आज श्री की होगी विदाई, शोभायात्रा को लेकर बंदी, जिला एवं पुलिस प्रशासन सुसज्ज

    चंद्रपुर. महाराष्ट्र में सबसे बड़ा उत्सव गणेशोत्सव समूचे जिले में इस वर्ष बेहद सादगी के साथ मनाया गया. कोरोना संकट को देखते हुए हर वर्ष गली मुहल्लों में सार्वजनिक गणेश प्रतिमाओं की स्थापना और पूरे दस दिनों से भक्तिगीतों की गूंज वाला माहौल लगातार दूसरे साल भी नजर नहीं आया. पूरे दस दिनों तक शांतिपूर्ण तरीके से हुए आयोजन के साथ आज श्री को भावपूर्ण विदाई दी जाएगी. गणेश विसर्जन को देखते हुए पुलिस एवं स्थानीय प्रशासन ने नदी घाटों आदि क्षेत्रों में सुरक्षा प्रबंध बढा दिए है. कोरोना के कारण इस वर्ष भी शोभायात्रा नहीं निकाली जाएगी.

    उल्लेखनीय है कि गणेश चतुर्थी को पारंपारिक वाद्यों की गूंज के साथ श्रीगणेश का आगमन हुआ. इस दौरान दस दिन बाप्पा की आराधना में कैसे बीते किसी कुछ भी समझ में नहीं आया. आज रविवार अनंत चतुदर्शी को बाप्पा को भावपूर्ण बिदाई जाएगी. विसर्जन के लिए प्रशासन एवं पुलिस ने सभी गणेश मंडलों को कोरोना नियमों का पालन करने के निर्देश दिये है. इसलिए किसी भी तरह  को ढोल बाजे, डीजे का बिना शोर किए सीमित लोगों की उपस्थिति में गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाएगा. 

    जिले में कोरोना की स्थिति सामान्य है, परंतु विशेष सावधानी बरतते हुए सार्वजनिक शोभायात्रा निकाले जाने के बजाय केवल पांच से छह लोगों की उपस्थिति में ही सार्वजनिक गणेश मंडप में, चलित विसर्जन कुंड अथवा इरई एवं झरपट नदी पर गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन होगा. गणेश प्रतिमाओं के विसर्जन के लिए जिला एवं पुलिस प्रशासन और मनपा विभाग पूरी तरह से सुसज्ज है. पुलिस का चौराहों पर चुस्त बंदोबस्त लगा दिया गया है.

    शोभायात्रा की परंपरा खंडित

    समूचे विदर्भ में च्रंद्रपुर का गणेशोत्सव काफी प्रसिध्द रहा है. विसर्जन के दिन यहां जिले भर से लाखों की संख्या में लोग शोभायात्रा की झांकियों को देखने आते थे., यह झांकियां सामाजिक, राजनीतिक, धार्मिक और मौजूदा ज्वलंत विषयों पर होती थी. महानगर में परकोटे के कस्तूरबा मार्ग, गांधी मार्ग से होकर प्रतिमाओं को रामाला तालाब में विसर्जित किया जाता था. अधिक उंचाई वाली प्रतिमाओं को इरई नदी में विसर्जित कियाजाता था.

    इस दौरान मार्ग के दोनों छोर पर लाखों की तादाद में लोग एकत्रित होते थे. विभिन्न झांकियों सभी का मनमोह लेती थी. राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों, संस्थाओं द्वारा शीतल पेयजल, खाद्य सामग्री का वितरण किया जाता था. दूर दूर से छोटे बड़े व्यवसायी अपनी दुकानें सड़क के किनारे लगाते थे. जिससे पूरा शहर एक धार्मिक जत्रा के रूप में तब्दील हो जाता था. देर रात तक भीड़ गणेश विसर्जन के विहंगम दृष्यों को देखने के लिए डटी रहती थी. परंतु पिछले दो वर्षों से कोरोना संकट के कारण शोभायात्रा की परंपरा पूरी तरह से खंडित हो गई है.

    विसर्जन के लिए मनपा की तैयारी

    गणेशोत्सव के लिए चंद्रपुर शहर महानगरपालिका की ओर से पूर्ण तैयारी की गई है. कोरोना का संक्रमण रोकने के लिए श्री गणेशमूर्ति विसर्जन अवसर पर भीड़ को टालने के लिए 20 कृत्रिम तालाब और 20 निर्माल्य कलश स्थापित किए गएहै. सभी मूर्तियों का विसर्जन पूर्ण कृत्रिम तालाब में हो इसके लिए मनपा प्रयासरत है. इसके अलावा रामाला, इरई नदी पर भी पुलिस का चुस्त बंदोबस्त रखा गया है. 

    27 कृत्रिम विसर्जन कुंड, 19 निर्माल्य कलश

    शहर में 27 स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन कुंड व 19 निर्माल्य कलश रखे गए है इसमें. जोन क्रमांक 1, में मनपा जोन कार्यालय, संजय गांधी मार्केट नागपूर रोड, डॉ. बाबा आमटे अभ्यासिका, दाताला रोड, इरई नदी, तुकुम प्रा. स्कूल (मनपा, चंद्रपुर), जोन क्रमांक -2 में गांधी चौक, लोकमान्य तिलक प्राथमिक स्कूल पठाणपुरा रोड, समाधी वार्ड, शिवाजी चौक, अंचलेश्वर रोड, विठोबा खिडकी, विठ्ठल मंदीर वार्ड, रामाला तलाव, हनुमान खिडकी, महाकाली प्रा. स्कूल, महाकाली वार्ड, जोन क्रमांक – 3, में नटराज टाकीज (ताडोबा रोड), सावित्रीबाई फुले प्रा. स्कूल बाबूपेठ, मनपा जोन कार्यालय, मूल रोड, बंगाली कॅम्प चौक आदि स्थानों पर कृत्रिम विसर्जन व्यवस्था की गई है.

    शुक्रवार की देर रात तक विसर्जन 

    जोन क्रमांक 1 = 1736  

    जोन क्रमांक 2 = 2162 

    जोन क्रमांक 3 = 1463

    चलित कुंड = 91 

    कुल = 5452 प्रतिमाओं का विसर्जन