Potholes on Maregaon Road

  • जिले के विकास लगी अनियमितता की दीमक 

आलापल्ली. आदिवासी बहुल, दुर्गम व नक्सल प्रभावित जिले के रूप में गडचिरोली जिला जाना जाता है, जिसके मद्देनजर जिला विकास के नाम पर सरकार द्वारा करोडों रूपयों का निधी दिया जाता है. सडकों को विकास का आईना कहां जाता है. जिले में बदहाल हुई सडकों के मरम्मत के लिए करोडों रूपयों का निधी मंजूर किया गया है. जिसके तहत जिले में सडकों के निर्माण, मरम्मत कार्य जारी है. मात्र अहेरी उपविभाग में सडकों के मरम्मत के नाम पर केवल मलमपट्टी की जा रही है.

घटिया स्तर की सामग्री का उपयोग करते हुए घटिया स्तर के सडक मरम्मत का कार्य अहेरी उपविभाग में बदस्तूर जारी है. मात्र ऐसे घटियां निर्माणकार्य की ओर संबंधित विभाग आंखे बंद किए नजर आ रहा है. सरकार के तिजोरी को चुना लगाती यह सडक मरम्मत की मलपमट्टी दिखाई दे रही है. संबंधित विभाग के अधिकारियों से इस संदर्भ पुछने जाएं तो वे संबंधित ठेकेदार पर जिम्मा ढकेल चुप्पी साधने का कार्य कर रहे है, इससे ऐसा लग रहा मानों उक्त निर्माणकार्य पर देखरेख का ही जिम्मा संबंधित ठेकेदार उठा रहा हो. जिससे जिले के विकास को अनियमितता की दीमक लगने की बात कहीं जा रही है. 

कोलमिक्स में बनाया जा रहा डामर 

अहेरी शहर में प्राणहिता पुलिस उपमुख्यालय ये अहेरी शहर तक सडक मरम्मत का कार्य जारी है. डामरीकृत सडकों के निर्माण का दर्जायुक्त कार्य करने के लिए उच्चस्तरीय मशिनों का उपयोग होना आवश्यक है. मात्र यहां कोलमिक्स में ही गिट्टी व डामर गरम करने का कार्य किया जा रहा है. ऐसे में कोलमिक्स में उचित तापमान नहीं मिलने से डामर उचित रूप से गर्म नहीं होता है. जिससे घटिया स्तर की सडकों का निर्माणकार्य होने की बात साफ दिखाई दे रही है.

ऐसे घटिया सडके अल्प कालावधि में उखड जाती है. सडक निर्माण पर देखरेख रखने का जिम्मा लोकनिर्माण विभाग का होता है. इस संदर्भ में लोनिवि के कनिष्ठ अभियंता पोहाणे से पुछने पर उन्होने साफ तोर से ठेकेदार से बात कहने की बात कहीं. जिससे ऐसा लग रहा है कि, सडक निर्माण के देखरेख का कार्य सरकारी अभियंता करते है, या वह भी ठेकेदार पर ही सौंपा गया हो, ऐसी निति लोनिवि की दिखाई पड रही है. 

वरीष्ठों का दौरा हो तो सामग्री गायब

सडक निर्माण का यह फर्जिवाडा बेधडक जारी है. सडक निर्माण के ऐसे अनियमित कार्य के दौरान कभी वरीष्ठ अधिकारी या क्वालिटी कंट्रोलर का दौरा रहा तो झटपट ठेकेदार उस दिन संबंधित जगह से कोलमिक्स व अन्य सामग्री हटाई जाती है. जिससे मानों उन्हे लगे उचित रूप से कार्य चल रहा हो, उनके जाने के पश्चात दुसरे दिन फिर से कोलमिक्स वापिस लाई जाती है, और ऐसे घटिया मरम्मत का कार्य शुरू हो जाता है. ऐसे कार्य शुरू रहने से सडकों की दर्जोन्नती कैसे होगी, ऐसा सवाल उठाया जा रहा है. इस ओर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी चुप्पी साधे खडे है. दिनदहाडे सडकों पर यह ऐसे अनियमित कार्य जारी है. मात्र संबंधित विभाग की अनदेखी समझ से परे है. 

सडकों की हालत जैसे थे

कोलमिक्स के माध्यम से गिट्टी व डामर तैयार किए जाने से उचित तापमान नहीं मिलने से डामर की पकड पर नहीं बैठती है. जिससे सडकों का निर्माण निम्नस्तर का होता है. ऐसे में सडके जगह जगह से उखड जाती है. अल्प समय में ही सडकों की हालत जैसे थे, होती है. इसी कारणवश प्रति वर्ष सडकों का निर्माणकार्य किया जाता है. इस तरह के अनियमितता का कार्य जिले में धडल्ले से जारी है. मात्र इसपर रोक कब लगेगी, इस सवाल कभी न सुलझनेवाला सवाल बना दिखाई दे रहा है. 

कोममिक्स की अनुमति-मेश्राम

उक्त कार्य संदर्भ में आलापल्ली के कार्यकारी अभियंता मेश्राम इनके संपर्क करने पर उन्होने बताया कि, वरीष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा कर उक्त कार्य की कोलमिक्स पर कार्य करने की अनुमति दी गई है. नियमों के तहत ही कार्य जारी होने की बात उन्होने कहीं.