Agitation of tribal resource deprived students in front of project office regarding various problems

    देवरी. गोंडवाना दर्शन संगठन, आदिवासी सामाजिक संगठन, आदिवासी विद्यार्थी संघ व बिरसा ब्रिगेड द्वारा जिले के आदिवासी छात्रावास व नामांकित स्कूल की दयनीय अवस्था को लेकर जिला प्रकल्प कार्यालय देवरी के सामने धरणा आंदोलन किया गया. इसमें कक्षा 9 वीं से 12वीं तक की शिक्षा ले रहे 300 विद्यार्थियों का समावेश है.

    जानकारी के अनुसार आदिवासी समाज के उत्थान के लिए 1972 में समाज कल्याण विभाग अंतर्गत आदिवासी विकास संचालनालय की स्थापना की गई. पश्चात सन 1976 में आदिवासी विकास आयुक्तालय व 22 अप्रेल 1983 में स्वतंत्र आदिवासी विकास विभाग की स्थापना की गई. 1984 से आदिवासी विकास विभाग स्वतंत्र रूप से कार्यरत है. इसकी मजबूतीकरण के लिए 1992 में संचालनालय को आदिवासी विकास आयुक्तालय में विलिन किया गया.

    आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत ठाणे, नाशिक, अमरावती व नागपुर में 4 अपर आयुक्त तथा 29 एकात्मिक आदिवासी विकास प्रकल्प कार्यालयों के माध्यम से पिछड़ा वर्गीय कल्याणकारी राज्य व केंद्र शासन के योजनाओं को अमल में लाया जाता है. जिसके तहत सामाजिक कल्याण, आर्थिक कल्याण, शिक्षा में प्रगती, सामाजिक न्याय, महिला व बाल विकास, स्वास्थ्य, पोषण व रोजगार आदि सुविधाएं दी जाती है. लेकिन पिछले 35 वर्षों से आदिवासी साधन वंचित विद्यार्थियों के लिए अब तक स्वतंत्र शासकीय इमारत का निर्माण नही हुआ है. अब भी इन विद्यार्थियों को किराए की इमारत में ही भेड़, बकरियों की तरह रखा जाता है.

    इन विद्यार्थियों के लिए स्वतंत्र शासकीय वाचनालय व सामाजिक भवन भी नही है. ऐसी अनेक मांगों को लेकर ये विद्यार्थी आंदोलन कर रहे है. इन मांगों में आदिवासी लड़के व लड़कियों के लिए 1 हजार बेड़ की क्षमता वाला शासकीय छात्रावास जिला स्तर पर निर्माण करने, आदिवासी समाज के लिए 25 एकड़ सामाजिक भूमि आवंटित करने, शहर के बीच क्षेत्रिय सामुहिक 500 विद्यार्थियों के बैठने की व्यवस्था हो ऐसा वाचनालय बनाने, स्पर्धा परीक्षा के लिए प्रशिक्षण केंद्र तैयार करने, सुशिक्षित बेरोजगार आदिवासी विद्यार्थियों के लिए रोजागार उपलब्ध कराने, नामांकित प्रोग्रेसिव्ह स्कूल की मान्यता स्थाई रूप से रद‍्द करने, आदिवासी विद्यार्थियों की शिक्षा व परीक्षाओं की उत्तम सुविधा उपलब्ध कराने, प्रकल्प अधिकारी कार्यालय देवरी पर तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने, संबंधित जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारियों पर भी कार्रवाई करने, प्रोग्रेसिव्ह स्कूल से संबंधित जिम्मेदार कर्मचारी पर तत्काल  कार्रवाई कर अनुसूचित जाति व जनजाति 1989 के कानून अंतर्गत संस्थापक व संबंधित कर्मचारी पर मामला दर्ज करने, छात्रावास के विद्यार्थियों का मासिक भत्ता बढ़ाकर 2500 रु. करने, छात्रावास की प्रवेश प्रक्रिया ऑन लाइन बंद कर ऑफलाइन करने, विद्यापीठ द्वारा शैक्षणिक सत्र बढ़ाए जाने पर विद्यार्थियों को अतिरिक्त डीबीटी देने, विद्यार्थियों की रुकी हुई छात्रवृत्ति तत्काल उनके खाते में जमा करने, छात्रावास की प्रवेश क्षमता बढ़ाने, लड़कियों के छात्रावास में बायोमेट्रीक पैड नष्ट करने की मशीन तत्काल उपलब्ध कराने, सभी आश्रम शाला व छात्रावासों में प्रति 15 दिनों में वैद्यकीय जांच की सुविधा उपलब्ध कराने, आदिवासी बहुल क्षेत्र की 20 से कम पटसंख्या वाली शालाओं को बंद न करने, जिले के सभी छात्रावास व आश्रम शालाओं की उच्च स्तरीय जांच के लिए समिति का गठन करने, प्रलंबित वन हक दावों का तत्काल निपटारा करने, नागलडोह में हाथियों के उत्पात से हुई नुकसान भरपाई देने, प्रलंबित 12 हजार 500 रिक्त पदों की तत्काल भर्ती करने, शासकीय आईटीआई प्रशिक्षण केंद्र देवरी छात्रावास के विद्यार्थियों का मासिक निर्वाह भत्ता तत्काल देने आदि मांगों का समावेश है.

