वेतन 13 हजार, मगर मिलते है 7 हजार; ग्रांप के कम्प्युटर ऑपरेटरों के सौतेला व्यवहार

    गड़चिरोली. ग्राम पंचायत स्तर पर विभिन्न सरकारी कार्य समेत ग्रामीणों के कार्य करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानेवाले ग्रापं के कॅम्प्युटर ऑपरेटर को मिलेनवाले अल्प वेतन के चलते पुरी तरह त्रस्त हो गये है. ग्रापं में कार्यरत कम्प्युटर ऑपरेटरों को 13 हजार रूपये वेतन होते हुए भी उनके खाते में केवल 7 हजार रूपये जमा किए जाते है.  जिससे कम्प्युटर ऑपरेटरों की वित्तीय लुट होने होने की बात कही जा रही है. वहीं वेतन के मामले में इन कर्मचारियों  के साथ सौतेला व्यवहार करने की बात भी कही जा रही है. 

     गड़चिरोली जिले में कुल 457 ग्राम पंचायत होकर करीब 400 से अधिक पुरूष व महिला कम्प्युटर ऑपरेटर कार्यरत है. सरकार ने सेवा केंद्र अंतर्गत सीएसएसी एसपीवी इस कंपनी के साथ करार कर ग्राम पंचायत स्तर पर कम्प्युटर ऑपरेटरों की नियुक्ति की है. लेकिन कंपनी द्वारा सरकार के नियमों को ताक पर रखकर मानधन संदर्भ में कर्मचारियों को वित्तीय व मानसिक रूप से त्रस्त करना शुरू करने का मामला सामने आया है.

    उक्त कंपनी द्वारा कम्प्युटर ऑपरेटरों का वेतन निकाला जाता है. लेकिन उनका मूल वेतन 13 हजार 300 रूपये होने के बाद भी उनके खाते में 6 हजार 940 जमा किए जा रहे है. इसमें भी 40 रूपये टीडीएस के नाम पर काटा जा रहा है. आधा वेतन देकर शेष वेतन रिमटोनर के नाम पर स्टेशनरी खर्च के रूप में कंपनी द्वारा काटा जा रहा है. रिमटोनर खर्च केवल 500 से 700 रूपये होते हुएभी शेष रकम जाती कहां है? ऐसा सवाल कम्प्युटर ऑपरेटरों द्वारा पुछा जा रहा है. 

    केवल नामशेष है सरकारी सुविधा 

    ग्राम पंचायत स्तर पर महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभानेवाले कम्प्युटर ऑपरेटरों को किसी भी तरह की सुविधा नहीं दिए जाने की जानकारी मिली है. उन्हें किसी भी तरह की जॉब सेक्युरिटी नहीं, स्वास्थ्य बिमा नहीं, उनके स्वास्थ्य की जिम्मेदारी नहीं ली जाती. कोरोना कालावधि में अपनी जान दावं पर लगाकर सरकार द्वारा दी गई जिम्मेदारी निभाई गयी है. इसमें कुछ कप्युटर ऑपरेटर कोरोना बली भी चढ़े है. ऐसा होते हुए भी उन्हें वित्तीय संकट से गुजरना पड़ रहा है. 

    मांगों की ओर निरंतर अनदेखी

    कम्प्युटर आपरेटरों के वेतन में वृध्दि कर उन्हें विभिन्न सुविधाओंं का लाभ देने, यावलकर समिति के शिफारस नुसार आकृतीबंद से पदनिर्मिति कर कम्प्युटर रिचालकों को कायम करने, आईटी महामंडल में कम्प्युटर ऑपरेटरों का समावेश करने, जिप के संचित निधि से ऑपरेटरों को 15 हजार रूपये मानधन देने, जॉब सिक्युरिटी देकर नियुक्ति पत्र देने आदि मांगों को कम्प्युटर  ऑपरेटरों ने अनेक बार सरकार का ध्यानाकर्षण कराया. लेकिन मांगों की ओर निरंतर अनदेखी की जा रही है.

    वेतन बकाया से समस्या में वृद्धी 

    पहले ही ग्रामपंचायत स्तर पर कार्यरत संगणक परिचालकों को अल्प मानधन दिया जा रहा है. इसमें भी उक्त मानधन नियमित न होने से संगणक परिचालकों को परिवार का जीवनयापन करते समय तारों पर की कसरत करनी पड़ रही है. हर माह में वेतन न देते हुए 5 से 6 माह का वेतन बकाया रखते हुए एक माह का मानधन दिया जाता है. यह समस्या विगत अनेक कालावधि से कायम होने से उक्त कंपनी को मानधन प्रक्रिया से निकालकर थेट संगणक परिचालकों के खाते में सरकार मानधन डाले, ऐसी मांग संगणक परिचालकों की ओर से की जा रही है.