तेंदूपत्ता ठेके को लेकर ग्रामसभा और वनविभाग में पेंच, थानेदार मनोज गभने ने भेंट दी

    चंद्रपुर. वनअधिकार कानून अंतर्गत वन अधिकार प्राप्त ग्रामसभा को गांव की सीमा अंतर्गत व सीमा बाहर वन उपज संकलन का अधिकार है. किंतु चिमूर वनविभाग के कुछ वन अधिकारी अनेक कारण सामने कर ग्रामीणों को वंचित रखने का प्रयास कर रहे है. तेज धूप सहन कर तेंदूपत्ता संकलन करने वाले मजदुरों को इस बार ग्रामसभा द्वारा तेंदूपत्ता का बेहतर दाम दिया जा रहा है. किंतु वनविभाग बाधा डालकर ग्रामीणों को अधिक दर से मिल रही मजदूरी से वंचित रखने काकाम कर रही है इससे ग्रामीणों में चिमूर वनविभाग के प्रति नाराजगी है.

    चिमूर तहसील की ग्राम सभा के कारण तेंदूपत्ता वन विभाग के एकाधिकार को तोड़ रहा है और डेढगुना दर देकर तेंदूपत्ता संकलन शुरू किया. किंतु वन विभाग ने पहले कहा था कि जो तेंदू पत्ते एकत्र किए थे, वे अवैध थे. वन विभाग ने अपने फैसले को पलटते हुए अपना निर्णय ग्रामसभा की भांति होने की बात कही है. 

    ग्राम सभा द्वारा अब तक 381 हेक्टेयर से एकत्रित तेंदूपत्ता महज ग्रामसभा को मान्य न होने से वनविभाग और ग्रामीण का संघर्ष जारी है. तेंदूपत्तासंकलन केंद्र पर थानेदार मनोज गभने, उपनिरीक्षक सोरते ने भेँट दी. वन विभाग और ग्रामसभा पदाधिकारियों को थाने बुलाया है.

    प्रशासनिक पेंच निर्माण होने से मामले को निबटाने क लिए उपविभागीय अधिकारी के पास भेजा है. हमने मामले को स्थायी समाधान तलाशने और प्रशासनिक बाधा को स्थायी रूप से दूर करने के लिए एसडीओ व आदिवासी प्रकल्प विभाग की संयुक्त बैठक में भेज दिया है. जिससे प्रशासनिक पेंच सदा के दूर हो सके.

    मनोज गभणे, पीआई चिमूर

    संसद पहुंचा तेंदूपत्ता मामला

    ग्राम सभा तेंदूपत्ता संकलन केंद्र व वन विभाग के बीच पिछले एक सप्ताह से विवाद चल रहा है और अभी तक कोई समाधान नहीं निकला है. इसलिए ग्राम सभा सचिव डोमा शिवरकर ने मामले को अधि. पूर्णिमा उपाध्याय के माध्यम से केंद्रीय आदिवासी विकास मंत्री अर्जुन मुंदडा को भेजाहै. अब यह मामला क्या मोड लेता है इस ओर सभी पलसगांव वासियों की निगाहें लगी है.