मिलेगा सारस मित्रों को मानधन, किसानों को मुआवजा

    • जमीनी स्तर पर हो संरक्षण : सावन बाहेकर  

    भंडारा. किसी जमाने में भंडारा-गोंदिया जिले की शान रहे जैव विविधता के प्रतीक सारस पक्षी के संरक्षण को बढ़ावा देने और उनके घोंसलों की रक्षा करने वाले सारस मित्रों को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य वन विभाग ने पहल करते हुए मानधन देने का निर्णय लिया है.

    वन मंत्री सुधीर मुनगंटीवार ने हाल ही में इस संबंध में एक बैठक की. भंडारा-गोंदिया जिले के नवेगांव नागज़ीरा टाइगर कंजर्वेशन फाउंडेशन के वर्ष 2022-2023 के बजट में निजी भूमि पर सारस के घोंसलों और पक्षियों के संरक्षकों को प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान किया गया है. सारस पक्षी का घोंसला रखने वाले और धान की खेती करने वाले खेत मालिक को कम से कम 10 हजार से 12 हजार रुपये प्रति वर्ष मुआवजा देने का निर्णय लिया गया है. साथ ही सभी मान्यता प्राप्त सारस मित्रों को प्रोत्साहन के तौर पर 3 हजार रुपये मासिक मानधन का प्रावधान करने का एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया. भंडारा जिले में कूल 9 सारस मित्र हैं जबकि गोंदिया जिले में इनकी संख्या 40 है.

    इस साल मात्र तीन घोंसले 

    सारस की संख्या पिछले कुछ दिनों घटी है जो एक चिंताजनक बात है. आज की स्थिति में भंडारा जिले में 3, गोंदिया जिले में 34 और बालाघाट जिले में 45 सारस पक्षी हैं. नए घोंसले बनाने की जहां तक बात है, स्थिति निराशाजनक है. गोंदिया में जहां 2020 में 7 नए घोंसले बने, 2021 में 6 और इस वर्ष मात्र 3 ही नए घोंसले बने. भंडारा में 2013 से 2019 तक 1 घोंसला बना करता था मगर पिछले 3 वर्षों से यह शून्य है. 

    जमीनी स्तर पर हो संरक्षण : सावन बाहेकर

    नवभारत से खास बातचीत में सारस संवर्धन में अग्रणी रहे सेवा संस्था के अध्यक्ष सावन बाहेकर ने बताया की खेत के मालिक को सारसों की रक्षा तब तक करनी चाहिए जब तक कि सारसों के घोंसले का मौसम समाप्त न हो जाए और चूजों को हटा न दिया जाए. मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में, गोंदिया जिले के बाघ नदी के साथ भंडारा जिले में बहने वाली वैनगंगा नदी के आसपास के धान खेतों में सारस मौजूद हैं. बाहेकर ने बताया की सारस एक स्थानीय प्रवासी पक्षी है और इसका मुख्य आवास दलदल और पत्तेदार वातावरण है.

    सारस की संख्या में बढ़ोतरी के लिए माननीय उच्च न्यायालय के आदेश पर चंद्रपूर, भंडारा, गोंदिया जिले में संरक्षण समिति बनाई गई मगर वास्तविक जमीनी स्तर पर बहुत कुछ करना बाकी है. सावन बाहेकर ने बताया की वन मंत्रीजी का निर्णय निश्चित ही स्वागत योग्य है. गैर सरकारी संगठन वन विभाग, किसानों, पक्षी प्रेमियों और छात्रों के साथ मिलकर सारस संरक्षण का प्रयास कर रहे है. बाहेकर ने कहा की जिन स्थानिक लोगों ने सफलतापूर्वक सारस का संरक्षण किया है उनके प्रयासों को स्वीकृति मिलनी चाहिए. सारस के अधिवास व्यवस्थापन, अधिवास पुनर्स्थापन के साथ ही कीटनाशक नियंत्रण जरूरी है.