पांच वर्षो की तुलना में जलस्तर में वृध्दि, भूजल सर्वेक्षण अंत में 0.37 मिटर बढ़ोत्तरी

    गड़चिरोली. प्रति वर्ष ग्रीष्मकाल के दिनों में ग्रामीण क्षेत्र में पानी की भीषण समस्या निर्माण होती है. इस दृष्टि से जिलास्तर से अनेक उपाययोजना की जाती है. जिले में पिछले 5 वर्षो की तुलना में इस वर्ष भूजल सर्वेक्षण व विकास यंत्रणा द्वारा किए गए मार्च अंत तक जलस्तर जांच के अंत में जिले में जलस्तर 0.37 मिटर से बढऩे की बात स्पष्ट हुई है. 

    बारह माह बहनेवाली नदियों के जिले के रूप में गड़चिरोली की पहचान है. लेकिन प्रशासन द्वारा पानी रोकने का नियोजन न होने से प्रतिवर्ष पानी बह जाता है. जिसका खामियाजा ग्रीष्मकाल में अनेक क्षेत्र में पानी की समस्या गंभीर होती है. विशेषत: ग्रामीण व दुर्गम क्षेत्र में सर्वाधिक पानी की भीषण समस्या निर्माण होती है. अनेक जगहों पर तो ग्रामीणों को पिने के पानी के लिये भटकना पड़ता है. प्रशासन द्वारा उपाययोजनाएं किए जाने के बाद भी जलस्तर में कटौती होने से उपाययोजना भी कम पड़ रही है.

    इस दौरान पिछले वर्ष बरसात के दिनों में औसत से अधिक बारिश हुई थी. जिससे जलस्तर बढ़ गया है. इस दौरान भुजल सर्वेक्षण विभाग ने मार्ग अंत तक जिले के 112 कुओं में जलस्तर का सर्वेक्षण किया. जिसके बाद गत पांच वर्षो का जलस्तर व शुरू वर्ष में मार्च तक जलस्तर जांच की गई. जिसमें जलस्तर 0.37 मिटर से बढ़ा है. जलस्तर बढऩे पर भी बारह माह बहनेवाली नदियों के जिले में यह स्थिति गंभीर होने की बात कही जा रही है. 

    कुरखेड़ा, कोरची, देसाईगंज में जलसंकट

    भुजल सर्वेक्षण व विकास यंत्रणा ने जिले के गांवों के सार्वजनिक कुओं में जलस्तर की जांच करने पर जिले की देसाईगंज, कुरखेड़ा और कोरची तहसील में पिछले 5 वर्षो की तुलना में जलस्तर कम होने की सामने आयी है. देसाईगंज तहसील में सर्वेक्षण के अंत में जलस्तर में 0.20 मिटर कमी पायी गई. कुरखेड़ा 0.26 तो कोरची 0.25 मिटर की कमी पायी गई है. जिससे इन तहसीलों के ग्रामीण क्षेत्र में पानी की समस्या गंभीर होते दिखाई दे रही है. 

    जिले के 153 हैन्डपंप बंद 

    जिले की बारह तहसीलों में कुल 10 हजार 484 हैन्डपंप है. इनमेंसे 532 हैन्डपंप अब तक दूरूस्त किए गए. वहीं करीब 153 हैन्डपंप बंद अवस्था में है. वर्तमान स्थिति में ग्रीष्मकाल के दिन शुरू होकर सुरज आग उगल रहा है. लेकिन अनेक हैन्डपंप बंद होने के कारण नागरिकों को पानी के लिये भटकना पड़ रहा है. जिससे संबंधित ग्राम पंचायत अपने कार्यक्षेत्र के हैन्डपंपों की मरम्मत करने की आवश्यकता है.