Representational Pic
Representational Pic

    • अल्प दाम वृध्दि से किसानों में निराशा

    गड़चिरोली. हाल ही में केंद्र सरकार ने खरीफ सत्र 2022-23  के लिए विभिन्न फसलों के अतिरिक्त समर्थन मूल्य घोषित किया है.  धान के दाम में केवल 100 रु. दाम बढ़ाने की बात घोषित की गई है. उक्त दामवृध्दि आगामी खरीफ सत्र में लागू की जाएगी. लेकिन अल्प दामवृध्दि से सरकार ने किसानों को केवल निराशा ही देने की बात कही जा रही है.

    केंद्र सरकार ने हाल ही में मंत्रीमंडल के बैठक में विभिन्न फसलों के समर्थन मूल्य में बढ़ोत्तरी की है. जिसमें धान फसल का भी समावेश है. इससे पहले धान का समर्थन मूल्य 1,940 रु. प्रति क्विंटल था. वह  बढ़ाकर 2040 रु. किया गया है. उत्पादन खर्च की तुलना में यह दाम अल्प है. इसमें भी सरकार ने धान का बोसन बंद करने से किसानों के धान को दाम 2,500 से 2600 रु. करने की आस किसानों द्वारा लगाई जा रही थी. लेकिन किसानों की झोली में निराशा आ गयी.

    इस खरीफ सत्र में किसानों से विभिन्न फसलों पर दामवृध्दि संदर्भ में बड़ी आस होते हुए भी केंद्र सरकार द्वारा अल्प दाम वृध्दि किए जाने के कारण किसानों का उत्पादन खर्च निकलना भी मुश्किल होने की बात कही जा रही है. जिससे हमेश की तरह इस खरीप सत्र में भी किसानों को ठगाए जाने की भावना व्यक्त की जा रही है. 

     अन्य फसलों पर सुधारित दामवृध्दि

    केंद्र सरकार ने हाल ही में 2022-23 खरीफ फसलों के लिए घोषित किए समर्थन मूल्य  में (एमएसपी) बढ़ोतरी  की है जिनमें से धान के साथ सोयाबीन, कपास, ज्वारी, मक्का, मूंग, उड़द, बाजरी, सूर्यफुल आदि फसलों का समावेश है. लेकिन इनमें भी अल्प दाम से वृध्दि होने से विभिन्न फसलों का उत्पादन लेने वाले किसानों में निराशा छायी हुई है. इसमें प्रमुखता से ज्वारी को 232 रु.  दामवृध्दि की गई है. वहीं अब 2,970 रु. क्विंटल खरीदी की जाएगी. वहीं मक्के को केवल 92 रूपये, तुअर को 300 रु., मूंग 480 रु., सोयाबिन 350 रु. और कपास में 354 रु. से दामवृध्दि की गई है. 

    खरीदी केंद्रों के सामने ट्रैक्टरों की कतारें

    जिले में ग्रीष्मकालीन धान खरीदी के लिए इस वर्ष केवल 85 हजार क्विंटल धान खरीदी का लक्ष्य दिया गया था. वहीं अंतिम अवधि 15 जून तक रखी गयी है. लेकिन जिले के अनेक जगह पर  धान खरीदी केंद्र देरी से शुरू होने के कारण किसानों के सामने प्रश्न निर्माण हो गया है. पहले ही लक्ष्य की मर्यादा होकर इसमें धान खरीदी की अवधि कम होने से धान बेचने के लिए पंजीयन करने वाले अनेक किसान धान बिक्री से वंचित है. धान बेचने को कुछ ही दिन शेष होने के कारण अनेक सोसाइटी  के सामने धान से भरे ट्रैक्टरों की कतारें लगी हुई है.