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    गोंदिया. राज्य सरकार ने 1 दिसंबर से सभी कक्षाओं के स्कूल खोलने की अनुमति तो दे दी है, लेकिन अब तक गाइडलाइंस जारी नहीं की गई है. यही वजह है कि पालकों सहित शिक्षकों में संभ्रम की स्थिति बनी हुई है. बस और वैन की मंजूरी, फीस सहित अनेक सवाल हैं, जिन्हें लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हुई है.

    जिससे नई गाइडलाइंस का पालक व शिक्षक  इंतजार कर रहे हैं. हालांकि जिले में कोरोना के मरीज लगभग कम हो गये हैं, लेकिन अफ्रीकी देशों में फैले नये वेरिएंट ने एक बार फिर टेंशन बढ़ा दिया है. यही वजह है कि पालकों के मन में अब भी कोरोना को लेकर संभ्रम का माहौल है.

    बच्चों को स्कूल भेजने पर संभ्रम

    कुछ पालकों का कहना है कि इस सत्रभर आनलाइन क्लासेस ही चलाई जाये. बच्चों के मामले में जोखिम लेने की आवश्यकता नहीं है. वहीं कुछ पालक मानते हैं कि बच्चे स्कूल जाना चाहिए, ताकि उनकी बौद्धिक क्षमता का विकास हो सके. लेकिन स्कूलों में सुरक्षित माहौल मिलेगा या नहीं, इसकी भी कोई गारंटी नहीं है. इस तरह तमाम तरह के सवाल हैं जो  सभी को परेशान कर रहे हैं.

    पालकों की सहमति अनिवार्य

    शिक्षकों का कहना है कि पुरानी गाइडलाइंस की तरह ही इस बार भी पालकों की सहमति आवश्यक होगी. बिना इसके  बच्चों को स्कूल में प्रवेश नहीं दिया जाएगा. जो बच्चे स्कूल नहीं आएंगे, उनके लिए आनलाइन क्लास की भी व्यवस्था होगी. उम्मीद है कि  तत्काल सरकार की ओर से गाइडलाइंस जारी कर दी जाएगी. इसके बाद स्थिति स्पष्ट हो जाएगी.

      बढ़ती जा रही दिक्कतें

    अब प्राइमरी की क्लासेस शुरू होने से दो बच्चे वाले पालकों के लिए दिक्कतें बढ़ जाएगी. बस और वैन को अनुमति मिलने से पालक भी बेफिक्र हो जाते, लेकिन लग रहा है अनुमति नहीं देगी. पालकों का कहना है कि लगभग पूरा सत्र बीत गया है. अब दिसंबर से लेकर मार्च तक स्कूलें शुरू रहेगी. अप्रैल-मई में परीक्षा ली जाएगी. यानि करीब 5 महीने का समय रह गया है. इस हालत में स्कूलों द्वारा फीस में राहत दी जाएगी या नहीं यह तय नहीं हो सका है.