कोरची में आकर्षण का केंद्र बना ‘बस्तरिया गणेश’, 44 वर्षो से चली आ रही गणेशोत्सव की परंपरा

    •  आदिवासी बांधवों में उत्साह का वातावरण

    कोरची. हिंदू धर्म के अनुसार सालभर में अनेक त्यौहार, उत्सव मनाएं जाते है. मात्र उसमें गणेशोत्सव की विशेषता कुछ ओर ही रहती है. गणेशोत्सव के मद्देनजर सर्वत्र उत्साह का माहौल देखने को मिलता है. छोटे बच्चों से लेकर युवा तथा वृद्धजन भी बाप्पा के इस पर्व में डूबे दिखाई देते है. जिले में भी गणेशोत्सव उत्साहपूर्वक मनाया जा रहा है.

    मात्र कोरोना महामारी के मद्देनजर बिते वर्ष से उत्सव में कुछ बेरूखी देखने को मिल रही है. मात्र अनेक जगह गणेशोत्सव का उत्साह कायम है. इसी तरह जिले के उत्तरी छोर पर छत्तीसगढ़ राज्य की सिमा से सटी कोरची तहसील में भी गणेशोत्सव की धूम है. भलेही कोरोना महामारी के चलते उत्सव सादगी से मनाया जा रहा है.

    मात्र श्रद्धालुओं में उत्साह कायम है. इस वर्ष कोरची में बस्तरिया पैटर्न के गणेश मुर्ती की स्थापना की गई है. यह मुर्ती परिसर में आकर्षण का केंद्र बनी हुई है. विगत 44 वर्षो से कोरची में गणेशोत्सव मनाया जा रहा है. कोरोना महामारी है, किंतू सादगीपूर्ण रूप से यहां गणेशोत्सव की परंपरा कायम रही है.

    आदिवासी वेशभूषा में गणेश, रिद्धी-सिद्धी

    कोरची तहसील समिपी छत्तीसगड़ राज्य से सटी हुई है. जिसके कारण इस तहसील पर छत्तीसगड़ राज्य का प्रभाव अधिक दिखाई देता है. इस तहसील के सटकर छग का बस्तर परिसर है. बस्तर परिसर के आदिवासी समुदाय की अपनी एक विशेष संस्कृति व परंपराएं है. उनका पेहनाव भी विशेष है.

    जिसके चलते कोरची में बस्तरिया आदिवासीयों के वेशभूषा में भगवान श्री गणेश व रिद्धी-सिद्धी की मुर्तीया विराजमान की गई है. यहां भगवान गणेश ढ़ोल बजाते, तो रिद्धी-सिद्धी नृत्य करते नजर आ रहे है. यह मुर्ती सभी को आकर्षित करती है.

    नियमों का हो रहा पालन

    कोरची तहसील में गणेशोत्सव उत्साह के साथ मनाया जा रहा है. कोरोना महामारी के मद्देनजर प्रशासन द्वारा दिए गए नियमों का कड़ाई से पालन हो रहा है. प्रशासन ने गणेशोत्सव के मद्देनजर मास्क का उपयोग, सोशल डिस्टन्सींग का पालन करने समेत अनेक नियमावली लागू की है.

    प्रशासन के नियमों का पालन करते हुए यहां गणेशोत्सव मनाया जा रहा है. कोरची तहसील यह आदिवासी बहुल तहसील है. यहां बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय रहता है. आदिवासी अपने परंपरा व संस्कृति के अनुरूप विभिन्न पर्व मनाते है.