहीं दे रही है.

    हमाल बंडू नारदेलवार ने आरोप लगाया कि एपीएमसी सभापति यह कहकर पैसे देने से टालमटोल कर रहे है कि धान खरीदी में घाटा हुआ है. जिससे पैसे नहीं दे सकते.

    प्रति क्विंटल 7 रु. के हिसाब से हमालों को एपीएमसी पवनी से कुल 2 लाख 80 हजार रु. लेना है. इस बकाया राशि दिलाने की मांग को लेकर उन्होंने मुख्यमंत्री, नेता प्रतिपक्ष, सांसद, विधायक, जिलाधिकारी, डीएमओ एवं अन्य को निवेदन सौंपा है.

    6 महीने बीत जाने के बाद भी पैसे नहीं मिलने की वजह से परिवार को गुजर बसर मुश्किल है. ऐसे में परिवार पर भूखे मरने की नौबत आयी है. पैसे नहीं मिलने की स्थिति में 1 अक्टूबर को सुबह 10 बजे पवनी के नजदीक वैनगंगा नदी के भोजापुर घाट में परिवार के साथ जल समाधि लेने घोषणा हमालकर्मियों ने की है. हमालों ने इसके लिए जिलाधिकारी से इजाजत मांगी है.

    इस निवेदन पर बंडू नारदेलवार के अलावा, बंडू हटवार, विशाल पंचभाई, अश्विन पंचभाई, रूपचंद सुरपान, घनश्याम कुंभरे, केशव दोडेवार, जितेंद्र आत्राम, हीरालाल कंगाले, संजय कुंभारे, भास्कर बातुलवार, गणेश चन्ने, सिद्धार्थ खोब्रागडे, धम्मपाल खोब्रागडे, जितेंद्र खोब्रागडे, उत्तम सुरपान, रोशन वैद्य, देवचंद निंबेकर, राम बोलगुंडेवर आदि का समावेश है.

    रजिस्टर्ड हमाल को मिलती है मजदूरी  : लोमेश वैद्य

    एपीएमसी सभापति लोमेश वैद्य ने इस पूरे मामले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि उनके एपीएमसी में ऐसा कोई मामला नहीं हुआ है. उन्होने हमालों के कामकाज एवं भुगतान की प्रक्रिया को समझाते हुए कहा कि एपीएमसी अंतर्गत खरीदी केंद्रों में हमालों की जरूरत होती है. नियम एवं प्रक्रिया के अनुसार उन्हे रजिस्टर किया जाता है. एपीएमसी के अंतर्गत हुई खरीदी के लिए हमालों के समूह कार्यरत थे. इन सभी काम का हिसाब अब भी बाकी है. लोमेश वैद्य ने बताया कि हमाली के लिए सरकार से पैसे मिलते है. किसानों से पैसे नहीं लिए जाते है.

    रजिस्ट्रेशन जरूरी

    लोमेश वैद्य ने बताया कि जिन 19 हमालों ने अन्याय होने की बात कही है. वे रजिस्टर्ड नहीं थे. एपीएमसी ने उन्हे नियुक्त नहीं किया था. उन्होने कहा कि हमालों को चाहिए कि वे एपीएमसी में हमाली के लिए रजिस्ट्रेशन करें ताकि बाद में कोई परेशानी न हो.

    किसानों में जागृति करेंगे

    लोमेश वैद्य ने बताया कि वे किसानों के बीच में जागृती करनेवाले है कि ताकि खरीदी केंद्र पर किसी भी व्यक्ति को तुलाई के लिए पैसे न दें.