महाविकास आघाडी के भ्रष्ट कार्य से किसान बर्बाद, सांसद मेंढे ने लगाया आरोप

    गोंदिया.  अतिवृष्टि ग्रस्तों को अल्प मदद देकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़कने वाली महाविकास आघाडी सरकार ने कर्जमाफी में भी किसानों के साथ धोखाधड़ी की है. फसल बीमा कंपनियों के लाभ के लिए शर्त बनाकर नुकसान मुआवजा मिलने से वंचित रखा. नैसर्गिक संकट से त्रस्त किसानों को मदद का हाथ देने के बजाए इस आघाडी सरकार ने राज्य के किसानों को बर्बाद किया है. ऐसा आरोप सांसद सुनील मेंढे ने एक चर्चा के दौरान लगाए है.

    भाजपा जिलाध्यक्ष केशवराव मानकर, पूर्व विधायक रमेश कुथे, पूर्व जिप अध्यक्ष नेतराम कटरे, जिला महामंत्री संजय कुलकर्णी, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष धनलाल ठाकरे,  ओबीसी मोर्चा जिलाध्यक्ष गजेंद्र फुंडे, उत्तर भारतीय मोर्चा जिलाध्यक्ष अमित झा, पूर्व सभापति छाया दसरे आदि उपस्थित थे.

    मेंढे ने आघाडी सरकार की किसान द्रोही भूमिका का पंचनामा प्रस्तुत किया व कहा कि सत्ता पर आने के पूर्व किसानों के खेतों में जाकर प्रति हेक्टेयर 50 हजार रु. की मदद दी जाए ऐसी मांग करने वाले उद्धव ठाकरे व अजीत पवार ने दो वर्ष में राज्य की अतिवृष्टि का, महा बाढ़ का और चक्रवाती तूफान से प्रभावित हुए किसानों की खुले हाथ से मदद करने की बजाए किसानों के साथ बडा मजाक किया है. अतिवृष्टि से प्रभावित हुए किसानों के लिए आघाडी सरकार ने 10 हजार करोड़ मदद का पैकेज घोषित किया.

    इसके पूर्व जुलाई में बाढ़ व बारिश से प्रभावितों को 11 हजार 500 करोड़ रु.का पैकेज घोषित किया था. इस मदद में 7 हजार करोड़ दीर्घकालीन उपाय योजना के लिए व 3 हजार करोड़ पुनर्वसन के लिए है. इसका अर्थ बाढ  व अतिवृष्टि ग्रस्तों के लिए केवल 1 हजार 500 करोड़ की तत्काल मदद की गई. संपूर्ण मराठवाडा, विदर्भ व पश्चिम महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्र में अतिवृष्टि से 50 लाख हेक्टेयर क्षेत्र की फसल जमीदोज हुई. इसके साथ ही हजारों हेक्टेयर जमीन खराब हुई, जानवर बह गए, घर गिर गए लेकिन सरकारी मदद में किसानों के इस नुकसान का विचार भी नहीं किया गया.

    किसानों की मदद करने की नौबत आने पर केंद्र सरकार की ओर उंगली दिखाकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाडने का कार्य आघाडी सरकार ने पिछले दो वर्ष में बार बार किया है. उत्तर प्रदेश के किसानों के लिए महाराष्ट्र बंद करने वाली शिवसेना, राकांपा व काग्रेस नेतृत्व को नैसर्गिक संकट का सामना करने वाले किसानों से भेंट करने का समय नहीं मिला.  बड़ा जोर करने के  बाद भी किसान कर्जमाफी सरकार प्रत्यक्ष रूप में नहीं कर पाई. 

    कर्ज माफी के लिए केवल 150 करोड़ रु. का प्रावधान किया है जिससे   सरकार ने फसल बीमा कराने वाली कंपनियों को लाभ पहुंचाने कडी शर्तें तैयार की है. राज्य के 30 लाख से अधिक किसानों ने इस वर्ष बीमा ही नहीं कराया है जबकि तत्कालिन   फडणवीस  सरकार के समय 85 लाख किसानों को फसल बीमा का मुआवजा मिला था. उस वर्ष फसल बीमा कंपनी को 1 हजार रु.का घाटा हुआ था.