सफाई कर्मियों के बच्चों को छात्रवृत्ति का इंतजार, पिछले 3 साल से नहीं मिली छात्रवृत्ति

    लाखनी. सफाई कर्मियों के बच्चों को शैक्षिक धारा में शामिल किया जाना चाहिए, इसके लिए भारत सरकार जिला परिषद के समाज कल्याण विभाग के माध्यम से कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति के लिए प्रति वर्ष 1850 रुपये दे रही है, लेकिन सामने आया है कि पिछले 3 वर्ष से 3 हजार 309 लाभार्थियों के 73 लाख 25 हजार रुपये बकाया है.

    इससे सामाजिक न्याय विभाग पिछड़े वर्गों की शिक्षा के प्रति कितना जागरूक है यह दिखाई दे रहा है. मरे हुए जानवरों की खाल छीलना और बेचना, सीवर एवं गटर की सफाई करने वाले श्रमिकों को क्लीनर एवं स्वास्थ्य के लिए खतरा होनेवाले क्षेत्र में काम करनेवाले श्रमिक कहा जाता है.

    इनमें मुख्य रूप से चांभार, होली एवं भंगी शामिल हैं. अस्वच्छ व्यवसायों में काम करने वाले श्रमिकों को बुनियादी शिक्षा से वंचित नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उनकी वित्तीय स्थिति खराब है. या फिर किसी शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेंकर आवश्यक खर्चा चलाएं.

    इसके लिए केंद्र सरकार जिला परिषद के समाज कल्याण विभाग के माध्यम से कक्षा 1 से 10 तक के छात्रों को उनके राष्ट्रीयकृत बैंक खाते में या मुख्याध्यापक के माध्यम से चेक द्वारा 1850 रुपये की छात्रवृत्ति देती है. वित्तीय वर्ष 2018-19, 2019-20 एवं 2020-21 में लाभार्थियों की संख्या 3,309 थी. उन्हें 72 लाख 25 हजार 650 रुपये के फंड की जरूरत थी.

    लेकिन केंद्र सरकार की ओर से फंड नहीं मिलने के कारण पिछले 3 वर्ष से कोई स्कालरशिप नहीं दी गई है. निर्माण क्षेत्र को अरबों रुपये देने वाली सरकार के पास गरीब छात्रों की शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति के लिए धन की कमी है. हालांकि यह बात समझ से परे है. 

    इसके अलावा कक्षा 9 वी एवं 10 वी में पढ रहे अनुसूचित जनजाति के छात्रों को भारत सरकार की प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति आर्थिक वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक 8 हजार 41 लाभार्थि 1 करोड 80 लाख 92 हजार रुपये, कक्षा 8 वी से 10 वी के लडकियों को सावित्रीबाई फुले छात्रवृत्ति 2020-21 में 342 लाभार्थि, 3 लाख 42 हजार रुपये, साथ ही माध्यमिक स्कूल में पढ रहे अनुसूचित जनजाति के छात्रों को दी जानेवाली गुणवत्ता छात्रवृत्ती 2019 से 2021 लाभार्थी संख्या 117 राशी 76 हजार 800 रुपये एवं अनुसूचित जनजाति छात्रों का शिक्षा शुल्क एवं परीक्षा शुल्क आर्थिक वर्ष 2016-17 से 2020-21 तक 4 हजार 778 लाभार्थियों के 16 लाख 88 हजार रुपये बकाया होने के कारण पिछडा वर्गीय छात्रों की शिक्षा खतरे में आने की संभावना है.