बंद होगी ब्लड ऑन कॉल सेवा, शासन ने दी अंतिम अवधि

    गोंदिया. जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त पूर्ति हो इसके लिए राज्य शासन के सार्वजनिक स्वास्थ्य विभाग ने ब्लड ऑन कॉल अर्थात जीवन अमृत सेवा यह योजना शुरू की थी. निजी एजेंसी के माध्यम से यह सेवा फिलहाल क्रियान्वित है, इसमें अनेक जरूरतमंद लाभार्थियों को समय पर रक्त की पूर्ति हो रही है.

    जिससे मरीज व उनके परिजनों को भागदौड नहीं करनी पड़ती है लेकिन इस योजना को मार्च 2022 के अंत तक बंद करने का निर्णय राज्य शासन ने लिया है. जिससे इस योजना के अंतर्गत कार्यरत अधिकारी व कर्मचारियों को सेवामुक्त किया जाएगा. इतना ही नहीं उक्त योजना बंद होने से उसका असर मरीज व उनके परिजनों पर भी पड़ेगा. राज्य रक्त संक्रमण परिषद द्वारा राज्य में राष्ट्रीय रक्त नीति क्रियान्वित की जा रही है.

    इस नीति के तहत मरीजों को सुरक्षित, सहज रक्त व रक्तगट उपलब्ध करा दिया जाता है. राज्य के हर एक सरकारी अस्पताल में ब्लड ऑन कॉल जीवन अमृत सेवा यह योजना शुरू की गई है. मरीजों की जान बचाने के लिए अनेक बार रिश्तेदारों को जरूरी रक्तगट हासिल करने के लिए भागदौड करनी पड़ती है. कभी कभी मरीज के कोई भी रिश्तेदार नहीं होने से उन अस्पताल तक रक्त पूर्ति करने के लिए यह योजना बहुत बढिया उपक्रम साबित हुई है.

    इसमें 104 इस नि:शुल्क क्रमांक पर कॉल करने पर यह काल पुणे की काल सेंटर में लगता है, जहां पेंशट के नाम, आवश्यक रक्त गट की जानकारी देने पर वह कॉल जिले के शासकीय अस्पताल के ब्लड बैंक से जुडा होने के कारण संबंधित अस्पताल के मरीज को आवश्यकता के अनुसार उस रक्त गट की थैली शीतगृह की पेटी से निकालकर मरीज तक तत्काल पहुंचा दी जाती है. इस योजना से अब निजी अस्पताल में भी मरीजों को उस स्थान में रक्त पूर्ति करने की सुविधा राज्य रक्त संक्रमण परिषद द्वारा दी जा रही है.

    इसी तरह सिकलसेल व थॅलिसिमिया मरीजों को रक्त पूर्ति की जाती है. इस सबके बावजूद यह योजना मार्च के अंत तक बंद करने का निर्णय शासन ने लिया है. इतना ही नहीं इसकी पूर्व सूचना संबंधित एजेंसी को दी गई है. इस योजना के बंद होने से जरूरतमंद मरीजों को सहज व सुलभ रुप से होने वाले रक्त पूर्ति पर असर पडेगा. जिससे इस निर्णय पर शासन को पुर्नविचार करने की जरूरत है. 

    इस संबंध में रक्त पेढ़ी गोंदिया के अधिकारी डा. अनिल गोंडाने ने बताया कि ब्लड ऑन कॉल सेवा बहुत कम समय में महत्वपूर्ण बन गई थी. इससे मरीज व उनके परिजनों को रक्त के लिए भटकना नहीं पड़ता था. इसका सकारात्मक परिणाम भी दिखाई दिया. रक्तदान के लिए जनजागृति कर जिले में बड़े पैमाने पर रक्त संकलन कर उसे जरूरतमंद लोगों तक पहुंचाय जा रहा था. यह योजना अनेक लोगों के लिए जीवनदायी साबित हुई है. जिससे शासन इस योजना को बंद न करे. शासन इस निर्णय पर अवश्यक विचार करें. 

    कर्मचारी हो जाएंगे बेरोजगार 

    संपूर्ण राज्य में यह योजना शुरू है, गोंदिया जिले में भी इसका लाभ मरीजों को मिल रहा है. शासन के इस निर्णय से राज्य के 130 से अधिक तथा गोंदिया स्थित रक्त पेढी के तीन से चार कर्मचारियों पर बेरोजगार होने की नौबत आ जाएगी.