    ज्ञापन की प्रतिलिपी राज्यपाल, मुख्यमंत्री, आदिवासी विकास विभाग मंत्री, अपर मुख्य सचिव वित्त विभाग मुंबई, शालेय शिक्षा विभाग प्रधान सचिव, आदिवासी विकास विभाग आयुक्त नाशिक को भेजी गई है. ज्ञापन में कहा गया है कि मांगों को लिखित रूप में मान्यता नही दी गई तो सभी विद्यार्थी आदिवासी समाज प्रकल्प कार्यालय देवरी से अपर आयुक्त कार्यालय नागपुर तक का पैदल मार्च करेगी. इस दौरान कोई भी जीवित हानि होने पर इसके लिए संपूर्ण आदिवासी विकास विभाग, आदिवासी मंत्री व राज्य शासन जिम्मेदार रहेगा. 

    इस संबंध में आदिवासी विकास विभाग प्रकल्प अधिकारी विकास राचेलवार ने बताया कि गोंदिया शहर में जिलाधीश कार्यालय के पीछे शासकीय छात्रावास बनाने का प्रस्ताव शासन की ओर भेजा गया है लेकिन यह परिसर ब्लू लाइन परिसर में आने की वजह से शासन की ओर से उसे मंजूरी नही दी गई है. फिर भी अन्य प्रस्ताव भी शासन को भेजे गए है. आंदोलन कर रहे विद्यार्थियों से जिला आदिवासी प्रकल्प कार्यालय में सहायक प्रकल्प अधिकारी हरिशचंद्र सयाम ने बैठक लेकर उनकी सभी मांगों पर जल्द ही शासन स्तर पर कार्रवाई किए जाने का लिखित आश्वासन दिया गया है.

    नामांकित प्रोग्रेसिव्ह स्कूल गोंदिया में 22 जनवरी को सहायक प्रकल्प अधिकारी आर.पी.मिश्रा की  अध्यक्षता में आदिवासी पालकों की सभा ली गई जिसमें पालकों ने शाला की कार्यप्रणाली पर विश्वास जताते हुए अपने बच्चों को इसी स्कूल में पढ़ाने का लिखित पत्र दिया. साथ ही पालकों ने भ्रम फैला रहे संगठनों पर पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की मांग शाला प्रबंधन व आदिवासी विभाग से की. 

    प्रोग्रेसिव्ह स्कूल के संचालक निरज कटकवार ने बताया कि शाला में पढ़ रहे लगभग 750 आदिवासी विद्यार्थियों को सभी सुविधाएं मुहैया करवाई जा रही है. शिक्षा के साथ खेल में भी उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रशिक्षण देकर प्रोत्साहित किया जा रहा है. उसी तरह नीट, जेईई व अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी नियमित रूप से कराई जा रही है.