87 गांवों को बाढ़ से खतरा, 6 नदियों का पानी गांवों में घूसने की आशंका

    गोंदिया. जिले में छोटी बड़ी मिलाकर 6 नदियां है. इन नदियों को जीवनदायिनी के रूप में पहचाना जाता है लेकिन बारिश के दिनों में सभी नदियां रौद्र रूप धारण करती है. जिससे इन नदी के किनारे वाले 87 गांवों के नागरिकों को बारिश में जान हथेली पर रखकर जीवन निर्वाह करना पड़ता है.

    हर वर्ष अनेक गांवों में पानी घूसता है लेकिन शुरू वर्ष में पर्याप्त बारिश नहीं होने से इन गांवों के नागरिकों का फिलहाल खतरा टल गया है. जिले में पिछले 8 दिनों से बारिश का पुनरागमन हुआ है. नदियां सूखी हैं फिर भी नाले भरकर बह रहे है. छोटे बड़े नालों का पानी वैनगंगा, गाढवी, बाघ, चुलबंद, बहेला व पांगोली आदि नदियों को जाकर मिलता है. गोंदिया जिले में सबसे बड़ी नदी वैनगंगा है. इन नदियों के पात्र गहरे होने से नदी का पानी सहज रूप से घरों में नहीं घुसता.

    इसके अलावा अन्य नदियां गांव जिले के नागरिकों के लिए बारिश के दिनों में बाढ़ आने पर काल बन जाती है. सालेकसा, आमगांव और गोंदिया तहसील के अनेक गांव बाघ और पांगोली इन दो नदियों से आने वाली बाढ़ से प्रभावित होते है. वहीं गाढ़वी, चुलबंद, बहेला इन नदियों का पानी सड़क अर्जुनी, अर्जुनी मोरगांव इन तहसीलों के गांवों में घुसता है. बाघ, पांगोली, चुलबंद, बहेला व गाढ़वी इन नदियों का पानी वैनगंगा नदी में मिलता है. वैनगंगा नदी मध्य प्रदेश से बहकर आती है.

    इसपर मध्यप्रदेश के जिला सिवनी में बने संजय सरोवर में जलस्तर बढने पर सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासन सरोवर का पानी नदी में प्रवाहित करता है. फलस्वरूप बॅक वाटर से गोंदिया जिले की नदियों में पानी का स्तर अचानक बढ़कर नदियों का पानी गांवों में घूसता है. जिले में बाढ़ के पानी से प्रभावित होने वाले गांवों की संख्या 87 है. इन गांवों के नागरिकों को बाढ़ के पानी से और जनहानि टाली जाए इसके लिए जिला प्रशासन जिले में प्रशिक्षण, जनजागृति कार्यशाला क्रियान्वित कर रहा है. पारंपारिक साधन व घर पर उपलब्ध वस्तुओं का प्रयोग कर आपत्ति का सामना करने में मदद मिलती है. इस पर जनजागृति कार्यक्रम के माध्यम से मार्गदर्शन किया जाता है.

    बचाव की  साधन व सामग्री  नहीं होती उपलब्ध 

    जिले मे बाढ़ की परिस्थिति से बचाव करने के लिए औजार, स्वयंचलित स्टीमर, कटर, सेंक्सरूलर, सॉ चैन, सॉ बेल्ट कटर आदि सामग्री  का उपयोग होता है. जिला प्रशासन बारिश और बाढ़ के पानी से बचाव करने के लिए नदी के किनारे वाले नागरिकों को हर वर्ष प्रशिक्षण देता है.

    लेकिन इस प्रशिक्षण के बाद स्थानीय नागरिकों को किसी भी प्रकार के बचाव के काम आने वाले साधन व सामग्री  उपलब्ध नहीं कराई जाती  जिससे नागरिकों को बाढ़ की स्थिति में स्वयं  व परिवार का बचाव कैसे करे ऐसा सवाल उपस्थित किया जा रहा है. इस समस्या को तत्काल दूर करने की जरूरत है.

    इन गांवों पर मंढराता है खतरा

    जिले में बाघ और पांगोली इन दो नदियों से आनेवाली बाढ़ के पानी से आमगांव, गोरेगांव, सालेकसा और गोंदिया तहसील के गांव प्रभावित होते है. वहीं गाढ़वी, चुलबंद, बहेला इन नदियों का पानी सड़क अर्जुनी, अर्जुनी मोरगांव इन तहसीलों के गांवों में घूसता है. गोंदिया तहसील के काटी, कासा, बिरसोला सहित दर्जनों गांवों पर बाढ़ के पानी का असर पड़ता है.