दूसरे वर्ष भी नहीं होगा रावण दहन कार्यक्रम, उमड़ती भीड़ को देखकर लिया निर्णय

    • जिलाधिश के रावण दहन आयोजन समिति को सूचना  
    • प्रतिकात्मक तौर पर होगा रावण दहन  

    चंद्रपुर. चंद्रपुर शहर में महाकाली माता मंदिर समीपस्त मैदान पर बरसों से चल रही रावण दहन की परम्परा को दूसरे वर्ष भी जिलाधिश ने प्रशासकीय आदेश से रद्द कर दिया है. दशहरा त्योहार व रावण दहन उत्सव में लोगों की उमडने वाली भीड को देखते हुए रावण दहन कार्यक्रम रद्द करने का निर्णय लिया गया. दौरान दशहरा त्योहार के पार्श्वभूमीपर प्रशासन ने सामाजिक दूरीयां बनाने व शासकीय नियमों का पालन करने का आवाहन किया है. 

    हरवर्ष दशहरे के दिन शाम में शहर के देवी महाकाली मंदिर समीपस्त मैदान पर रावण दहन आयोजन समिति की ओर से भव्य रावण दहन कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है. आयोजन को देखने शहर के हजारों भाविक यहां मैदान में आते है. उसके पूर्व प्रसिध्द महाकाली मंदिर में देवी के दर्शन किए जाते है. तत्पश्चात रावण दहन उत्सव का आनंद लिया जाता है. परंतु पिछले वर्ष कोरोना प्रभाव के चलते रावण दहन कार्यक्रम रद्द किया था. इस वर्ष भी कोरोना का प्रभाव काफी कम हुआ है साथ ही मरिजों की संख्या काफी हद तक भले ही कम हुई हो परंतु यहां उत्सव मनाने आनेवाले लोगों की भीड को देखते हुए प्रशासन ने यह कार्यक्रम रद्द करने का निर्णय लिया. इससे लोगों के उत्साह पर दूसरे वर्ष भी ग्रहण लग गया है.

    रावण दहन कार्यक्रम 

    शहर में मुख्य रूप से सार्वजनिक तौर पर रावण दहन कार्यक्रम महाकाली मंदिर समीपस्त मैदान, जटपुरा गेट के पास पंचतेली हनुमान मंदिर मैदान समेत कुछ वार्ड के मैदानों समेत अन्य छोटे बडे वार्ड के मैदानों में रावण दहन का कार्यक्रम लिया जाता है.

    रावण, कुंभकर्ण, इंद्रजित के पुतलों का निर्माण

    दशहरे के दिन सुबह से ही रावण, कुंभकर्ण, इंद्रजीत दहन के लिए पुतलों का निर्माण करना शुरू किया जाता है. बास से पुतलों का ढांचा बनाकर उसमे तणीस, कपास, पटाखे भरकर कपडे से लपेटा जाता है. तत्पश्चात आयोजन के मुख्य अतिथि तथा राम की भूमिका निभा रहे व्यक्ति के हाथों से बाण को छोडकर तीनों प्रतिमाओं का दहन किया जाता है. दौरान मैदान में किसी तरह का अनुचित प्रकार ना घडे इसलिए आयोजन समिति द्वारा विशेष ध्यान दिया जाता है. 

    सादगी से मनाया जायेगा दशहरा पर्व 

    कोरेाना के चलते इसबार दशहरा पर्व सादगी से मनाया जा रहा है. रावण दहन के पश्चात शाम को लोग सगे_संबंधी, गिने चूने रिश्तेदार के घर जाकर सोना देकर घर लौटना अधिक पसंद कर रहे है. इसी बीच भीडभाड में जाने से लोग परहेज करेंगे. 

    प्रशासन के आदेशों पर अंमल होगा- लहामगे, आयोजन समिति अध्यक्ष 

    मुख्य रावण दहन आयोजन समिति के अध्यक्ष संतोष लहामगे ने बताया कि, वर्ष 1958 से मुख्य रावण दहन आयोजन की शुरूवात की है. हरवर्ष रावण दहन उत्सव को देखने हजारों लोग, महिलाए, छोटे बच्चे यहां आकर आनंद लेते है. परंतु इस बार कोरोना के चलते तथा प्रशासकीय आदेश पर अंमल करते हुए यह कार्यक्रम रद्द किए जाने की जानकारी दी. 

    दशहरा पर्व पर फुल थे पर ग्राहक नही 

    त्योहारों में झंडु के फुलों का अधिक महत्व होता है. शुभ कार्य, वाहनों की माला के लिए झंडु के फुलों का विशेष महत्व होता है. दहशरा पर्व पर बाजार में झंडु के फुलों की खुब बिक्री होती है. परंतु शनिवार को झंडु के फुलों का भाव 100 से 150 रूपये किलों तक पहुच जाने से फुलों की दुकानों से ग्राहक नदारद दिखे. कई फुल दुकानदार ग्राहकों की प्रतिक्षा में थे.