paddy centers

    गोंदिया. जिले में 107 धान खरीदी केंद्रों को मंजूरी देकर खरीदी करने के आदेश 20 दिन पूर्व ही जिला मार्केटिंग फेडरेशन की ओर से दे दिए गए थे. जनप्रतिनिधियों ने धान खरीदी का शुभारंभ भी कर दिया था, लेकिन केंद्र संचालकों ने धान खरीदने से  इंकार कर दिया. इसका मुख्य कारण प्रलंबित मांगों का निपटारा नहीं करना बताया गया है.

    जब तक मांगों का निपटारा नहीं होता तब तक धान की खरीदी नहीं की जाएगी. इस तरह का निर्णय लिया गया था. खरीदी नहीं होने से किसानों में तीव्र असंतोष निर्माण हो रहा है. उल्लेखनीय है कि, जिले में जिला मार्केटिंग फेडरेशन के नियंत्रण में 107 धान खरीदी केंद्र संचालित हैं. जिसके  आदेश दे दिए गए.

    यहां तक कि  केंद्र संचालकों ने अपने-अपने क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों के हाथों खरीदी केंद्रों का उद्घाटन व भरपुर  प्रचार प्रसार भी करवाया लेकिन हकीकत कुछ और ही सामने आई. जब किसान धान बेचने  खरीदी केंद्रों पर ले जाते हैं तो उनका धान नहीं खरीदा गया. इस संदर्भ में जब केंद्र संचालकों से जानकारी ली गई तो बताया गया कि, संगठन ने कुछ मांगें रखी हैं.

    उन पर अमल नहीं किया जा रहा है. जैसे कि, हमाली का दर बढ़ाया जाए, कई वर्षों से गोदामों का किराया शासन पर बकाया है वह दिया जाए, धान से भरे गोदामों से धान समय पर नहीं उठाया जाता. उसे तत्काल उठाया जाए. कमीशन में बढ़ोतरी की जाए आदि मांगों का समावेश है. जब तक मांगें मंजूर नहीं होती तब तक धान नहीं खरीदने का निर्णय लिया गया था, लेकिन यह समस्या शासन व केंद्र संचालकों की है. फिर किसानों को  क्यों परेशानी में डाला जा रहा है ? ऐसा सवाल किसानों द्वारा किया जा रहा है.

    जिले में सिर्फ 6 केंद्रों पर धान खरीदी

    कागजों पर 107 केंद्र शुरू हैं, लेकिन हकीकत में सिर्फ 6 केंद्रों पर ही धान खरीदी शुरू है. इन केंद्रों पर 23 नवंबर तक 288 किसानों से कुल 8 हजार 717 क्विंटल धान खरीदा गया है. जबकि, गत वर्ष इसी कालावधि में 1 हजार 330 किसानों से 36 हजार 331 क्विंटल धान की खरीदी की गई थी. गत वर्ष की तुलना में 10 प्रश. भी धान की खरीदी नहीं हो सकी है. यही कारण है कि, किसान मजबूरन अल्प दाम में दलालों को धान बेच रहे हैं.

     प्रभारी जिला मार्केटिंगअधिकारी अजय बिसने के अनुसार फेडरेशन द्वारा जिले में 107 खरीदी केंद्रों को मंजूरी दे दी गई है. केंद्र संचालकों ने कुछ मांगें रखी थी. उनकी मांगें शासन को प्रस्तुत की गई है. खरीदी बंद होने से उपरोक्त कालावधि के तुलना में इस वर्ष की कालावधि में धान खरीदी कम हुई है, लेकिन अब  सभी केंद्रों पर  खरीदी शुरू हो गई है.