प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

    • उपवनसंरक्षक डा. कुमारस्वामी ने दी जानकारी 
    •  69 नुकसानग्रस्त किसानों  को 8 लाख की मदद 

    गड़चिरोली. छत्तीसगड़ राज्य से करीब एक माह पूर्व जिले में दाखिल हुएं जंगली हाथियों के झुंड का धानोरा वनपिरक्षेत्र अंतर्गत मुरुमगाव परिक्षेत्र के जंगल परिसर में बसेरा शुय है. इन हाथियों पर वनविभाग के दस्ते द्वारा निरंतर नजर रखी जा रही है. संचार के दौरान हाथियों के झुंड ने सैंकड़ों हेक्टेयर फसलों का नुकसान किया है.

    इसमें से 69 मामलों में नुकसानग्रस्त किसानों को 8 लाख रूपयों तक की वित्तीय सहायता की गई हे. मानव-हाथियों का संघर्ष टालने के लिए वर्तमान स्थिती में इन ‘हाथियों की  मॉनिटरींग’ यह एकमात्र विकल्प होकर नागरिकों को इस संदर्भ में सूचना दिए जाने की जानकारी गड़चिरोली वनवृत्त के उपवनसंरक्षक डा. कुमारस्वामी ने दी है. 

    स्थानीय उपवनसंरक्षक कार्यालय में संपन्न हुए पत्रपरिषद में जानकारी देते हुए जानकारी देते हुए उपवनसंरक्षक डा. कुमारस्वामी ने बताया कि, माहभर पूर्व जिले में दाखिल हुए 18 से 22 की संख्या में होनेवाले हाथियों के झुंड का पश्चिम मुरुमगाव, उत्तर धानोरा, दक्षिण धानोरा वनपरिक्षेत्र के 1000 से 1200 हेक्टेयर जंगल क्षेत्र में विचरण शुरू है.

    उक्त झुंड दिनभर जंगल में घुमकर बांस, पेड के पत्ते, पेड की छाल व अन्य पदार्थ खाकर घुमते है. तथा शाम के दौरान उक्त झुंड़ घने जंगल से बाहर आकर छोटे तालाब, वनतालाब में आते है. सुबह तक तालाबों से सटे धान फसलों का नुकसान करते हुए सुबह 4.30 से 6 बजे तक घने जंगल में घुसने की बात निरीक्षण से स्पष्ट हुई है. ऐसी जानकारी डा. कुमारस्वामी ने इस समय कहीं. 

    वनविभाग द्वारा की जा रही उपाययोजना 

    गड़चिरोली वनविभाग की ओरसे वनकर्मचारी, ग्रामीण व हाथियों के संरक्षण के लिए विभिन्न उपाययोजना किए जा रहे है. इसमें क्षेत्रीय कर्मचारियों में जागृकता व संवेदनशिलता बढ़ाने के लिए प्रशिक्षण व सभाओं का आयोजन, हाथियों के संदर्भ में दिवार पत्रक, हैन्डबील, पॉवर पाईट प्रेझेंटेशन के माध्यम से कर्मचारियों को जानकारी, सुरक्षित दूरी रखकर हाथियों के हलचल पर नजर रखकर जानकारी संकलित करना, रात के दौरान हाथियों का झुंड जिन गांव के पास है, वहां के कर्मचारी निवास में रखकर ग्रामीणों को मदद, ग्रामीणों को पथदिप, ब्लैंकेट, मशाल आदि का वितरण तथा हाथियों के संचार परिसर में फटाके, मशाल, ढोल आदि की व्यवस्था की गई है. 

    अबतक 22 मकानों का नुकसान 

    इन हाथियों के विचरण के दौरान खेत फसलों के नुकसान के पंचनामे किए गए है. नुकसान मुआवजा मंजूर किया गया है. जिसके तहत 10 नवंबर तक 69 मामलों में 7 लाख 97 हजार 805 रूपयों की वित्तीय सहायता संबंधित खेत मालिकों को दिया गया.  वहीं संबंधित झुंड ने 15 नवंबर को अर्जूनी में किए गए 11 मकानों के नुकसान के साथ अबतक कुल 22 मकानों का नुकसान हुआ है. इसमें 20 अक्टूंबर को मुंजालगोंदी गांव के 3 मकान, 4 नवंबर को भोजगाटा गांव के 5 मकान, 10 नवंबर को फुलकोडो गांव के 3 मकानों का समावेश है. 

    अर्जूनी में 11 मकानों को पहुंचायी क्षति 

    15 नवंबर को देररात के दौरान हाथियों के झुंड ने अर्जूनी गांव के 11 घरों को नुकसान पहुचाने की जानकारी वनविभाग ने दी है. इसमें 4 मकान पूर्ण रूप से ध्वस्त हुए है. वहीं 7 मकानों को कुछ क्षति पहुंची है. संबंधित नुकसान की रिपेार्ट सरकारी स्तर पर भेजी गई है, जल्द ही मुआवजा मिलने की बात डा. कुमारस्वामी ने इस समय कहीं. फिलहाल उक्त हाथी आज दोपहर के दौरान फिर से कवडीकसा, कन्हालटोला परिसर में विचरण करने की जानकारी प्राप्त हुई है. 

    हाथियों का अधिवास सुखारने की जरूरत 

    हाथियों का अधिवास क्षेत्र ग्रामीणों के सुरक्षितता के लिए आगामी उपाययोजना करना आवश्यक हुआ है. उस दृष्टि से वनविभाग ने उपाययोजना सूचित की है. जिसमें दावानल से हाथियों का नुकसान टालने दावानल पर नियंत्रण करना, धुपकाले में जंगल में पानी की कमी न हो, इसके लिए वनतालाब, बोअरवेल खुदाई कर या सौरउर्जा पर चलनेवाले पंप लगाकर पानी कीसुविधा करना, कृत्रिम तालाब, निर्माण के कार्य प्रस्तावित करना.

    कोल्हापूरी बासंध, वनराई बांध, जंगल से सटे खते मं सौर कंपाऊंड लगाना, गांव सिमा पर हाथि प्रतिबंधक चर खुदाई करना, महावत की भर्ती करना, कमलापूर हाथी कैम्प के प्रशिक्षित महावत की ओर से नए उम्मीदवारों को प्रशिक्षण देकर प्रशिक्षित करना, हर गांव में हाथी मित्र का दल तैयार करना.

    हाथी निरीक्षण दस्ते तैयार कर देखरेख रखना, पशुवैद्यकों की नियुक्ती करना, ‘रॅपिड रेस्क्यू टीम’ तैयार कर अीम के लिए नए वाहन व 4 ‘व्हील ड्राईव्ह’ होनेवाले वाहन खरीदी करना, कॅमेरा ट्रॅप, ड्रोन कैमेरा, स्मार्ट स्टिक, तंबु, मचाणी, दुर्बीण, टॉर्च, कॅमेरा, मेगा फोन, अनैडर, पथदिप, रेडीओ कॉलर, इन्फ्ररेड सेंन्सर आदि साहित्य खरीदी करने की आवश्यकता होने की बात वनविभाग ने कहीं है.