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    • बाघिण के सभी अवयव सहीसलामत 

    भद्रावती. भद्रावती तहसील के चंदनखेड़ा गांव के मार्ग पर एक खेत में गुरूवार की सुबह 9 से 10 बजे के दौरान 3 वर्ष की बाघिण का शव मृतावस्था में पाया गया. मृत बाघिण को देखने के लिए परिसर के लोगों की भीड जुट गयी. खेतों में लगाए गए तारों के इलेक्ट्रीक शाक लगने से बाघिण की मृत्यु हो गई. चौराला के वनविभाग में बाघिण पर पोस्टमार्टम कर वही पर दफनाया गया. 

    गुरूवार की सुबह चंदनखेड़ा वायगांव मार्ग पर धान के खेत में 3 वर्ष की बाघिण मृत अवस्था में दिखाई दी. बाघिण को देखने हेतु लोगों ने भीड़ इकठ्ठा कर दी. खेत में जंगली जानवर के घुसने पर प्रतिबंध लगाने के लिए तार लगाकर करंट लगाया जाता है. उसी तार के करंट से बाघिण की मृत्यु होने की पुष्टी वनविभाग ने की है.

    बाघिण के मृत्यु की सूचना वन विभाग को मिलने पर वनविभाग अधिकारी और कर्मचारीयों ने  घटनास्थल पहुंच कर घटना का पंचनामा किया. भीड पर नियंत्रण पाने के लिए वनविभाग अधिकारीयो ने पुलिस को बुलाया गया. तत्पश्चात पशुवैद्यकीय अधिकारी डा. रविंकांत खोब्रागडे, डा. घोडशेलवार ने पंचनामा किया. बाघिण के सभी अवयव सहीसलामत है. 

    घटनास्थल पर उपवनसंरक्षक हितेश मल्होत्रा, एनटीसीए के प्रतिनिधि बंडु धोतरे, प्रधान मुख्य वन संरक्षक के प्रतिनिधि मुकेश भांदककर, भद्रावती के आरएफओ शिंदे, वरोरा आरएफओ राठोड उपस्थित थे. तत्पश्चात बाघिन को चौराला के वनविभाग डिपो ले जाया गया. जहां उसका पोस्टमार्टम कर वही पर दफनाया गया.  

    भद्रावती तहसील में आए दिन जंगली जानवरों के मुक्त संचार से काफी दहशत बनी रहती है. आर्डिनन्स फैक्टरी परिसर में कभी रात में लोगों को तेंदुआ नजर आता है. तो ढोरवासा, चारगांव, तेलवासा परिसर में बाघ_बाघिण दिखाई देने से परिसर में जंगली जानवरों के प्रति भय फैला हुआ है. यहां से ताडोबा जंगल पास में होने के कारण जंगली जानवर खेत में घुस आते हैं. तो कभी-कभी लोगों या उनके जानवरों को अपना निवाला बनाते हैं.

    बाघ के कारण परिसर के कई लोगों के जानवर मारे जा चुके हैं. कई लोगों के जानवर घायल भी हुए है. भद्रावती तहसील के चारगांव, तेलवासा ढोरवासा गांव में डब्ल्यूसीएल की खदानें बंद होने से जंगल बन गए हैं और उन्हीं में इन जंगली जानवरों ने अपना डेरा बनाया है. कई बार लकड़ियां काटने को जाने वाले लोगों को या खेत में काम करने वाले लोगों को इनके दर्शन हो ही जाते हैं. इस वजह से इन लोगों में भी अपने जान की दहशत बनी रहती है.

    फिलहाल में खेती वालों का कपास और सोयाबीन काटने का सीजन चल रहा है. और ऐसे में यदि इन जंगली जानवरों की दहशत बनी है तो खेत में जाने वाले भी किसान थोड़ा सा घबराते रहते हैं. इन जानवरों से सभी को हमेशा खतरा बना रहता है अभी कुछ महीने पहले ही  चंद्रपुर_नागपुर महामार्ग पर एक तेंदुआ किसी अज्ञात वाहन की टक्कर से मृत्यु हुई थी तो ऐसे में जंगली जानवरों का खतरा हमेशा तहसील के आसपास के ग्रामीण को बना ही रहता है.