Government will spend 20,050 crores in fisheries production

  • मानना होगा आत्मनिर्भरता का विकल्प 

सिरोंचा. सिरोंचा तहसिल की भौगोलिक स्थिति को देखेंगे तो पायेंगे यहां का क्षेत्र का अधिकांश हिस्सा नदियों से घिरा हुआ है. प्राणहीता एवं इन्द्रावती के रुप मे दो प्रमुख बाराहमासी नदियों की उपस्थिति बनी हुई है. इसको देखते हुए क्षेत्र मे मौजूद नदियों की जल के लिफ्ट एरिगेशन योजनाओं के बलबूते नदियों के जल को लिफ्ट कर तालाबों मे भरकर मत्स पालन को आत्मनिर्भरता के विकल्प के रुप मे चुना जा सकता है.

इस लिफ्ट किया हुआ जल का कृषि क्षेत्र मे उपयोग होने के अलावा मत्स उद्योग मे भी किया जा सकेगा. साथ ही तहसील क्षेत्र मे मौजूद नालो पर स्टाप डैम बनाकर भी बहकर जाने वाला जल को रोककर मत्स पालन को शुरू किया जा सकता है. इसमे अपार सम्भावनाएँ मौजूद होने की बात जानकार मानते है. बशर्ते इस दिशा मे कोई ठोस योजनाओं के बनाने की जरुरत है.

सिरोंचा तहसील के रेगुंटा, रंगायापल्ली, गर्कापेटा, वेंकटापुर,  अम्राजी, कारसपल्ली, सिरोंचा, नगरम, अरडा, रजन्नापल्ली, मृदुकृष्णापुर, पेंटिपाका, आइपेटा, वड़धम,कोत्तपल्ली,पोचमपल्ली, अंकीसा, आसरल्ली, सोमनूर, सोमनपल्ली, रायगूड़ा, पातागुडा, कोर्ला ये सभी क्षेत्र नदी किनारों वालों क्षेत्र है. इस क्षेत्रों को टार्गेट कर लिफ्ट एरिगेशन की योजनाएं अमल मे लाते हुए उन क्षेत्रों के तालाबों को भरकर मत्स पालन के बलबूते स्थानीय लोगों को आत्म निर्भर बनाया जा सकता है. इससे बेरोजोगारी पर अंकुश लगाने के अलावा पलायन को भी रोका जा सकता है.

हालाकी इस हेतू राजनीतिक क्षेत्र से निर्वाचित जनप्रतिनिधयों मे दृढ इच्छा-शक्ति की भावना जागृत होने की जरुरत है. इस परिकल्पना को जमीन पर उतार कर वे इस क्षेत्र के विकास मे चार चांद लगा सकते है. साथ ही भावी पीढी को रोजगार उनके गृह गांव मे ही उपलब्ध कराने मे सफल हो सकते है. हालकी केंद्र एवं राज्य की सरकारें ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के उत्थान के दिशा मे करोड़ों रुपिये खर्च कर रही है. मगर इन क्षेत्रों के लोगों को अपने आसपास मे व्यवसाय के विकल्प पैदा नही करने पर ये सभी प्रयास बौना साबित होते दिखाई पड़ रहे है.

जबकी सिरोंचा तहसील मे लोग आज भी किनारों पर बहने वाले नदी नालों पर मत्स आखेट कर उसका विक्रय से आय हासिल कर्ने मे लगे है. सिरोंचा की झिन्गो की माँग राज्य के अलावा दूसरे राज्यों मे भी बनी हुई है. इसकी किमत भी बहुत ज्यादा आंकी गयी है. दूसरे स्थानो मे बसने वाले तहसील के लोगों के रिस्तेदार भी जब भी बात होती है तो वे उनसे मिलने आने पर झिन्गे लाने की बात करते है. अगर स्थानीय लोगों के लिये इस दिशा मे अवसर निर्मित कर दिये जाये तो वे इसके मत्स पालन एवं उसका व्यापार के बदौलत वे अच्छी आय अर्जित कर सकते है.

इसके आलावा किसान तबका भी अपने उपलब्ध ल्हेती की जमीन के एक सीमित क्षेत्र मे छोटे आकार के तालाबों का निर्माण कर मत्स पालन कर इससे व्यापार का रुप दे सकते है. जहां तलाब मे मौजूद पानी का वे दोहरा उपयोग कर सकते है. वे पानी का सिंचाई मे एवं मत्स पालन दोनों तरह से प्रयोग कर सकते है. इन दिनो सिरोंचा तहसिल मे मौजूद नदी एवं तालाबों में अनेक तरह के मछलियों के प्रजातियाँ पायी जाती है। जिनमे प्रमुख रुप से रोहू, कतला, मिरिगल, बोध, झींगा, सईप्रिन्स प्रजाति शामिल है।

इनमे से बोध प्रजाति को छोडकर बाकी प्रजातियाँ तालाबों मे पाले जा सकने की जानकारी मत्स पालन  क्षेत्र के जानकारों ने बतायी है. साथ ही उन्होने बताया है की आज भी ग्रामीण क्षेत्रों  विशेषकर नदी किनारो के गांवों मे छोटे नावों (ढोन्गों) के सहायता से ग्रामीण मत्स आखेट करते है। कुछ उन्हे बेच कर आय अर्जित करते है. बाकी अपने खाने का शौक को पुरा करते है.

योजनाओं का लाभ ले-वैद्य

सरकार द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना अंतर्गत लाभार्थियों को विभीन्न सुविधाएं प्रधान कर रही है. उक्त योजनाओं का लाभ लेने पर मत्स्य पालन एक अच्छा व्यवसाय बन सकता है. इससे लाभार्थियों की उन्नती होगी, इसलिए सरकारी की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ ले, ऐसा आह्वान सहाय्यक आयुक्त मत्स्य व्यवसाय प्र. जु. वैद्य ने किया है.