15 दिनों से ठप पड़ा है घुग्घुस ग्रामीण अस्पताल का काम

    • क्षेत्रीय विधायक के पीए ने भूमिपूजन न होने से रोका काम

    चंद्रपुर. औद्योगिक नगरी और जिले में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में शुमार घुग्घुस में 30 बेड वाले ग्रामीण हास्पिटल के काम की शुरुवात 11 नवंबर को की गई. किंतु क्षेत्रीय विधायक किशोर जोरगेवार के पीए ने फोन कर काम को रुकवा दिया. आज लगभग पखवाडे भर से बंद पडा है. काम रोके के संबंध में जिले के अधिकांश राजनीतिक दलों के नेताओं ने इसे जनस्वास्थ्य से जुडा मुद्दा होने से महज भूमिपूजन के लिए काम न रोकने की वकालत की है. 

    हास्पिटल का काम रोकना अनुचित-जिप सदस्य पाझारे

    घुग्घुस परिसर निवासी और जिला परिषद सदस्य ब्रिजभूषण पाझारे ने कहा कि इस प्रकार 30 बेड वाले ग्रामीण हास्पिटल का काम रोकना सरासर अनुचित है. वह भी महज भूमिपूजन क्षेत्रीय विधायक के हाथों न होने के कारण से. विधायक चाहते तो काम शुरु रहने के दौरान भी फीता काटकर औपचारिकता पूरी कर सकते थे. अन्यथा हास्पिटल का काम होने के बाद बडा समारोह आयोजित कर लेते. घुग्घुस शहर की जनसंख्या के अनुपात में घुग्घुस प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सक ओपीडी में चाहकर भी उचित सेवा नहीं दे पा रहे है. क्योंकि आने वाले मरीजों की संख्या अधिक होती है. ग्रामीण अस्पताल का मुद्दा नागरिकों के स्वास्थ्य से जुडा होने की वजह से इस प्रकार काम को रोकना कदापि उचित नहीं है.

    एक दशक देरी से हो रही ग्रामीण हास्पिटल का काम-चौधरी

    जिप की पूर्व महिला व बाल कल्याण समिति सभापति नीतू चौधरी ने कहा कि पहले ही ग्रामीण हास्पिटल का काम एक दशक देरी से हो रहा है. क्षेत्रीय विधायक चाहते तो भूमिपूजन बाद में कर सकते थे. किंतु इस प्रकार हास्पिटल का काम रोकना नहीं चाहिए था. इसलिए भूमिपूजन कभी भी करें किंतु हास्पिटल का रुका काम तुरंत शुरु करने की मांग चौधरी ने की है.

    हेल्थ में राजनीति न हो- डा. गुलवाडे

    भारतीय जनता पार्टी के चंद्रपुर शहर अध्यक्ष डा. मंगेश गुलवाडे ने कहा कि घुग्घुस देश के  अति प्रदूषित शहरों में गिना जाता है. वहां पर शुरु हास्पिटल के काम को महज भूमिपूजन के लिए रोकना बिलकुल गलत है. क्योंकि पिछले दो वर्षो से देश और विश्व कोरोना की त्रासदी झेल रहा है. आज भी कोरोना से उबर नहीं पाए है और स्वास्थ्य विभाग लगातार तीसरी लहर की चेतावनी दे रहा है.

    कोरोना काल में देखा गया है कि किस प्रकार जहां जगह मिली वहां पर बेसिक सुविधाएं उपलब्ध कर मरीजों को दाखिल किया गया. उस समय पर अनेक समाजसेवी और स्वयंसेवी संस्थाओं ने सहयोग कर मरीजों की मदद की है. घुग्घुस शहर इंडस्ट्रील बेल्ट है जहां पर प्रदूषण का प्रमाण जिले में सर्वाधिक रहता है. घुग्घुस परिसर के नागरिकों को फेफेडों की बीमारी सर्वाधिक हो रही है. नागरिकों के हेल्थ से जुडे विषय पर राजनीति नहीं करनी चाहिए थी. 

    4 हो होगा हास्पिटल का भूमिपूजन-रेड्डी

    कांग्रेस के शहर अध्यक्ष राजू रेड्डी ने कहा कि 4 दिसंबर को पालकमंत्री विजय वडेट्टीवर, सांसद बालू धानोरकर, क्षेत्रीय विधायक किशोर जोरगेवार की प्रमुख उपस्थिति में 30 बेड के ग्रामीण हास्पिटल का भूमिपूजन किया जाएगा. इस दौरान पालकमंत्री विजय वडेट्टीवार स्वयं इस काम को समय सीमा से एक महीने पूर्व पूरा कराने का प्रयास करेंगे. भले आज 15 दिन से काम बंद है किंतु निर्धारित समय सीमा से पूर्व ही काम को पूरा करने का प्रयास होगा.

    सीएम, स्वास्थ्य मंत्री से की शिकायत

    घुग्घुस के 30 बेड के ग्रामीण हास्पिटल का काम विधायक के पीए के कहने पर रोके जाने की शिकायत प्रदेश के मुख्यमंत्री उध्दव ठाकरे और स्वास्थ्य मंत्री डा. राजेश टोपे से घुग्घुस के इबादुल हसन सिद्दीकी ने की है. जिसे सीएम कार्यालय ने आगे की कार्रवाई के स्वास्थ्य मंत्रालय, सचिव, ग्राम विकास मंत्रालय को भेजा है.

    8 करोड़ की मंजूरी के बाद शुरु हुआ था काम

    चंद्रपुर जिले में घुग्घुस औद्योगिक नगरी की जनसंख्या आज 50,000 से अधिक है. इसलिए घुग्घुस को नगर पालिका का दर्जा मिला है. 30 बेड क्षमता वाले घुग्घुस ग्रामीण हास्पिटल की बिल्डिंग के निर्माणकार्य का टेंडर पीडब्ल्यूडी विभाग ने जारी किया. 11,17,10,000 रुपए की कुल लागत वाले काम के लिए प्रथम चरण में 8,07,91,481 रुपए की निधि को मंजूरी देकर पीडब्लयूडी विभाग ने ठेकेदार के माध्यम से काम शुरु किया और 11 नवंबर को काम की शुरुवात की गई. किंतु तीन घंटे बाद काम ठप पड गया है.