फिर किसानों के खेतों में घुसा बाढ़ का पानी, मिर्च, कपास उत्पादन किसान हुए त्रस्त

    गड़चिरोली. गोदावरी, प्राणहिता नदी समीपस्थ सिंचाई सुविधा उपलब्ध होने से नदी तट के किसान मिर्च, कपास का बड़े पैमाने पर उत्पादन लेते है. मात्र इस वर्ष सिरोंचा तहसील के दोनों नदियों पर बार-बार बाढ़ आने से यह फसल पानी में जा रहे है. एक माह की कालावधि में तिसरी बार बाढ़ की स्थिति निर्माण होने से मिर्च, कपास उत्पादक किसान पुरी तरह हतबल हो गये थे.

    गुलाबी तुफान के चलते महाराष्ट्र समेत राज्य के विभिन्न जगह पर हुई मुसलाधार बारिश से तथा बड़े पैमाने पर डैम्प का पानी छोड़े जाने के कारण सिरोंचा तहसील की मुख्य नदी गोदावरी व प्राणहिता नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया है. इस बॅक वॉटर के चलते नदी तट के मिर्च व कपास यह फसल पानी के निचे आकर खराब हो रहे है. जिससे किसानों का भारी वित्तीय नुकसान हुआ है. बताया जा रहा है कि, लगातार तिसरी बार फसल पानी के निचे आ गये है.

    55 हजार की वित्तीय हानि

    पिछले तीनों में हुई तुफानी बारिश के चलते तहसील में घरों की पतझड़ व मवेशी बाढ़ में बहने की घटना घटी है. इसमें 55 हजार रूपयों की वित्तीय आनी हुई है. रायपेठा/पोचमपल्ली निवासी मदनय्या मलय्या येरोला नामक पशुपालक की एक गाय बाढ़ में बहने से उनका 30 हजार रूपयों का नुकसान  हुआ है. वहीं शंकर आत्राम व पोचम आतकुरी के घरों का अशंत: पतझड होने से आत्राम का 10 हजार और आतकुरी का 8 हजार रूपयों का नुकसान हुआ है. वहीं नारायणपुर में कोंड्रा सारली मलया के घर की पतझड़ होने से 7 हजार रूपयों का नुकसान हुआ है.

    स्थिति सामान्य होने पर करेंगे सर्वेक्षण: सय्यद

    सिरोंचा के तहसीलदार एच. एस. सय्यद ने बताया कि, गोदावरी नदी में आई बाढ़ तथा प्राणहिता नदी में पानी का विसर्ग बढऩे से बॅकवॉटर से नदी तट के किसानों में पानी घुस गया है. जिससे मिर्च और कपास उत्पादक किसानों का नुकसान हुआ है. स्थिति सामान्य होने के बाद नुकसान हुए खेती का सर्वेक्षण कर रिपोर्ट सरकार के पास भिजवायी जाएगी. वहीं नुकसानग्रस्त किसानों का मुआवजा दिलाने के लिये प्रयास किया जाएगा. ऐसी बात उन्होंने कही.