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    गोंदिया. राज्य की जिप की शालाओं में और अच्छी पद्धति की शिक्षा मिले इसके लिए राजस्व व ग्राम विकास राज्य मंत्री अब्दुल सत्तार प्रयास कर रहे है. इसी श्रृंखला में दिल्ली निगम की शालाओं की तर्ज पर ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को शिक्षण मिले इसके लिए ग्राम विकास विभाग ने 7 अभ्यास गटों की स्थापना की है.

    जिससे यह गट दिल्ली की शैक्षणिक कार्य पद्धति पर अभ्यास करेगा. ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों को जिप की शाला में अंग्रेजी माध्यम की अच्छी शिक्षा मिलनी चाहिए. इसके पीछे का यह उद्देश्य है. आज की स्पर्धा वाले युग में ग्रामीण क्षेत्र के भी विद्यार्थियों को प्रगत तंत्रज्ञान सहित विश्व की सभी अत्याधुनिक शिक्षा मिलना जरूरी है. दिल्ली निगम अंतर्गत सभी शालाओं में शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए समयानुसार बड़े पैमाने पर परिवर्तन व सुधार किया गया है.

    इन शालाओं में विद्यार्थियों को अध्यापन कराने के लिए उपयोग किए जाने वाले तंत्रज्ञान, विद्यार्थी व शिक्षकों के लिए सुविधा, विद्यार्थियों के आचार विचार व अनुशासन, शिक्षकों की अध्यापन की कार्य पद्धति का गहरा अध्ययन विशेषज्ञ मंडली करेगी. इसका अहवाल राज्य सरकार को प्रस्तुत किया जाएगा.

    पिछले कुछ वर्षो से जिप की शालाओं का शैक्षणिक स्तर गिरा है. इसी में दिल्ली स्थित शासकीय शालाओं में सुधार यह एक आदर्श साबित हो रहा है. अब इसी तर्ज पर राज्य में भी जिप की शालाओं को आधुनिक करने का मानस राज्य शासन का है. इस दिशा में गतिविधियां शुरू हो गई है. जिससे आगामी काल में जिप की शाला सर्वगुण संपन्न होगी. ऐसी अपेक्षा व्यक्त की जा रही है.

    ग्राम विकास विभाग ने की समिति गठित

    दिल्ली नगर निगम की शालाओं की शैक्षणिक पद्धति का अभ्यास करने के लिए ग्राम विकास विभाग ने 7 विशेषज्ञों की अध्ययन समिति की स्थापना की है. जिसमे औरंगाबाद जिला परिषद के सीईओ निशेल गटने, औरंगाबाद जिप के शिक्षण अधिकारी डा.बी.बी.चव्हान, सेवानिवृत्त विशेष लेखा परिक्षक सहकारी संस्था आर.एस.शेख, फर्दापुर स्थित सह शिक्षक काशिनाथ पाटील, अहमदनगर जिले की राहाता पंस के गटशिक्षणाधिकारी पोपट काले, सिल्लोड स्थित सहशिक्षक जगत सुरसे व वडग़ांव कोवहाटी स्थित मुख्याध्यापक सुनील चिपाटे का समावेश है.