Asha Workers Protest
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भंडारा. बढ़े हुए वेतन और अन्य मांगों को लेकर आशा और गुट प्रवर्तकों ने सरकार से जीआर जारी करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है और भंडारा जिला परिषद के सामने हड़ताल चल रहा है. 11 नवंबर को दिवाली की पूर्व संध्या पर दिवाली को मधुर बनाने के नाम पर महाराष्ट्र सरकार ने आशा को 7,000 और गुट प्रवर्तकों को 10 हजार वेतन में पर्याप्त वृद्धि की घोषणा की. लेकिन दो महीने बाद भी सरकार ने वेतन वृद्धि जीआर जारी नहीं की है. इसलिए आशा एवं गुट प्रवर्तकों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल किया जा रहा है. इससे पहले भी आशा व गुट प्रवर्तकों ने 23 दिनों तक हड़ताल पर चले गये थे.

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत आशा स्वयंसेवकों और समूह प्रवर्तकों की नियुक्ति की गई. दिन व दिन उन पर काम का बोझ बढ़ता जा रहा है. कम वेतन पर काम करने वाले स्वैच्छिक कर्मचारियों को बढ़ती महंगाई के दौर में घर चलाना मुश्किल हो रहा है. पिछले महीने प्रदेश भर में आशा और समूह प्रवर्तकों ने 23 दिनों तक हड़ताल की थी. सरकार ने कुछ मांगें मानने का वादा किया. लेकिन यह पूरा नहीं हुए.

इसलिए उन्होंने 12 जनवरी से हड़ताल का विकल्प स्वीकार कर लिया है. उसी के तहत आज सीआयटीयू की ओर से जोरदार आंदोलन प्रदर्शन किया गया. आंदोलन का नेतृत्व कॉमरेड राजेंद्र साठे, कॉ. उषा मेश्राम, कॉ. सुनंदा बसेशंकर ने किया. इस आंदोलन में माधुरी डोंगरे, अर्चना मेश्राम, मनिशा डोंगरावा, नीलिमा करंजेकर, मंजुषा जगनाडे, सोनू सार्वे, अश्विनी बांगर, वर्षा जिभकाटे, कांचन बोरकर एवं अन्य आशा कार्यकर्ताओं और गुट प्रवर्तकों ने हिस्सा लिया.

ऐसी हैं मांगें

आशा एवं समूह प्रवर्तकों को 5 हजार रुपये का दिवाली बोनस दिया जाए, समूह प्रवर्तक का नाम आशा पर्यवेक्षक रखा जाए, आशा सुपरवाइजरों को ऑनलाइन डाटा एंट्री के लिए बाध्य नहीं किया जाए. न्यूनतम मजदूरी का भुगतान किया जाए, ठेका कर्मचारी के रूप में समायोजित करें. सीएचओ में नहीं सब सेंटर की आशा वर्कर को चिकित्सा अधिकारी के हस्ताक्षर से स्वास्थ्य संवर्धन निधि दी जाए, आशा सुपरवाइजर को 1,500 रु. आरोग्य वर्धक को हर माह धनराशि देनी चाहिए. सरकारी छुट्टियों पर लाभार्थी की जानकारी न मांगें. जानकारी सुबह 8 बजे से शाम 6 बजे के बीच ही लेनी चाहिए. डेंगू, टीबी, कुष्ठरोग सर्वे के लिए प्रतिदिन 200 रुपये दें.