हाईकोर्ट में हुई दो मामले में सुनवाई, मनरो में विरोधी जीते, पांडे महल में खरीददार हुए गदगद

    भंडारा. पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण भंडारा शहर की दो इमारतें पांडे महल एवं मनरो स्कूल का मामले को लेकर नागपुर हायकोर्ट में बुधवार को अलग अलग सुनवाई थी. पांडे महल के मामले में हाईकोर्ट में जनहित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि याचिकाकर्ताओं को कोई अधिकार नहीं है कि वह इस मामले में कुछ कहे.

     जबकि मनरो स्कूल प्रांगण में चल रहे निर्माण को अदालत ने स्टे दिया. उल्लेखनीय है कि पांडे महल को लेकर काफी पहले अदालत में याचिका दायर की गयी थी. जबकि मनरो मामले में बुधवार को ही जनहित याचिका दायर की गयी थी. यह महज संयोग ही था कि दोनों मामलों की सुनवाई एक ही दिन हुई.

    पांडे महल केस डीसमिस

    12 मई 2017 को आनन फानन में पांडे महल की बिक्रीनामा हुआ. पुरातात्विक दृष्टि से महत्वपूर्ण पांडे महल को अगली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित एवं संवर्धन करने की मंशा को लेकर शहर में जनआंदोलन हुआ था. बाद में इस मामले में जनहित याचिका दायर की गयी. संबंधित पक्षों को नोटिस जारी होने एवं बाद कोरोना की वजह से सुनवाई नहीं हुई थी. बुधवार को उच्च न्यायालय नागपुर में न्यायमूर्ति सुकरे एवं किलोर की अदालत में सुनवाई हुई. खरीदारों की ओर से प्रसिद्ध वकील एड. मनोहर उपस्थित हुए. अदालत ने याचिका को यह कहते हुए खारिज किया कि जिस इमारत की बिक्री हुई है. वह प्राइवेट है.

    जारी रहेगी लडाई : विकास मदनकर

    पांडे महल बचाव समिति पदाधिकारी विकास मदनकर ने कहा कि पुरातत्व विभाग ने जिला प्रशासन को पत्र भेजकर पांडे महल संरक्षित करने के संबंध में अनुरोध किया था. पांडे महल जैसी अनूठी इमारत समूचे महाराष्ट्र में कहीं पर भी नहीं है. यह इमारत हर दृष्टि से केंद्रीय पुरातत्व इमारत की सूची में स्थान पाने के लिए सवर्था योग्य है. इसलिए पांडे महल को संरक्षित करने के लिए आंदोलन जारी रहेगा. पांडे महल की सुबसूरती के साथ कोई समझौता नहीं किया जाना चाहिए. 

    लोगों की उम्मीदों का रखेंगे ध्यान : खरीददारों की प्रतिक्रिया

    पांडे महल को खरीदने वालों में एक ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लोगों की उम्मीदों का ख्याल रखा जाएगा. इस दिशा में देश के जानेामाने वास्तुविशारदों से भी सलाह मशविरा किया गया है. भविष्य में जो भी होगा शानदार ही होगा. जिस पर शहरवासी नाज करेंगे. 

    मनरो में मिला स्टे

    पिछले एक महीने से चर्चा में रहे मनरो स्कूल के मैदान में विवादास्पद व्यावसायिक निर्माण में स्टे आ गया है. न्यायमूर्ति सुकरे एवं किलोर की  अदालत ने विवादित मुनरो स्कूल परिसर के निर्माण को रोकने का आदेश जारी किया.  

    सभी की थी निगाहें

    उल्लेखनीय है कि सभी की निगाहें इस बात पर थीं कि मनरो स्कूल प्रांगण में चल रहा निर्माण कार्य जारी रहेगा या उस पर स्टे आएगा.  मनरो स्कूल परिसर में जारी निर्माण को लेकर राजनेता एवं स्थानीय लोगों में भी राय बंटी हुई थी. निर्माण विरोधियों का पक्ष था कि इससे स्कूल का प्रांगण ही खत्म हो जाएगा एवं स्कूल का विशेष महत्व भी समाप्त हो जाएगा. इस मसले पर विद्यार्थियों ने आंदोलन का सहारा लिया. जिला प्रशासन एवं पालकमंत्री से हस्तक्षेप करने का अनुरोध किया था. इसके अलावा पूर्व छात्रों ने जनहित याचिका प्रस्तुत की थी. इस याचिका पर 22 सितंबर को सुनवाई हुई. जिसमें अदालत ने चल रहे निर्माण कार्य पर स्टे दिया. इस मामले में एड. भानुदास कुलकर्णी यह याचिकाकर्ताओं के वकील थे. जबकि बुधवार को युक्तिवाद सीनियर काउंसिल एड. सुबोध धर्माधिकारी ने किया.

    इस अवसर पर डा. नितिन तुरस्कर, अभिजीत वंजारी, मंगेश साकोरे, हर्षल वंजारी, स्वप्निल भोंगडे, महेश बुधे, प्रमोद मनापुरे, खिमेश बढ़िये, कार्तिक ठोसरे, डा. रत्नाकर बांडेबुचे आदि पूर्व छात्र हाईकोर्ट में मौजूद थे. 

    अतीत की रक्षा होगी : डा. नितिन तुरसकर

    डा. नितिन तुरसकर ने इस मामले में कहा कि स्कूल मैदान में निर्माण कार्य को विरोध था. इससे विद्यार्थियों के खेलने के लिए कोई जगह नहीं बच रही थी. अदालत के स्टे से भंडारा के गौरवशाली इमारत की रक्षा हो सकेगी.    

    लड़ाई जारी रहेगी : शशीर वंजारी

    एड. शशीर वंजारी ने बताया कि अदालत की वेबसाइट पर विस्तृत आदेश अपलोड होगी. उन्होने बताया कि  इस मामले में कहा कि हम तब तक लड़ेंगे जब तक पूरी सफलता नहीं मिल जाती. न्यायालय ने आदेश दिया है कि अगले आदेश तक क्षेत्र में कोई निर्माण कार्य नहीं किया जाना चाहिए.हमने इस पहले चरण को सफलतापूर्वक पार कर लिया है. लेकिन लड़ाई जारी है और हम सब तब तक लड़ेंगे जब तक यह आंदोलन पूरी तरह सफल नहीं हो जाता. 

    15 दिन में जवाब प्रस्तुत करेंगे : महेश कांडलकर  

    जिप बीओटी मामले प्रकल्प सलाहकार महेश कांडलकर ने बताया कि अदालत ने पूरे प्रकल्प का स्थगित नहीं किया है. बल्कि केवल मनरो स्कूल में चल रहे निर्माण पर स्टे दिया है. बुधवार को हुई सुनवाई में जिप का पक्ष रखने के लिए कोई वकील पेश नहीं किया गया. अदालत ने सभी पक्षों को रिप्लाय प्रस्तुत करने के लिए 15 दिन का वक्त दिया है. कांडलकर ने बताया कि अगली सुनवाई में आवश्यक भी कागजात प्रस्तुत किए जाएंगे.