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    • कोरोना नियमों की उड़ रही है धज्जियां
    • बिना टिकट वाहनों में भरे जा रहे है यात्री

    चंद्रपुर.  राज्य परिवहन निगम (एस.टी.)कर्मियों की विगत 26 दिनों से जा रही हडताल ने निजी वाहन चालकों की जेबें हरी कर दी है. निजी यात्री वाहनों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर यात्रियों का परिवहन किया जारहा है. जहां एक ओर कोरोना नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जारही है वहीं बिना टिकट के यात्रियों का वाहनों में ठूंस ठूंसकर भरा जारहा है.

    एस.टी.बसेस नहीं चलने के कारण यात्रियों को मजबूरन इन वाहनों से यात्रा करनी पड़ रही है. सर्वाधिक रूप से ग्रामीण क्षेत्र के यात्रियों को काफी परेशानी उठानी पड़ रही है. अब तो स्कूलें और कालेज भी दीपावली अवकाश के बाद नियमित रूप से शुरू हो चुके है ऐसे में बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे स्कूली छात्र_छात्राओं के लिए स्कूल पहुंच पाना और भी कठिन हो गया है.

    एक समय एस.टी बस स्टैंडों में यात्रियों की भरमार नजर आती थी परंतु विगत 26 दिनों से यहां सन्नाटा छाया हुआ है. एस.टी कर्मी मंडप डालकर समय बीताते हुए नजर आते है. कुछ मनोरंजन के लिए गीत संगीत आदि की महफिल सजाए हुए है तो कुछ का समय ताशों की पत्तों के खेल में बीत रहा है.

    विगत 28 अक्टूबर से शुरू हुई एस.टी कर्मियों की हड़ताल को आज मंगलवार को पूरे 26 दिन हो चुके है. इस दौरान चंद्रपुर जिले के किसी भी बस स्टैंड से बस सड़क पर नजर नहीं आयी है. मुख्य बस स्टैंड पर चारों ओर बसेस खड़ी है और जो कुछ जगह बची है वहां एस.टी कर्मियों ने मंडप डाला हुआ है.

    जहां यात्रियों के बैठने का स्थान वहां सन्नाटा छाया हुआ नजर आता है. वही निजी बस स्टैंडों और निजी वाहनेां के स्टैंडों पर लोगों की भीड़ का प्रमाण काफी बढ गया है. जहां कोरोना नियमों की पूरी तरह से धज्जियां उड़ रही है. वाहनों में अधिकांश यात्री बिना मास्क पहने नजर आते है. भीड़ इतनी होती है कि यात्री मास्क पहनाना भी चाहे तो उसे इतनी बैचेनी का सामना करना पड़ता है कि वह खुद ही अपना मास्क निकालकर जेब में डाल देता है. सीटें फूल होने के बाद बीच में और वाहन चालक के केबिन तक में यात्रियों को भरकर ले जाया जा रहा है.

    इनमें से अधिकांश यात्रियों से किराया भाड़ा लिया जारहा है परंतु उन्हें टिकट नहीं दी जा रही है. चंद्रपुर से नागपुर के लिए टैव्हल्स बसों का किराया हडताल के पूर्व 150 से 180 रूपये था जो कि अब बढकर 200 से 250 रुपये हो गया है. नागपुर के लिए सावरकर चौक से लेकर ट्रैफिक आफिस के सामने होकर कृषि विभाग कार्यालय तक ट्रैव्हल्स और निजी वाहनों का मजमा लगा था.

    इसी तरह नागपुर रोड पर मुख्य डाक घर के सामने भी इसी तरह की भीड़ नजर आती है. मूल, गडचिरोली की ओर जानेवाले यात्रियों की भीड़ रामनगर पुलिस थाने के सामने लगी हुई है. बल्लारपुर, राजुरा, तेलंगाना की ओर जानेवाले यात्रियों के लिए तेलंगाना की ओर से आनेवाली बसों का सहारा मिला है.

    इसके चलते इस रूट पर जानेवाले यात्रियों को किसी तरह की परेशानी महसूस नहीं हो रही है. तेलंगाना राज्य ने अपनी बसों की फेरिया भी बढा दी है. इसके बावजूद यात्री मिनीडोर और आटो से यात्रा कर रहे है. निजी ट्रैव्हल्स बसेस शहरी क्षेत्र में मुख्य मार्ग से गुजर रही है वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के लिए जाने के लिए यात्रियों को काली पीली टैक्सियों और अन्य वाहनों का सहारा लेना पड़ रहा है. यहां निजी वाहन चालकों द्वारा ग्रामीणें की मजबूरी का लाभ उठाकर दुगुना किराया वसूल रहे है. 

    एस.टी. बस की हडताल का सर्वाधिक असर ग्रामीण छात्र_छात्राओं को हो रहा है. पहले कोरोना के कारण स्कूलें ओर कालेज बंद होने से उनकी पढाई प्रभावित रही और अब एसटी बसों के हडताल के कारण वें स्कूल नहीं पहुंच  पा रहे है.

    बारहवीं और दसवीं की बोर्ड परीक्षा के विद्यार्थियों के लिए इस समय परीक्षा की पूर्व तैयारी के लिए स्कूल, कालेजों तक पहुंचना अत्यंत जरूरी है इन विद्यार्थियों का भविष्य खतरे में नजर आ रहा है. उनकी पढाई पूरी तरह से प्रभावित हो चुकी है. इसी तरह गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीजों के लिए शहरी क्षेत्र में अस्पतालों में आकर उपचार कर पाना कठिन हो रहा है. सभी रोजाना चातक पक्षी की तरह एस.टी बस की हडताल समाप्त होने की प्रतीक्षा में है.